कोल्हान का ‘मिनी जामताड़ा’ बना कोकदा गांव, जादूगोड़ा पुलिस की सख्त नजर, अब तक 8 साइबर अपराधी जेल भेजे गए
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा से मात्र 5 किलोमीटर और टाटानगर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पोटका प्रखंड के हाथी विदा पंचायत अंतर्गत कोकदा गांव, जो कभी मिट्टी के बर्तनों और मूर्तिकला के लिए मशहूर था, अब साइबर अपराध का गढ़ बन चुका है। कभी कला के लिए पहचाने जाने वाला यह गांव अब पूरे कोल्हान में ‘मिनी जामताड़ा’ के नाम से बदनाम हो गया है।

हाल के वर्षों में इस गांव के युवाओं का बड़ा वर्ग साइबर ठगी जैसे अपराधों में लिप्त पाया गया है। सोमवार को जादूगोड़ा पुलिस ने तीन युवकों – कैशव चंद्र भगत, कपिल देव भगत और गिरधारी भगत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इससे पहले भी घाटशिला पुलिस ने इसी गांव से रोहित भगत, मंतोष भगत, रणवीर भगत, रितेश भगत और निलय भगत सहित पांच अन्य युवकों को जेल भेजा था।

अचानक बढ़ी संपन्नता बनी संदेह का कारण
गांव के लोग बताते हैं कि जिन युवाओं के पास कभी साइकिल भी नहीं थी, वे अब चमचमाती कार और महंगी मोटरसाइकिलों में घूम रहे हैं। उनके पास महंगे स्मार्टफोन हैं, और कई परिवारों ने आलीशान मकान भी बना लिए हैं। इस अचानक हुई संपन्नता ने ग्रामीणों के बीच संदेह और डर दोनों पैदा कर दिया है।

गांव के युवकों में फैला साइबर नेटवर्क
ग्रामीणों का दावा है कि चाकुलिया के बेंद गांव के एक साइबर अपराधी ने सबसे पहले कोकदा में यह अपराध फैलाया, और अब यहां के एक स्थानीय नेता के बेटे के नेतृत्व में पूरा नेटवर्क चल रहा है। उस व्यक्ति का भाई पहले ही जेल जा चुका है, लेकिन मुख्य संचालक अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

ग्रामीण बताते हैं कि अब लोग एक-दूसरे को मोबाइल नंबर देने से भी कतराते हैं, और अपने बच्चों के विवाह संबंध तक टूट रहे हैं। लोग डर के माहौल में जी रहे हैं क्योंकि कई साइबर अपराधी इतने ताकतवर हो गए हैं कि वे विरोध करने वालों पर हमला तक कर सकते हैं।
पुलिस का बड़ा ऐक्शन जारी
मुसाबनी डीएसपी संदीप भगत ने स्पष्ट कहा है कि “क्षेत्र से साइबर अपराध को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।” पुलिस अब तक 8 युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और कॉल डिटेल्स की जांच तेजी से जारी है। कई संदिग्धों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही मुख्य सरगना की गिरफ्तारी की उम्मीद है।

गांव के बुजुर्ग और सजग नागरिक इस बदलाव को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि कोकदा फिर से अपनी पुरानी पहचान – मिट्टी के बर्तनों और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाए, ना कि साइबर अपराध के लिए।

