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    त्योहारों से पहले रसोई का बजट बिगड़ा: एक महीने में ₹17 महंगी हुई चीनी, ₹68 प्रति किलो तक पहुंचे भाव; ₹80 पार जाने की आशंका

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 19, 2026No Comments3 Mins Read
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    त्योहारों से पहले रसोई का बजट बिगड़ा: एक महीने में ₹17 महंगी हुई चीनी, ₹68 प्रति किलो तक पहुंचे भाव; ₹80 पार जाने की आशंका

    ​राष्ट्र संवाद संवाददाता

    ​त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले आम आदमी की रसोई का बजट गड़बड़ा गया है और थाली से मिठास गायब होने लगी है। स्थानीय बाजार में महज एक महीने के भीतर चीनी के भाव में ₹17 प्रति किलो की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
    ​थोक बाजार में जो चीनी पहले ₹47 प्रति किलो बिक रही थी, वह अब बढ़कर ₹62 से ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं खुदरा बाजार में आम उपभोक्ताओं को इसके लिए ₹68 प्रति किलो तक चुकाने पड़ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाले दिनों में चीनी ₹80 प्रति किलो का आंकड़ा भी पार कर सकती है।
    ​कीमतों में उछाल की मुख्य वजहें
    ​जमाखोरी और कृत्रिम किल्लत: रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और दिवाली जैसे त्योहारों की मांग को भुनाने के लिए बड़े थोक विक्रेताओं और सटोरियों ने गोदामों में भारी स्टॉक डंप कर लिया है। सप्लाई रोककर बाजार में कृत्रिम कमी (आर्टिफिशियल शॉर्टेज) पैदा की जा रही है।

    ​एथेनॉल निर्माण में गन्ने का डायवर्जन: पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की नीति के कारण चीनी मिलों द्वारा गन्ने के रस और शीरे का बड़ा हिस्सा बायोफ्यूल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।
    ​राष्ट्रीय उत्पादन में गिरावट: वर्ष 2021-22 में देश में जहां 35,760 हजार टन चीनी का उत्पादन हुआ था, वहीं 2025-26 के सत्र में यह घटकर 28,015 हजार टन रह गया है। प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

    ​बाहरी मंडियों पर निर्भरता: मुजफ्फरनगर और शामली जैसी प्रमुख मंडियों से आपूर्ति प्रभावित होते ही स्थानीय स्तर पर मुनाफाखोरी बढ़ जाती है।
    ​मिठाई उद्योग पर असर, ₹2 से ₹5 तक बढ़े दाम
    ​चीनी की कीमतों में उछाल का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ा है। मिठाई बनाने की लागत बढ़ने से दुकानदारों ने प्रति पीस मिठाई के दाम में ₹2 से ₹5 तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसका सीधा बोझ त्योहारों पर खरीदारी करने वाले आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

    ​खुदरा विक्रेता संघ ने प्रशासन से मांग की है कि कालाबाजारी रोकने के लिए थोक विक्रेताओं के गोदामों पर तुरंत छापेमारी की जाए और स्टॉक लिमिट तय कर सख्त कार्रवाई हो, ताकि त्योहारी सीजन में जनता को राहत मिल सके।

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