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    Home » डिजिटल इंडिया में ‘खाकी’ का खेल: ई-एफआईआर से नाम गायब करने पर हाईकोर्ट सख्त, अब वीडियो रिकॉर्डिंग होगी अनिवार्य
    झारखंड

    डिजिटल इंडिया में ‘खाकी’ का खेल: ई-एफआईआर से नाम गायब करने पर हाईकोर्ट सख्त, अब वीडियो रिकॉर्डिंग होगी अनिवार्य

    Aman OjhaBy Aman OjhaApril 25, 2026No Comments3 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जबलपुर (इंद्र यादव) भोपाल,डिजिटल इंडिया का मकसद था आम जनता को राहत देना, ताकि उन्हें पुलिस थानों की चौखट पर अपनी चप्पलें न घिसनी पड़ें। लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस ने इस आधुनिक सुविधा को भी ‘सेटिंग’ का जरिया बना लिया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे मामले की सुनवाई की, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और उनकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

     

    क्या है पूरा मामला

     

    भोपाल की डॉ. अंजलि मिश्रा ने कुछ प्रभावशाली (रसूखदार) पदाधिकारियों के खिलाफ ऑनलाइन ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत में आरोपियों के नाम साफ-साफ लिखे थे। नियम के मुताबिक, ई-एफआईआर जैसा दर्ज होती है, पुलिस को उसी आधार पर जांच आगे बढ़ानी चाहिए।

    लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब पुलिस ने इस शिकायत पर कार्रवाई की। आरोप है कि पुलिस ने अपनी ‘पसंद-नापसंद’ के आधार पर कुछ चुनिंदा लोगों को तो आरोपी बनाया, लेकिन रसूखदार नामों को एफआईआर से गायब कर दिया। यह सीधे तौर पर केस को कमजोर करने और बड़े नामों को बचाने की कोशिश नजर आई।

     

    हाईकोर्ट की फटकार: “कलम से सच नहीं दबा पाएगी पुलिस”

     

    जबलपुर हाईकोर्ट ने इस ‘सिलेक्टिव अप्रोच’ पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने माना कि पुलिस अपनी कलम की ताकत का गलत इस्तेमाल कर सच को तोड़-मरोड़ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश दिया है:

    वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य: अब बयान दर्ज करने के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग करना जरूरी होगा।

    पारदर्शिता पर जोर: ताकि पुलिस अपनी मर्जी से किसी का नाम हटा न सके और न ही पीड़ित के बयानों को बदल सके।

    जवाबदेही: अगर ई-एफआईआर और असल एफआईआर में अंतर पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।

     

    आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह खबर

     

    अक्सर देखा जाता है कि रसूखदारों के दबाव में पुलिस पीड़ित की मूल शिकायत को ही बदल देती है। डॉ. अंजलि मिश्रा का यह मामला उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो सिस्टम के भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं।

    अगर आपके साथ भी ऐसा होता है कि आपकी ई-एफआईआर में दिए गए नामों को पुलिस हटा देती है, तो आप कोर्ट की शरण ले सकते हैं। तकनीक आपकी सुविधा के लिए है, पुलिस की मनमानी के लिए नहीं।

     

    सावधान रहें, जागरूक बनें!

     

    डिजिटल इंडिया के दौर में अपनी शिकायत का स्क्रीनशॉट और ई-एफआईआर की कॉपी हमेशा सुरक्षित रखें। पुलिस को यह हक नहीं है कि वह आपकी शिकायत में काट-छाँट करे। हाईकोर्ट का यह कड़ा रुख साफ संदेश है कि खाकी अपनी कलम से सच को दबा नहीं सकती।सांकेतिक छवि।

     

    #DigitalIndia #EFIR #MPPolice #HighCourt #Justice #Awareness #JabalpurHighCourt

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