समझौता नहीं, सच की पत्रकारिता: राष्ट्रसंवाद के 25 साल
पत्रकारिता के गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज राष्ट्रसंवाद पत्रिका अपनी 25 वर्ष की यात्रा पूरी कर चुका है । इस अखबार से जुड़े हुए कलम के योद्धा पत्रकार साथी पूरी निष्ठा, निर्भीकता एवं प्रतिबद्धता से आज भी कलम के माध्यम से जन चेतना का संचार कर रहे हैं। राष्ट्रसंवाद के संपादक और एक सशक्त पत्रकार देवानंद जी ने हमेशा यह माना है कि समझौतों में घिरकर जनहित की पत्रकारिता नहीं की जा सकती और इसलिए उन्होंने हर चुनौतियों के बावजूद सच और सटीक लिखना जारी रखा। बिना किसी भय और किसी को प्रसन्न रखने की लालसा के एक अखबार को आकार देते रहना कोई सरल कार्य नहीं पर शायद ” देवानंद सिंह ” जैसा व्यक्तित्व सरल कार्य के लिए बना भी नहीं।
जमशेदपुर जैसे छोटे शहर में जहां हर दिन अलग-अलग तरह की बड़ी घटनाएं आकार लेती रहती हैं वहां समाज की नब्ज को पहचानते हुए और राजनीतिक गलियारों की टोह रखते हुए निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ समाचार लेखन करना एक स्तुत्य प्रयास है। समृद्ध वैचारिक विरासत और सामाजिक दायित्व बोध के बल पर ही 32 पन्नों के मासिक ब्लैक एंड व्हाइट से शुरू हुई यह यात्रा आज राष्ट्र संवाद समूह में परिवर्तित हुआ है। निडर पत्रकारिता के माध्यम से जन सरोकारों को स्वर देने और जमशेदपुर शहर के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में राष्ट्रसंवाद का योगदान आगे भी बना रहेगा, यही अपेक्षा करती हूं ।
डॉ कल्याणी कबीर
(शिक्षाविद सह साहित्यकार)

