जमशेदपुर: भीषण गर्मी में दो हिस्सों में बंटता बचपन, स्विमिंग पूल की ठंडक और स्वर्णरेखा की जोखिम भरी डुबकी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर में लगातार बढ़ती गर्मी ने बच्चों के बीच सामाजिक असमानता की एक तस्वीर साफ कर दी है। एक ओर शहर के लग्जरी स्विमिंग पूल, क्लब और वाटर पार्क बच्चों की चहल-पहल से गुलजार हैं, तो दूसरी ओर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे राहत पाने के लिए स्वर्णरेखा नदी, नहरों और असुरक्षित तालाबों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
शहर के बड़े क्लबों और निजी स्विमिंग पूलों में जहां आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षित लाइफगार्ड और मनोरंजन की तमाम सुविधाएं मौजूद हैं, वहीं इन जगहों की महंगी मेंबरशिप फीस और एंट्री चार्ज आम परिवारों की पहुंच से बाहर हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए इन सुविधाओं तक पहुंच बनाना लगभग असंभव हो जाता है।
इसके अलावा निजी क्लबों के सख्त नियम, ड्रेस कोड और अन्य औपचारिकताएं भी कई बच्चों के लिए एक अदृश्य दीवार बन जाती हैं। नतीजतन, तेज गर्मी से राहत पाने के लिए वे खुले जलस्रोतों—नदी, नहर और तालाब—में उतरने का जोखिम उठाते हैं, जहां हर साल डूबने जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन और समाज को मिलकर ऐसे सार्वजनिक और सुरक्षित जलक्रीड़ा केंद्र विकसित करने की जरूरत है, ताकि हर वर्ग के बच्चों को गर्मी से राहत पाने का सुरक्षित विकल्प मिल सके और उनका बचपन जोखिम में न पड़े।
तस्वीर उमाशंकर दुबे

