अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस: विज्ञान से संस्कृति तक प्रकाश की अविरल यात्रा
16 मई को संपूर्ण विश्व ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस’ मनाता है। यूनेस्को द्वारा घोषित यह दिवस विज्ञान, कला, संस्कृति, शिक्षा और सतत विकास में प्रकाश की केंद्रीय भूमिका का उत्सव है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रकाश-आधारित प्रौद्योगिकियों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और यह समझाना है कि प्रकाश किस प्रकार हमारे जीवन और समाज को नई दिशा दे रहा है।
16 मई 1960 का दिन विज्ञान के इतिहास में मील का पत्थर है। इसी दिन भौतिक विज्ञानी थियोडोर मैमन ने विश्व के पहले सफल लेजर का संचालन किया था। हालाँकि, इस क्रांति का वैचारिक बीज 1916 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने ‘उद्दीप्त उत्सर्जन’ के सिद्धांत से बोया था। उन्होंने बताया कि विशेष परिस्थितियों में परमाणु अतिरिक्त ऊर्जा को प्रकाश के रूप में छोड़ते हैं।
मैमन का लेजर आइंस्टीन के उसी सिद्धांत का व्यावहारिक रूप था। आज लेजर हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। आँखों की जटिल सर्जरी, कैंसर का उपचार, सुपरफास्ट इंटरनेट के लिए ऑप्टिकल फाइबर, बारकोड स्कैनिंग, औद्योगिक कटिंग से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान तक लेजर हर क्षेत्र में है। लेजर इस बात का प्रमाण है कि एक शुद्ध वैज्ञानिक खोज मानव जीवन को कैसे बदल सकती है। प्रकाश के अध्ययन से ही ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत, चिकित्सा निदान और ब्रह्मांड की समझ संभव हुई है।
प्रकाश केवल प्रयोगशाला का विषय नहीं है। यह सृष्टि का प्राण है। यदि ब्रह्मांड से प्रकाश विलुप्त हो जाए, तो जीवन की कल्पना असंभव है। पृथ्वी पर समस्त ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत सूर्य का प्रकाश है। पौधे क्लोरोफिल की सहायता से प्रकाश संश्लेषण करते हैं और हमें प्राणवायु ऑक्सीजन तथा भोजन प्रदान करते हैं।मानव शरीर के लिए भी सूर्य का प्रकाश अनिवार्य है। यह विटामिन-D का प्रमुख प्राकृतिक स्रोत है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। साथ ही, प्राकृतिक प्रकाश हमारी जैविक घड़ी को नियंत्रित करता है और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखता है। खगोल भौतिकी प्रकाश के माध्यम से ही ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करती है। क्वांटम प्रकाशिकी हमें पदार्थ की सूक्ष्मतम संरचना तक ले जाती है। विश्व की प्रायः सभी संस्कृतियों में प्रकाश को शुभ माना गया है। यह जीवन, ज्ञान, आशा और नवीनीकरण का सार्वभौमिक प्रतीक है। प्रकाश को ज्ञान और आध्यात्मिक जागृति से जोड़ा जाता है। इसे अज्ञान और असहिष्णुता के प्रतीक अंधकार के विपरीत देखा जाता है। दीपावली जैसे त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय के उत्सव हैं।
सामान्य जन अक्सर सूर्य के प्रकाश और लेजर को एक समझ लेते हैं। दोनों में मूलभूत अंतर है। सूर्य का प्रकाश बिखरता है, उसके कई रंग और तरंगदैर्ध्य होते हैं। इसके विपरीत, लेजर मानव-निर्मित, एकवर्णी और अत्यधिक संकीर्ण किरण है। साधारण टॉर्च की रोशनी फैल जाती है, पर लेजर की किरण एक बिंदु पर केंद्रित रहती है। इसी गुण के कारण लेजर लंबी दूरी तय कर पाता है और अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है। यूनेस्को इस दिवस के माध्यम से वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग पर बल देता है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रकाश की भूमिका निर्णायक है। सौर ऊर्जा स्वच्छ बिजली का सबसे बड़ा स्रोत बन रही है। एलईडी जैसी कुशल प्रकाश व्यवस्था से करोड़ों यूनिट बिजली बचाई जा सकती है।
प्रकाश ईश्वर का अनमोल उपहार है, पर इसका दुरुपयोग घातक है। अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश ‘प्रकाश प्रदूषण’ पैदा करता है जो पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। बिजली की बर्बादी से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस हमें दोहरा संदेश देता है। पहला, विज्ञान की उपलब्धियों का उत्सव मनाएँ और दूसरा, प्रकाश के प्रति उत्तरदायी बनें। अनावश्यक लाइटें बंद करना, ऊर्जा-कुशल उपकरण अपनाना और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना हमारा कर्तव्य है। यदि हम अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से दूर करेंगे, तो विज्ञान और संस्कृति दोनों समृद्ध होंगे। अतः आज प्रकाश दिवस के अवसर हमें संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम इस ज्योति को ज्ञान, शांति, विकास और करुणा के रूप में सदैव प्रज्वलित रखेंगे। क्योंकि अंततः, “प्रकाश ही जीवन है।”
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डॉ सुमन लता
असिस्टेंट प्रोफेसर, रंभा कॉलेज ऑफ एजुकेशन

