Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस: विज्ञान से संस्कृति तक प्रकाश की अविरल यात्रा
    Breaking News Business Headlines उत्तर प्रदेश ओड़िशा खबरें राज्य से चाईबासा जमशेदपुर जामताड़ा झारखंड दुमका धनबाद पटना पश्चिम बंगाल बिहार बेगूसराय मुंगेर मुजफ्फरपुर मेहमान का पन्ना रांची राष्ट्रीय शिक्षा संथाल परगना संथाल परगना समस्तीपुर सरायकेला-खरसावां हजारीबाग

    अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस: विज्ञान से संस्कृति तक प्रकाश की अविरल यात्रा

    News DeskBy News DeskMay 16, 2026No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस: विज्ञान से संस्कृति तक प्रकाश की अविरल यात्रा

    16 मई को संपूर्ण विश्व ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस’ मनाता है। यूनेस्को द्वारा घोषित यह दिवस विज्ञान, कला, संस्कृति, शिक्षा और सतत विकास में प्रकाश की केंद्रीय भूमिका का उत्सव है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रकाश-आधारित प्रौद्योगिकियों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और यह समझाना है कि प्रकाश किस प्रकार हमारे जीवन और समाज को नई दिशा दे रहा है।

    16 मई 1960 का दिन विज्ञान के इतिहास में मील का पत्थर है। इसी दिन भौतिक विज्ञानी थियोडोर मैमन ने विश्व के पहले सफल लेजर का संचालन किया था। हालाँकि, इस क्रांति का वैचारिक बीज 1916 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने ‘उद्दीप्त उत्सर्जन’ के सिद्धांत से बोया था। उन्होंने बताया कि विशेष परिस्थितियों में परमाणु अतिरिक्त ऊर्जा को प्रकाश के रूप में छोड़ते हैं।

    मैमन का लेजर आइंस्टीन के उसी सिद्धांत का व्यावहारिक रूप था। आज लेजर हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। आँखों की जटिल सर्जरी, कैंसर का उपचार, सुपरफास्ट इंटरनेट के लिए ऑप्टिकल फाइबर, बारकोड स्कैनिंग, औद्योगिक कटिंग से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान तक लेजर हर क्षेत्र में है। लेजर इस बात का प्रमाण है कि एक शुद्ध वैज्ञानिक खोज मानव जीवन को कैसे बदल सकती है। प्रकाश के अध्ययन से ही ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत, चिकित्सा निदान और ब्रह्मांड की समझ संभव हुई है।
    प्रकाश केवल प्रयोगशाला का विषय नहीं है। यह सृष्टि का प्राण है। यदि ब्रह्मांड से प्रकाश विलुप्त हो जाए, तो जीवन की कल्पना असंभव है। पृथ्वी पर समस्त ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत सूर्य का प्रकाश है। पौधे क्लोरोफिल की सहायता से प्रकाश संश्लेषण करते हैं और हमें प्राणवायु ऑक्सीजन तथा भोजन प्रदान करते हैं।मानव शरीर के लिए भी सूर्य का प्रकाश अनिवार्य है। यह विटामिन-D का प्रमुख प्राकृतिक स्रोत है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। साथ ही, प्राकृतिक प्रकाश हमारी जैविक घड़ी को नियंत्रित करता है और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखता है। खगोल भौतिकी प्रकाश के माध्यम से ही ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करती है। क्वांटम प्रकाशिकी हमें पदार्थ की सूक्ष्मतम संरचना तक ले जाती है। विश्व की प्रायः सभी संस्कृतियों में प्रकाश को शुभ माना गया है। यह जीवन, ज्ञान, आशा और नवीनीकरण का सार्वभौमिक प्रतीक है। प्रकाश को ज्ञान और आध्यात्मिक जागृति से जोड़ा जाता है। इसे अज्ञान और असहिष्णुता के प्रतीक अंधकार के विपरीत देखा जाता है। दीपावली जैसे त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय के उत्सव हैं।

    सामान्य जन अक्सर सूर्य के प्रकाश और लेजर को एक समझ लेते हैं। दोनों में मूलभूत अंतर है। सूर्य का प्रकाश बिखरता है, उसके कई रंग और तरंगदैर्ध्य होते हैं। इसके विपरीत, लेजर मानव-निर्मित, एकवर्णी और अत्यधिक संकीर्ण किरण है। साधारण टॉर्च की रोशनी फैल जाती है, पर लेजर की किरण एक बिंदु पर केंद्रित रहती है। इसी गुण के कारण लेजर लंबी दूरी तय कर पाता है और अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है। यूनेस्को इस दिवस के माध्यम से वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग पर बल देता है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रकाश की भूमिका निर्णायक है। सौर ऊर्जा स्वच्छ बिजली का सबसे बड़ा स्रोत बन रही है। एलईडी जैसी कुशल प्रकाश व्यवस्था से करोड़ों यूनिट बिजली बचाई जा सकती है।

    प्रकाश ईश्वर का अनमोल उपहार है, पर इसका दुरुपयोग घातक है। अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश ‘प्रकाश प्रदूषण’ पैदा करता है जो पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। बिजली की बर्बादी से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस हमें दोहरा संदेश देता है। पहला, विज्ञान की उपलब्धियों का उत्सव मनाएँ और दूसरा, प्रकाश के प्रति उत्तरदायी बनें। अनावश्यक लाइटें बंद करना, ऊर्जा-कुशल उपकरण अपनाना और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना हमारा कर्तव्य है। यदि हम अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से दूर करेंगे, तो विज्ञान और संस्कृति दोनों समृद्ध होंगे। अतः आज प्रकाश दिवस के अवसर हमें संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम इस ज्योति को ज्ञान, शांति, विकास और करुणा के रूप में सदैव प्रज्वलित रखेंगे। क्योंकि अंततः, “प्रकाश ही जीवन है।”

    :–
    डॉ सुमन लता
    असिस्टेंट प्रोफेसर, रंभा कॉलेज ऑफ एजुकेशन

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleराशन वितरण में अनियमितता पर होगी सख्त कार्रवाई : उपायुक्त राजीव रंजन
    Next Article बहरागोड़ा के मधुआबेड़ा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया वट सावित्री व्रत

    Related Posts

    15 साल बाद कुंवर सिंह मैदान के 50 घरों तक पहुंचा नल का पानी

    July 4, 2026

    सरायकेला के आसंगी चेक डैम में बड़ा हादसा, नहाने गए दो किशोर डूबे; एक का शव बरामद, दूसरे की तलाश जारी

    July 4, 2026

    हिमांशु सिंह हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, बोले- न्याय मिलने तक साथ खड़ी रहेगी पार्टी

    July 4, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    15 साल बाद कुंवर सिंह मैदान के 50 घरों तक पहुंचा नल का पानी

    सरायकेला के आसंगी चेक डैम में बड़ा हादसा, नहाने गए दो किशोर डूबे; एक का शव बरामद, दूसरे की तलाश जारी

    हिमांशु सिंह हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, बोले- न्याय मिलने तक साथ खड़ी रहेगी पार्टी

    गर्व का पल: जमशेदपुर की तनिषा गौतम का पीएम मोदी से संवाद, भारत की पहली कमर्शियल सेमीकंडक्टर चिप लॉन्च में अहम भूमिका

    व्यापारी समाज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए : बसंत कुमार मित्तल

    लातेहार भालू के हमले में युवक गंभीर रूप से घायल, सदर अस्पताल में चल रहा इलाज

    बाबा कान्हाईश्वर की पावन पहाड़ पूजा हमारी सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और सामाजिक समरसता का महान पर्व है : सांसद श्री बिद्युत बरण महतो

    नवापारा-राजिम: गौ सेवा और नशामुक्ति के संकल्प से जगमगाया तर्री नवापारा

    श्रीगंगानगर दुष्कर्म: 32 दरिंदों ने छीना बचपन, क्या हम बेटियों को सुरक्षित रख पाए?

    ‘विकसित भारत’ का संकल्प: दागी नेताओं से मुक्ति और नैतिक राजनीति की आवश्यकता

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.