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    Home » भारतीय कला परम्पराएं जीवंत सांस्कृतिक धरोहर : डॉ. सच्चिदानंद जोशी
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    भारतीय कला परम्पराएं जीवंत सांस्कृतिक धरोहर : डॉ. सच्चिदानंद जोशी

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMay 22, 2026No Comments2 Mins Read
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    भारतीय कला परम्पराएं जीवंत सांस्कृतिक धरोहर : डॉ. सच्चिदानंद जोशी

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला में 21 से 23 मई तक आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “अभिजातकलाकलापेषु भारतीय-ज्ञान-परम्परा” का शुभारम्भ हुआ। संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा, शास्त्रीय कलाओं और समकालीन सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के अंतर्संबंधों को समझना है।

    मुख्य वक्ता इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि भारतीय कला परम्पराएं केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि समाज को सांस्कृतिक आत्मबोध और आध्यात्मिक दृष्टि देने वाली जीवंत परम्पराएं हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली की समावेशी एवं बहुआयामी परंपरा पर बल देते हुए कहा कि इसे नई पीढ़ी के जीवन और अनुभवों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

    संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय कलाएं भारतीय दर्शन, अध्यात्म और सांस्कृतिक स्मृति की जीवंत अभिव्यक्तियां हैं। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. उमा अनंतानी ने भारतीय शास्त्रीय कलाओं की जड़ों को गुरु-शिष्य परम्परा, रस सिद्धांत और भारतीय दर्शन से जुड़ा बताया।

    उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न अकादमिक सत्रों में नाट्यशास्त्र, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, योग और कला-दर्शन पर व्याख्यान एवं प्रदर्शन आयोजित किए गए। आगामी सत्रों में भारतीय ज्ञान परम्परा, साहित्य, स्थापत्य, भक्ति परम्परा, नई शिक्षा नीति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर देश-विदेश के विद्वान अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

    भारतीय कला परम्पराएं जीवंत सांस्कृतिक धरोहर : डॉ. सच्चिदानंद जोशी
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