लेखक: महेन्द्र तिवारी
भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर दुनिया को अपनी मजबूती का परिचय दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। अप्रैल से जून 2026 के बीच हासिल हुई यह वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब विश्व अर्थव्यवस्था अनेक प्रकार की अनिश्चितताओं से घिरी हुई है। तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चिंताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी गति बनाए रखी है।
भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि के प्रमुख कारक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रदर्शन को देश के लिए असाधारण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की जनता की सामूहिक शक्ति ने अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। निश्चित रूप से 7.8 प्रतिशत की वृद्धि केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि देश के भीतर उत्पादन, उपभोग, निवेश और सेवाओं की गतिविधियां लगातार आगे बढ़ रही हैं।
घरेलू मांग और विनिर्माण क्षेत्र का योगदान
इस वृद्धि में घरेलू मांग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत की विशाल आबादी और बढ़ती आय के कारण घरेलू बाजार अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार बना हुआ है। उत्पादन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 9.2 प्रतिशत रही, जबकि वित्तीय सेवाओं सहित कई सेवा क्षेत्रों ने भी आर्थिक गतिविधियों को गति दी। निजी निवेश में मजबूती और ऋण की मांग में वृद्धि भी आर्थिक विस्तार के महत्वपूर्ण संकेत माने जा रहे हैं।
कच्चे तेल की चुनौतियों के बावजूद मजबूती
इस प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत कच्चे तेल की अपनी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा विदेश से पूरा करता है। तेल महंगा होने पर परिवहन से लेकर उत्पादन तक अनेक क्षेत्रों की लागत बढ़ती है और इसका असर आम उपभोक्ता तक पहुंच सकता है। इसके बावजूद अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर का मजबूत बने रहना भारत की आंतरिक आर्थिक क्षमता को दर्शाता है। हालांकि आगे भी महंगे तेल, महंगाई, वैश्विक तनाव और कमजोर वैश्विक मांग जैसी चुनौतियों पर नजर रखना जरूरी होगा।
आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का आह्वान
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का आह्वान भी किया है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्राओं और विदेश में होने वाले खर्च को कम करने तथा आवश्यकता न होने पर सोना खरीदने से बचने की अपील की है। इस अपील के पीछे विचार यह है कि देश की बचत और खर्च का बड़ा हिस्सा घरेलू अर्थव्यवस्था में रहे। यदि भारतीय नागरिक देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं तो इससे घरेलू उद्योग, छोटे कारोबार, कारीगर और रोजगार को लाभ मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार घरेलू बचत में वृद्धि आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
भविष्य की चुनौतियां और रास्ता
हालांकि 7.8 प्रतिशत की वृद्धि उत्साह बढ़ाने वाली है, लेकिन इसे लंबे समय तक बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण चुनौती होगी। आर्थिक विकास का वास्तविक लाभ तभी व्यापक रूप से दिखाई देगा, जब रोजगार के अवसर बढ़ें, किसानों की आय मजबूत हो, छोटे उद्योगों को गति मिले और आम परिवारों की क्रय शक्ति में सुधार आए। इसलिए तेज आर्थिक वृद्धि के साथ उसका समान और व्यापक वितरण भी आवश्यक है।
भारत के सामने विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की राह लंबी है और इसके लिए लगातार उच्च आर्थिक वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण रोजगार, आधुनिक बुनियादी ढांचा, मजबूत विनिर्माण और आत्मनिर्भर उत्पादन क्षमता जरूरी होगी। पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि ने निश्चित रूप से इस यात्रा को उत्साह दिया है। अब चुनौती यह है कि इस गति को केवल एक तिमाही की उपलब्धि न रहने दिया जाए, बल्कि इसे लगातार और टिकाऊ आर्थिक प्रगति में बदला जाए। यही मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक पहचान होगी।

