“बिहार में अपराध की गोलीबारी तेज़, राजनीतिक गोलाबारी और तीखी!
बिहार में कानून-व्यवस्था बेहाल: गोलीबारी, तेजाबकांड, अस्पताल में मर्डर — अब ‘अपराध’ बना राजनीतिक एजेंडा
चिराग पासवान और जीतेन राम मांझी का तंज—‘गोलीबारी धुआंधार है, नीतिशे सरकार है!’*
राष्ट्र संवाद ब्यूरो प्रमुख
अशोक कुमार ठाकुर
पटना:बिहार एक बार फिर अपराध की आग में झुलसता नज़र आ रहा है। राजधानी पटना से लेकर नवादा, बेगूसराय और पूर्णिया तक, ताबड़तोड़ घटनाओं की बाढ़ आई हुई है। अब यह महज़ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी गंभीर बहस का विषय बन चुका है।

बीते 48 घंटे में बिहार के प्रमुख जिलों में अपराध की ये तस्वीर सामने आई है:
नवादा: दिनदहाड़े भरे बाजार में अंधाधुंध गोलीबारी, दो लोग गंभीर रूप से घायल
बेगूसराय: युवक पर तेजाब डालकर हत्या की गई, आरोपी फरार।
पटना: पीएमसीएच परिसर में कुख्यात गैंगस्टर को सरेआम गोलियों से भून दिया गया।
राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ा दबाव

इन घटनाओं को लेकर विपक्ष पूरी तरह हमलावर है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने कहा,
“बिहार में गोली चलना अब कोई खबर नहीं रही। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें पुलिस और प्रशासन का कोई डर नहीं।”
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (से.) के नेता जीतेन राम मांझी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा,
“अब यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य में न कानून बचा है, न व्यवस्था। हर दिन का सूरज एक नई वारदात की रोशनी लेकर उगता है।”
नीतीश सरकार की चुप्पी पर सवाल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की जोड़ी पर विपक्ष के निशाने लगातार तेज होते जा रहे हैं। जनता सवाल कर रही है कि क्या ‘नीति से सरकार’ अब ‘अपराध से समझौता’ बन चुकी है?
बिहार की राजनीतिक हवा फिर से गर्म हो रही है। अपराध, जो कभी चुनाव में साइलेंट मुद्दा माना जाता था, अब विपक्ष के लिए सबसे मुखर हथियार बन चुका है।
भाजपा और एलजेपी, दोनों इसे 2025 के अंत में होने वाले संभावित चुनाव का शुरुआती एजेंडा बना चुके हैं।

बिहार के हालात फिलहाल भयावह हैं। सड़कों पर गोलियां चल रही हैं, तेजाब उड़ रहा है, अस्पतालों में मर्डर हो रहे हैं और सरकार की चुप्पी चीखती हुई दिख रही है। ऐसे में अगर नीतीश सरकार ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो यह मुद्दा सिर्फ ज़मीन पर नहीं, 2025 की चुनावी कुर्सी पर भी असर डालेगा।

