मोहरदा–बिरसानगर हुरलुंग क्षेत्र में सरकारी नाले पर अवैध अतिक्रमण जारी, प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
मोहरदा बिरसानगर हुरलुंग क्षेत्र में स्थित सरकारी नाला, जो स्थानीय ईको सिस्टम, बरसात के पानी की निकासी तथा पूरे इलाके की जल–प्रबंधन व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, लगातार अवैध अतिक्रमण की जद में आ रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि नाले की जमीन को हाईवा से पत्थर और मिट्टी डालकर भरा जा रहा है तथा उस पर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि यह नाला न सिर्फ सरकारी संपत्ति है, बल्कि बरसाती पानी को सुरक्षित रूप से निकालने का प्रमुख माध्यम भी है। ऐसे में इसका अतिक्रमण भविष्य में गंभीर आपदा का कारण बन सकता है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि नाले के दोनों किनारों पर बने मकानों और गैरेज के पास इस तरह अवैध भराई और निर्माण जारी रहा, तो अगले बरसात में तेज़ बहाव और तूफ़ानी पानी उन्हें भारी नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के पानी, आग और हवा को रोकने के किसी भी प्रयास का इतिहास हमेशा गंभीर दुष्परिणामों की ओर संकेत करता है।
नागरिकों ने आरोप लगाया है कि चिल्ड्रन डे की सरकारी छुट्टी और घाटशिला उपचुनाव की मतगणना में प्रशासनिक व्यस्तता के बीच भू-माफिया दिनदहाड़े सरकारी नाले और जमीन पर कब्ज़ा करने में लगे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्थानीय थाना बिरसानगर, अंचल कार्यालय एवं जेएनएसी को बार–बार शिकायत एवं व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई अब तक नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों ने प्रश्न खड़ा किया है कि लगातार शिकायतों के बाद भी इतनी बड़ी दुस्साहसिक गतिविधि कैसे जारी है? उन्होंने मांग की है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करते हुए सरकारी नाले पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को रोके और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि जनहित और पर्यावरण दोनों की रक्षा हो सके।

