इलाज सेवा है, लूट का लाइसेंस नहीं!
पूर्वी सिंहभूम में स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता पर सवाल, शिकायतों के बावजूद सिविल सर्जन कार्यालय मौन क्यों?
धीरज कुमार सिंह
अस्पताल में मरीज जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचता है, लेकिन कई बार इलाज का बिल ही उसके परिवार के लिए नई मुसीबत बन जाता है। डॉक्टर की फीस, जांच, बेड, ऑपरेशन और दवाइयों के खर्च की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
केंद्र सरकार ने अस्पतालों में सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित कराने तथा मौजूदा नियमों के अनुपालन की समीक्षा करने का आग्रह किया है। झारखंड में भी संबंधित प्रावधान लागू हैं। ऐसे में सवाल है कि नियमों का पालन आखिर सुनिश्चित कौन करेगा?
*पूर्वी सिंहभूम में शिकायतें, फिर भी कार्रवाई का इंतजार*
पूर्वी सिंहभूम में इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग का उदासीन रवैया गंभीर सवाल पैदा करता है। कई बार शिकायतों के बावजूद सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आती है। यदि शिकायतों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई ही नहीं होगी, तो मरीजों को राहत कैसे मिलेगी? विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि अस्पतालों में रेट चार्ट के नियमों का कितना पालन हो रहा है और उल्लंघन पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
रेट चार्ट महज दीवार की सजावट नहीं, मरीज के अधिकार और अस्पताल की जवाबदेही का प्रतीक है। इलाज से पहले खर्च की जानकारी, मदवार बिलिंग और अतिरिक्त वसूली की शिकायतों पर निष्पक्ष जांच अनिवार्य होनी चाहिए।
जिला स्वास्थ्य प्रशासन नियमित निरीक्षण करे और लापरवाही बरतने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे। केवल निर्देश जारी करने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी, जमीन पर परिणाम दिखने चाहिए।
सवाल सीधा है जब नियम मौजूद हैं और शिकायतें भी हो रही हैं, तो मरीजों को राहत के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? इलाज सेवा है, केवल कारोबार नहीं। मरीज की मजबूरी और प्रशासन की चुप्पी, दोनों ही जवाबदेही से बचने का बहाना नहीं बन सकते।
*बॉक्स*
बड़ा सवाल **कितने नर्सिंग होम के पास वैध कागजात, कितने कर रहे नियमों का पालन?**
पूर्वी सिंहभूम में कितने निजी अस्पताल और नर्सिंग होम वैध रूप से पंजीकृत हैं?
कितने संस्थानों के पास आवश्यक लाइसेंस और अन्य अनिवार्य दस्तावेज हैं?
कितने अस्पतालों में सरकार के निर्देशानुसार रेट चार्ट प्रदर्शित किया गया है?
शिकायतों के बाद सिविल सर्जन कार्यालय ने कितने संस्थानों की जांच की और कितनों पर कार्रवाई हुई?
*आखिर सिविल सर्जन कार्यालय कुंभकर्णी नींद में क्यों है? स्वास्थ्य विभाग इन सवालों पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करे। मरीजों के हित से जुड़े मामले में चुप्पी नहीं, जवाबदेही जरूरी है।*

