राज्यसभा सांसद प्रो.राकेश सिंहा के जन्मदिन के अवसर पर समर्पित डॉ. सुधांशु कुमार का लेख

बेगूसराय ,बिहार:बेगूसराय बौद्धिकों की धरती रही है। इस ज़रख़ेज़ भूमि ने न सिर्फ एक से बढ़कर एक अमूल्य रत्न पैदा किए बल्कि कुछ रत्नों को पल्लवित व पुष्पित होने के लिए अनुकूल माहौल भी प्रदान किया। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, निबंधकार वचनदेव कुमार से लेकर वैश्विक ख्याति प्राप्त इतिहासकार रामशरण शर्मा को कौन नहीं जानता। इतिहास, साहित्य, संस्कृति एवं कला को एक नई दशा एवं दिशा देने वाली इस पावन भूमि ने अपनी बहू पद्म भूषण शारदा सिन्हा को वह स्पेस मुहैया कराया जहाँ खड़ी होकर वह ऊँची एवं लंबी छलांग लगा सकें। आज इसी पावन व ज़रख़ेज़ भूमि के एक अमूल्य रत्न का जन्मदिवस है। ऐसा रत्न जिसने अपनी आभा से सबको आकर्षित किया है, जिसकी ओर बेगूसराय की आवाम पुरउम्मीद नजरों से देख रही है। मैं बात कर रहा हूँ भारतीय लोकतंत्र के उच्च सदन में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सांसद प्रो. राकेश सिन्हा की।
इन दिनों बेगूसराय के राजनैतिक गलियारों में जिस एक शख्स की सर्वाधिक चर्चा हो रही है, वे हैं प्रोफेसर व सांसद राकेश सिन्हा। हो भी क्यों न। बिहार की एकमात्र औद्योगिक नगरी बेगूसराय के लिए जिस शख्स ने बहुत गंभीरता और सजगता से काम किया है, वे हैं राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा। प्रो. सिन्हा एक दूरदर्शी राजनेता हैं। इनसे मेरा पहला परिचय उस समय हुआ जब वे बतौर सांसद एक मानसून सत्र में पॉपुलेशन कंट्रोल बिल पर अपनी राय रख रहे थे। मैंने महसूस किया कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश का एक प्रबुद्ध सांसद एक गंभीर राष्ट्रीय प्रश्न पर अपनी चिंता जाहिर कर रहा है। उसके बाद मैंने बतौर शोध अध्येता प्रो. सिन्हा और उनके महत्वपूर्ण कार्यों पर पैनी दृष्टि रखनी शुरू की। मैंने पाया कि इनकी चिंताओं के केंद्र में जो स्थान गृह जनपद बेगूसराय के लिए है, उतनी ही चिंता भारत के किसी सुदूरवर्ती इलाकों के लिए भी है। इस चिंता का ही प्रतिफल है कि सांसद महोदय भारत के सुदूर पूर्ववर्ती राज्य मेघालय पहुँच जाते हैं। मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स स्थित कोंगथोंग एवं उससे सटे तीन अन्य गाँवों को मूलभूत आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ अखिल भारतीय स्तर पर पहचान दिलाने का भगीरथ प्रयास प्रो. सिन्हा ने ही किया।
राकेश सिन्हा का व्यक्तित्व चुनौतियों को स्वीकार करने वाला रहा है। कहते हैं न कि मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्धारण ग्रह-नक्षत्र करते हैं। शिक्षक दिवस के दिन जन्मे प्रो. राकेश सिन्हा का व्यक्तित्व भी डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसा ही संघर्षशील और अडिग है। एक सच्चे अध्यापक की ये सबसे बड़ी खासियत है। मुझे याद है मटिहानी विधानसभा के विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह ने जब एक चुनावी सभा में इनके सामने पहाड़ सी चुनौती पेश करते हुए मटिहानी-शाम्हो पुल को सामने किया तब भी सांसद महोदय डिगे नहीं। गौरतलब है कि शाम्हो दियारा एवं मटिहानी की जनता पुल के लिए दशकों से माँग उठाती रही है। मैंने अपने उन मित्रों की वेदना को करीब से महसूस किया है जो पुल न होने की वजह से अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर थे। सांसद राकेश सिन्हा ने न सिर्फ भारत सरकार से पुल के लिए 5000 करोड़ आवंटित करवाया बल्कि विभागीय स्तर पर आने वाले हरेक व्यवधान को भी दूर किया। बकौल राकेश सिन्हा ‘शाम्हो पुल पर राहु-केतु की छाया नहीं पड़ी तो कार्य जल्दी शुरू होगा।’ राकेश सिन्हा के सद्प्रयासों से पुल निर्माण कार्य का आरंभ यथाशीघ्र होना है। इस पुल के बन जाने से बिहार, झारखंड, बंगाल के बीच की आवाजाही दुरुस्त होगी। दियारा क्षेत्र के किसानों एवं पशुपालकों को सीधे फायदा पहुँचेगा।
बेगूसराय के लाल राकेश सिन्हा ने समय-समय पर इस औद्योगिक नगरी की पीड़ा को समझा है। बिहार की एकमात्र औद्योगिक नगरी बेगूसराय के रेल यात्रा संबंधी मुद्दे हों या फिर हवाई यात्रा की शुरुआत करने का गुरुतर कार्य; प्रो. राकेश सिन्हा ने अपनी मातृभूमि को हरेक तरह की सुविधाओं से लैस करने का प्रण लिया है। प्राप्त सूचना के अनुसार प्रो. सिन्हा को इस दिशा में अभी शुरुआती सफलता मिलती भी दिख रही है। 5000 करोड़ की राशि आवंटन के तुरंत बाद केंद्र सरकार से उलाव हवाई अड्डा, बेगूसराय के लिए राशि आवंटित कराना एक शानदार उपलब्धि है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रो. सिन्हा का दृढ़ निश्चयी व्यक्तित्व बेगूसराय की हवाई यात्रा की दिशा में बड़ी सफलता हासिल करेगा।
संसद से लेकर सड़क तक प्रो. सिन्हा जब भी अपने गृह जनपद की समस्याओं और उसके समाधान के लिए बोलने उठते हैं तो लगता है कि बेगूसराय का कोई मौलिक चिंतक खड़ा होकर अपनी बात को पुरजोर तरीके से रख रहा है। बेगूसराय के नौलागढ़ एवं जयमंगलागढ़ पर अपनी बात रखते हुए जब कोई व्यक्ति ‘सभ्यताई राष्ट्र’ शब्द से अपने भाषण की शुरुआत करते हुए पाल राजवंश का इतिहास प्रस्तुत करने लगे तो आप अपने व्यस्ततम क्षणों में भी कान देने को तैयार हो जाते हैं। राकेश सिन्हा ऐसे चिंतक हैं जो सिर्फ बेगूसराय की आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए ही प्रतिबद्ध नहीं हैं बल्कि वे इस जिले के प्राकृतिक स्थलों को उचित स्थान दिलाने के लिए भी कटिबद्ध हैं। मंझौल अनुमंडल क्षेत्र के विश्व प्रसिद्ध रामसर साइट कावर झील पक्षी विहार के विकास को लेकर राज्यसभा में आदरणीय सांसद महोदय ने कई बार आवाज उठाई है। इनके प्रयासों का सकारात्मक असर भी उस क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। अद्यतन वे नावकोठी प्रखंड में स्थित 99 एकड़ में फैले गोखुर झील (मोईन झील) को रामसर साइट में शामिल कर राष्ट्रीय झील का दर्जा दिलाने के लिए लगातार सदन में अपनी माँग उठा रहे हैं।
इनके द्वारा उठाए गए प्रश्न इतने तार्किक और जरूरी होते हैं कि एक पल को विरोधी विचारधारा का व्यक्ति भी उनके पक्ष में आकर खड़ा हो जाता है। मसलन बेगूसराय के बढ़ते क्राइम ग्राफ पर उनकी चिंता को देखा जा सकता है। वे इस बात से चिंतित हैं कि अगर इसी तरह क्राइम बढ़ता रहा तो औद्योगिक नगरी बेगूसराय में निवेश का संकट खड़ा होगा। इस संकट से पूरा बिहार दशकों से जूझता रहा है। बिहार में बाहरी निवेश लगभग ठप्प है। 90 के दशक में बढ़ते क्राइम ने इस संकट को और गहराया। आज माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं सांसद महोदय के प्रयास से औद्योगिक नगरी बेगूसराय में तमाम जरूरी बदलाव हुए हैं। ऐसे में फिर से बढ़ता क्राइम चिंता का विषय तो है ही।
बरौनी फ्लैग नामकरण के मुद्दे को प्रो. राकेश सिन्हा ने जिस गंभीरता से भारत सरकार के वि-औपनिवेशीकरण मुहिम से जोड़ा वह काबिलेगौर है। कौन भारतीय होगा जो औपनिवेशिक दुःस्वप्नों से मुक्त नहीं होना चाहता है। कहना न होगा कि प्रो. सिन्हा समस्याओं की पेचीदगी को समझते हुए उसे गंभीरता से उठाने का हुनर रखते हैं। यही वह हुनर है जिसके माध्यम से राष्ट्र एवं समाज का समेकित विकास संभव है। इसी कारण बेगूसराय की प्रबुद्ध जनता अपने जिले के लिए डॉ. भोला सिंह का सच्चा उत्तराधिकारी प्रो. राकेश सिन्हा के रूप में देखती है। जब बेगूसराय के मित्रों से अपने जिले-जवार की बात होती है तो वे सभी प्रो. सिन्हा की तरफ आशान्वित नजरों से देखते हैं। हाल ही में सांसद महोदय द्वारा गोद ली गई सूजा पंचायत की जनता मुतमइन है कि जिस तरह सांसद महोदय ने सुदूर पूर्व के गाँवों को वैश्विक पहचान दिलाई, ठीक वहीं पहचान बेगूसराय के सूजा पंचायत को भी मिलेगी। ग्रामवासियों की यह आश्वस्ति ही प्रो. एवं सांसद राकेश सिन्हा की कामयाबी है। आज शिक्षक दिवस के दिन आदरणीय सांसद महोदय का जन्मदिन होता है। यह एक विरल संयोग है कि समाज एवं राजनीति में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयासरत शिक्षक प्रो. सिन्हा का जन्मदिन शिक्षक दिवस के दिन ही पड़ता है। इस जन्मदिवस के अवसर पर हम बेगूसरायवासी उनके दीर्घायु होने की कामना करते हैं। हमें विश्वास है कि बदलाव की जो बयार उन्होंने बेगूसराय में लाई है वो लगातार जारी रहेगी।
गो आबले हैं पाँव में फिर भी ऐ रहरवो।
मंज़िल की जुस्तुजू है तो जारी रहे सफ़र।।(नूर कुरैशी)
डॉ. सुधांशु कुमार
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
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