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    Home » आरोप हैं तो प्रमाण दें, आस्था स्थल को कठघरे में खड़ा न करें : सारना उमूल समिति
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    आरोप हैं तो प्रमाण दें, आस्था स्थल को कठघरे में खड़ा न करें : सारना उमूल समिति

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 24, 2026No Comments2 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला

    सारना उमूल समिति ने कहा है कि किसी व्यक्ति से जुड़े कथित अपराध की जिम्मेदारी पूरे समुदाय या उसके पवित्र पूजा स्थल पर डालना न्यायसंगत नहीं है। समिति ने सारना उमूल को एक हत्याकांड से जोड़कर सोशल मीडिया पर किए जा रहे प्रचार को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

    समिति के मुताबिक सारना उमूल की धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था सदियों पुरानी आदिवासी परंपराओं, माझी-पारगना व्यवस्था तथा लोकतांत्रिक रूप से गठित समिति के माध्यम से संचालित होती है। इसके साथ 174 गांवों के आदिवासी समाज की आस्था जुड़ी है। समिति ने कहा कि उसके भीतर अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा के लोग व्यक्तिगत रूप से हो सकते हैं, लेकिन संस्था किसी राजनीतिक दल की इकाई नहीं है।

    समिति ने कहा कि आपराधिक घटना की जांच कानून और जांच एजेंसियों का विषय है। यदि किसी के पास समिति या उसके किसी पदाधिकारी के आपराधिक गतिविधि में शामिल होने का प्रमाण है तो उसे प्रमाण सहित सामने लाया जाना चाहिए। केवल आरोप, अफवाह या संकेतों के आधार पर धार्मिक स्थल को अपराध से जोड़ना उचित नहीं।

    समिति ने मीडिया से अपील की कि खबर प्रकाशित करने से पहले सारना उमूल के धार्मिक एवं सामाजिक स्वरूप को समझा जाए। समिति ने चेतावनी दी कि आदिवासी आस्था और सांस्कृतिक स्थलों को सनसनीखेज प्रचार का माध्यम बनाने की कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

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