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    Home » 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक बदलाव, लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा वंदे मातरम्, फिर फहरेगा तिरंगा
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    80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक बदलाव, लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा वंदे मातरम्, फिर फहरेगा तिरंगा

    News DeskBy News DeskAugust 11, 2026No Comments6 Mins Read
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    नई दिल्ली. भारत के 80 वें स्वतंत्रता दिवस का समारोह इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है. 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से होने वाले राष्ट्रीय समारोह में पहली बार एक नया औपचारिक क्रम देखने को मिलेगा. राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ लाल किले की प्राचीर से बजाया जाएगा और इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे. ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान होगा. रक्षा मंत्रालय की ओर से समारोह की तैयारियों और कार्यक्रम के नए क्रम की जानकारी सामने आने के बाद इस बदलाव को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है.

    15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. स्वतंत्रता दिवस के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को केंद्र सरकार ने देश की उपलब्धियों, युवाओं की क्षमता और भविष्य के भारत की दिशा से जोड़ने की तैयारी की है. समारोह में इस बार ‘युवा शक्ति’ को विशेष महत्व दिया जाएगा. विद्यार्थियों, युवा नागरिकों, नवाचार करने वाले युवाओं और देश के विकास में योगदान देने वाली नई पीढ़ी को समारोह के केंद्र में रखने की तैयारी है. सरकार का कहना है कि युवाओं की उपलब्धियों और योगदान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित करना इस वर्ष के समारोह का प्रमुख उद्देश्य होगा.

    रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार इस बार लाल किले की प्राचीर पर कार्यक्रम का क्रम भी अलग होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राचीर पर पहुंचने के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा. इस दौरान समारोह में मौजूद लोगों के खड़े रहने की व्यवस्था होगी. इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और फिर राष्ट्रगान बजाया जाएगा. इस नए क्रम को स्वतंत्रता दिवस समारोह में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

    रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कार्यक्रम के नए क्रम को स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री के प्राचीर पर पहुंचने के बाद राष्ट्रीय गीत बजाया जाएगा और सभी लोग खड़े रहेंगे. इसके बाद ध्वजारोहण होगा और राष्ट्रगान बजाया जाएगा. इस तरह इस वर्ष का समारोह पारंपरिक कार्यक्रम के साथ एक नए औपचारिक क्रम को भी सामने रखेगा.

    ‘वंदे मातरम्’ को लेकर इस वर्ष पहले से ही देश में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं. वर्ष 2025 से इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में वर्षभर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. गणतंत्र दिवस 2026 के आयोजनों में भी ‘वंदे मातरम्’ को प्रमुख विषय बनाया गया था. अब स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय समारोह में लाल किले की प्राचीर से इसके गायन को शामिल किया जाना इस पूरे वर्ष चल रहे आयोजन से भी जुड़ा हुआ है.

    इस बार समारोह में युवा शक्ति को विशेष रूप से सामने लाने की तैयारी है. सरकार के अनुसार देश के युवा आज केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, नवाचार, उद्यमिता और विभिन्न क्षेत्रों में नए बदलाव ला रहे हैं. ऐसे युवाओं की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस समारोह से जोड़कर देश की नई पीढ़ी को प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा.

    युवा नवाचार की चर्चा करते हुए देश में विकसित हो रही नई तकनीकों और अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को भी सामने रखा जा रहा है. देश के विभिन्न हिस्सों में युवा इंजीनियर और उद्यमी किफायती अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने, अंतरिक्ष मलबे जैसी चुनौतियों से निपटने और प्रयोगशाला में तैयार तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं. सरकार के अनुसार ऐसे प्रयास भारत की युवा क्षमता और आत्मनिर्भरता की तस्वीर पेश करते हैं.

    रक्षा मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाओं को प्रमुखता देने की योजना हाल में हुई किसी घटना के जवाब में नहीं बनाई गई है. रक्षा सचिव के अनुसार युवाओं की उपलब्धियों और योगदान को स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रमुख स्थान देने की योजना पहले से तय थी. यानी सरकार इसे पहले से निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा बता रही है, न कि हाल के किसी घटनाक्रम से प्रेरित निर्णय.

    समारोह में राजनीतिक प्रोटोकॉल का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा. राष्ट्रीय समारोह में विपक्ष के नेता को औपचारिक रूप से आमंत्रित किए जाने की जानकारी दी गई है. बैठने की व्यवस्था केंद्र सरकार के निर्धारित वरीयता क्रम यानी ‘टेबल ऑफ प्रिसीडेंस’ के अनुसार की जाएगी. अधिकारियों के अनुसार विपक्ष के नेता का स्थान केंद्रीय मंत्रियों के बाद निर्धारित वरीयता क्रम के अनुरूप रहेगा. इससे यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय समारोह में राजनीतिक पदों की गरिमा और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा.

    लाल किले पर होने वाले इस वर्ष के समारोह की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है. देश-विदेश से आने वाले अतिथियों, विद्यार्थियों और आमंत्रित लोगों के लिए बैठने तथा प्रवेश की व्यवस्थाएं तय की जा रही हैं. समारोह में बड़ी संख्या में अतिथियों की मौजूदगी रहने की संभावना है. रिपोर्टों के अनुसार लगभग 27 हजार अतिथि, आगंतुक और विद्यार्थी इस राष्ट्रीय समारोह का हिस्सा बन सकते हैं.

    80वें स्वतंत्रता दिवस का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह आजादी के आठ दशक पूरे होने का अवसर है. वर्ष 1947 में मिली स्वतंत्रता से लेकर 2026 तक भारत ने लोकतंत्र, विज्ञान, तकनीक, कृषि, उद्योग, रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल क्षेत्र में लंबी यात्रा तय की है. ऐसे समय में स्वतंत्रता दिवस समारोह को केवल अतीत की उपलब्धियों तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की दिशा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.

    इस बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का गायन, उसके बाद ध्वजारोहण और फिर राष्ट्रगान का क्रम समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण रहने वाला है. इसके साथ ही युवा शक्ति को केंद्र में रखकर देश की नई पीढ़ी की उपलब्धियों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा. इस बदलाव के जरिए स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और भविष्य के भारत के बीच एक सीधा संबंध स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है.

    15 अगस्त को जब लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत की गूंज सुनाई देगी और उसके बाद तिरंगा फहराया जाएगा, तब 80वें स्वतंत्रता दिवस का समारोह इतिहास, परंपरा और भविष्य की आकांक्षाओं का एक साथ संदेश देगा. इस बार का समारोह यह बताने की कोशिश करेगा कि स्वतंत्रता केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी और नए भारत के निर्माण का संकल्प भी है.

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