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    Home » हेडलाइंस राष्ट्र संवाद बिहार
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    हेडलाइंस राष्ट्र संवाद बिहार

    Devanand SinghBy Devanand SinghOctober 16, 2020No Comments12 Mins Read
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    ????????नमस्कार ????????
    ????आपका राष्ट्र आपका संवाद ????
    ???? *राष्ट्र संवाद पञिका*????
    ????विश्वसनीयता के दो दशक????
    ????दिनांक 16अक्टूबर दिन शुक्रवार 2020????
    www.rastrasamvad.com
    www.rashtrasamvad.com
    Devanandsingh.com
    http://rashtrasamvadnews.blogspot.com/
    ????Channel: www.youtube.com//rsamvadnews
    ????NOW RASHTRASAMVAD AVAILABLE ON MOBILE APP????
    JHAHIN2000/1039
    *राष्ट्र संवाद नजरिया :
    *********************
    *खगड़िया- यात्री बस और ट्रक में बीच भीषण टक्कर*

    हादसे में एक की मौत,आधा दर्जन से अधिक घायल

    घायलों का इलाज जारी,तीन की हालत गंभीर

    *मानसी थाना के NH -31 के कसरैया धार की घटना*
    ✍ *डिप्टी सीएम सुशील मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस*

    *तेजस्वी के संपत्ति को लेकर किया प्रेस कॉन्फ्रेंस*

    ‘संपत्ति को लेकर तेजस्वी ने दी गलत जानकारी’

    ‘चार करोड़ 10 लाख ऋण किसी कंपनी को दिया है ‘

    ‘किस कंपनी को दिया इसकी जानकारी नहीं दी’
    ✍ *कांग्रेस से शरद यादव की बेटी को मिला सिंबल*

    मधेपुरा के बिहारीगंज विधानसभा से लड़ेंगी चुनाव

    सिंबल मिलने पर सुभाषिनी का बयान

    ‘लोकल स्तर के मुद्दों को लेकर चुनाव में जाऊंगी’

    ‘क्षेत्रीय विषय पर चुनाव होना चाहिए’

    ✍*बिहार में कोरोना के 1,276 नए मामले*

    24 घंटे में कुल 1,08,085 सैम्पल की जांच

    अबतक कुल 1,88,802 मरीज हुए स्वस्थ

    *कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 11,050*

    सूबे में कोरोना मरीजों का रिकवरी प्रतिशत 94.01
    ✍ *मुजफ्फरपुर- महागठबंधन से CPI उम्मीदवार गिरफ्तार*

    औराई विधानसभा से उम्मीदवार हैं आफताब आलम

    पूर्व के दर्ज मामले में प्रत्याशी की हुई गिरफ्तारी
    ✍ *पालीगंज- नदी पार करने के दौरान दो लोग डूबे*

    एक की मौके पर मौत,एक को ग्रामीणों ने बचाया

    सिगोड़ी थाने समदा गांव के पास हुआ हादसा

    ✍ *हाथरस केस* को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। याचिका में केस को दिल्ली ट्रांसफर करने और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।
    ✍ *पटना – बीजेपी प्रत्याशी नीतीन नवीन ने किया नामांकन*

    बांकीपुर सीट के लिए दाखिल किया नामांकन
    ✍ *सीवान में आठ प्रत्याशियों पर मामला दर्ज*

    *आदर्श आचार संहिता* उल्लंघन मामले में FIR दर्ज

    आरजेडी से अवध बिहारी पर मामला दर्ज

    माले प्रत्याशी अमरनाथ यादव पर मामला दर्ज

    *इस नवरात्रि शेर की सवारी छोड़ घोड़े पर आ रही है मां दुर्गा,*

    जानिए सर्वार्थसिद्धि योग से प्रारंभ कितना शुभ रहेगा ये साल

    *17 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू हो रही है l हिन्दू धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व होता है l नवरात्र मां नवदुर्गा की उपासना का पर्व है l ये हर साल श्राद्ध खत्म होते ही शुरू होता है l लेकिन इस बार अधिक मास लगने के कारण नवरात्रि 25 दिन देरी से शुरू हो रही हैं l नवरात्रि का सही समय, नवरात्रि 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर (तक रहेंगी l*

    इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ेगी, जिसके कारण नवरात्र में देवी आराधना के लिए पूरे 9 दिन मिलेंगे l

    *अष्टमी और नवमी 24 अक्टूबर को*

    17 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू हो जाएगी. इसी दिन प्रतिपदा यानी पहली तिथि में घट स्थापना होगी l इसके बाद 18 को नवरात्र का दूसरा दिन, 19 को तीसरा, 20 को चौथा, 21 को पांचवां, 22 छठा, 23 को सातवां दिन रहेगा. 24 तारीख को सूर्योदय के वक्त अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि रहेगी. इसलिए धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार, अगले दिन शाम के समय यानी विजय मुहूर्त में दशमी तिथि होने से 25 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाना चाहिए l

    *खरीदारी करने के लिए नवरात्र में हर दिन रहेगा शुभ मुहूर्त*

    17 अक्टूबर से नवरात्र प्रारंभ हो रहा है l इसके साथ ही प्रॉपर्टी, व्हीकल और अन्य चीजों की खरीदारी के लिए नवरात्र में हर दिन शुभ मुहूर्त रहेगा l देवी भागवत के अनुसार इस बार शनिवार को घट स्थापना होने से देवी का वाहन घोड़ा रहेगा l इसके प्रभाव से पड़ोसी देश से तनाव बढ़ने की आशंका है और देश में राजनीतिक उथल-पुथल भी हो सकती है l

    *खरीदारी करने के लिए नवरात्र में हर दिन रहेगा शुभ मुहूर्त*

    17 अक्टूबर से नवरात्र प्रारंभ हो रहा है. इसके साथ ही प्रॉपर्टी, व्हीकल और अन्य चीजों की खरीदारी के लिए नवरात्र में हर दिन शुभ मुहूर्त रहेगा. देवी भागवत के अनुसार इस बार शनिवार को घट स्थापना होने से देवी का वाहन घोड़ा रहेगा. इसके प्रभाव से पड़ोसी देश से तनाव बढ़ने की आशंका है और देश में राजनीतिक उथल-पुथल भी हो सकती है.

    *जानें नवरात्रि में हर दिन का शुभ मुहूर्त*

    इस बार सर्वार्थसिद्धि योग में नवरात्र शुरू हो रहा है. नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना शुभ मुहूर्त में होगी. ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद शुभ माना जाता है, जो पूजा उपासना में अभीष्ट सिद्धि देगा. साथ ही दशहरे तक खरीदारी के लिए त्रिपुष्कर, सौभाग्य और रवियोग जैसे खास मुहूर्त भी रहेंगे. इन शुभ संयोग में प्रॉपर्टी, व्हीकल, फर्नीचर, भौतिक सुख-सुविधाओं के सामान और अन्य तरह की मांगलिक कामों के लिए खरीदारी करना शुभ रहेगा.

    *इस बार घोड़ा पर होगा देवी का आगमन*

    इस बार दुर्गा मां का वाहन सिंह है, लेकिन इस बार मां दुर्गा का वाहन घोड़ा रहेगा. इस नवरात्रि में देवी का आगमन घोड़े पर होगा. हर साल नवरात्र पर देवी अलग-अलग वाहन से धरती पर आती हैं. नवरात्रि की शुरुआत शनिवार के दिन से हो रही है. नवरात्रि का पहला दिन शनिवार होने के कारण मां दुर्गा घोड़े की सवारी करते हुए पृथ्वी पर आएंगी. जब मां दुर्गा की सवारी घोड़ा रहता है तब पड़ोसी देशों से युद्ध, गृह युद्ध, आंधी-तूफान और सत्ता में उथल-पुथल जैसी गतिविधियां बढ़ने की आशंका रहती है. साथ ही नवरात्र का आखिरी दिन रविवार होने से देवी भैंसे पर सवार होकर जाएंगी, इसके अशुभ फल के अनुसार देश में रोग और शोक बढ़ने की आशंका है.

    *शारदीय नवरात्रि 2020 पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट और नवरूप के पूजन का मंत्र*

    लाल चुनरी, आम के पत्‍ते, लाल वस्त्र, मौली, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी/ तेल, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, धूप, अगरबत्ती, माचिस, चौकी, चौकी के लिए लाल कपड़ा, नारियल, दुर्गा सप्‍तशती किताब, कलश, साफ चावल, कुमकुम, फूल, फूलों का हार, चालीसा व आरती की किताब, देवी की प्रतिमा या फोटो, पान, सुपारी, लाल झंडा, लौंग, इलायची, बताशे या मिसरी, कपूर, उपले, फल-मिठाई, कलावा, मेवे की खरीदारी जरूर कर लें.

    जानें किस दिन कौन सी देवी की होगी पूजा

    *17 अक्टूबर- मां शैलपुत्री पूजा घटस्थापना*

    मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप ‘शैलपुत्री’
    नवरात्र का पहला दिन है और इस दिन घटस्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का पूजन, अर्चन और स्तवन किया जाता है। शैल का अर्थ है हिमालय और पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। पार्वती के रूप में इन्हें भगवान शंकर की पत्नी के रूप में भी जाना जाता है। वृषभ (बैल) इनका वाहन होने के कारण इन्हें वृषभारूढा के नाम से भी जाना जाता है। इनके दाएं हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में इन्होंने कमल धारण किया हुआ है। मां शैलपुत्री का पूजन और स्तवन निम्न मंत्र से किया जाता है।
    वन्दे वांछितलाभाय, चंद्रार्धकृतशेखराम्‌।
    वृषारूढां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥
    अर्थात मैं मनोवांछित लाभ के लिये अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाली, वृष पर सवार रहने वाली, शूलधारिणी और यशस्विनी मां शैलपुत्री की वंदना करता हूं।

    18 अक्टूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
    मां दुर्गा का दूसरा रूप ‘ब्रह्मचारिणी’
    नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ‘देवी ब्रह्मचारिणी’ रूप की पूजा करने का विधान है। मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। शास्त्रों में बताया गया है कि मां दुर्गा ने पार्वती के रूप में पर्वतराज के यहां पुत्री बनकर जन्म लिया और महर्षि नारद के कहने पर अपने जीवन में भगवान महादेव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक अपनी कठिन तपस्या के कारण ही इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। अपनी इस तपस्या की अवधि में इन्होंने कई वर्षों तक निराहार रहकर और अत्यन्त कठिन तप से महादेव को प्रसन्न कर लिया। इनके इसी रूप की पूजा और स्तवन दूसरे नवरात्र पर किया जाता है।
    मां ब्रह्मचारिणी की पूजा निम्न मंत्र के माध्यम से की जाती है-
    दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।
    देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
    (अर्थात जिनके एक हाथ में अक्षमाला है और दूसरे हाथ में कमण्डल है, ऐसी उत्तम ब्रह्मचारिणीरूपा मां दुर्गा मुझ पर कृपा करें।)

    19 अक्टूबर- मां चंद्रघंटा पूजा
    मां दुर्गा का तीसरा रूप मां ‘चंद्रघंटा’
    नवरात्र के तीसरे दिन दुर्गाजी के तीसरे रूप चंद्रघंटा देवी के वंदन, पूजन और स्तवन करने का विधान है। इन देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध चंदंमा विराजमान है इसीलिये इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। इस देवी के दस हाथ माने गए हैं और ये खड्ग आदि विभिन्न अस्त्र और शस्त्र से सुसज्जित हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी के इस रूप की पूजा करने से मन को अलौकिक शांति प्राप्त होती है और इससे न केवल इस लोक में अपितु परलोक में भी परम कल्याण की प्राप्ति होती है।
    इनकी पूजा अर्चना के लिये निम्न मंत्र बताया गया है।
    पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
    प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।
    (अर्थात श्रेष्ठ सिंह पर सवार और चंडकादि अस्त्र शस्त्र से युक्त मां चंद्रघंटा मुझ पर अपनी कृपा करें।)

    20 अक्टूबर- मां कुष्मांडा पूजा
    मां दुर्गा का चौथा रूप ‘कूष्मांडा
    नवरात्र के चौथे दिन दुर्गाजी के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा और अर्चना की जाती है। माना जाता है कि सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व जब चारों ओर अंधकार था तो मां दुर्गा ने इस अंड यानी ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। सृष्टि की उत्पत्ति करने के कारण इन्हें आदिशक्ति नाम से भी अभिहित किया जाता है। इनकी आठ भुजाएं हैं और ये सिंह पर सवार हैं। सात हाथों में चक्र, गदा, धनुष, कमण्डल, कलश, बाण और कमल है।
    मां दुर्गा के इस कूष्मांडा स्वरूप की पूजा अर्चना निम्न मंत्र से करनी चाहिए –
    सुरासंपूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।
    दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे।।
    (अर्थात अमृत से परिपूरित कलश को धारण करने वाली और कमलपुष्प से युक्त तेजोमय मां कूष्मांडा हमें सब कार्यों में शुभदायी सिद्ध हो)

    21 अक्टूबर- मां स्कंदमाता पूजा
    मां दुर्गा का पांचवां रूप ‘मां स्कंदमाता
    नवरात्र के पांचवे दिन दुर्गाजी के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा और अर्चना की जाती है। स्कंद शिव और पार्वती के दूसरे और षडानन (छह मुख वाले) पुत्र कार्तिकेय का एक नाम है। स्कंद की मां होने के कारण ही इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। मां के इस रूप की चार भुजाएं हैं और इन्होंने अपनी दाएं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद अर्थात कार्तिकेय को पकड़ा हुआ है और इसी तरफ वाली निचली भुजा के हाथ में कमल का फूल है। बाईं ओर की ऊपर वाली भुजा में वरद मुद्रा है और नीचे दूसरा श्वेत कमल का फूल है। सिंह इनका वाहन है। क्योंकि यह सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिये इनके चारों ओर सूर्य सदृश अलौकिक तेजोमय मंडल सा दिखाई देता है।
    स्कंदमाता के इस रूप की आराधना निम्न मंत्र से करनी चाहिए-
    सिंहासनगता नित्यं, पद्माश्रितकरद्वया।
    शुभदास्तु सदा देवी, स्कंदमाता यशस्विनी।।

    22 अक्टूबर- षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
    मां दुर्गा का छठा रूप ‘मां कात्यायनी
    नवरात्र के छठे दिन दुर्गाजी के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा और अर्चना की जाती है। ऐसा विश्वास है कि इनकी उपासना करने वाले को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति हो जाती है। क्योंकि इन्होंने कात्य गोत्र के महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, इसीलिये इनका नाम कात्यायनी पड़ा। इनका रंग स्वर्ण की भांति अन्यन्त चमकीला है और इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं ओर के ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में खड्ग अर्थात् तलवार है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है। इनका वाहन भी सिंह है। इनकी पूजा, अर्चना और स्तवन निम्न मंत्र से किया जाता है।
    चंद्रहासोज्ज्वलकरा, शार्दूलवरवाहना।
    कात्यायनी शुभं दद्यात्, देवी दानवघातनी।।

    23 अक्टूबर- मां कालरात्रि पूजा
    मां दुर्गा का सातवां रूप ‘मां कालरात्रि
    नवरात्र के सातवें दिन दुर्गाजी के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा और अर्चना का विधान है। इनका वर्ण अंधकार की भांति एकदम काला है। बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में दिखाई देने वाली माला बिजली की भांति देदीप्यमान है। इन्हें तमाम आसुरिक शक्तियों का विनाश करने वाला बताया गया है। इनके तीन नेत्र हैं और चार हाथ हैं जिनमें एक में खड्ग अर्थात् तलवार है तो दूसरे में लौह अस्त्र है, तीसरे हाथ में अभयमुद्रा है और चौथे हाथ में वरमुद्रा है। इनका वाहन गर्दभ अर्थात् गधा है। मां कालरात्रि की पूजा, अर्चना और स्तवन निम्न मंत्र से किया जाता है।
    एकवेणी जपाकर्ण, पूरा नग्ना खरास्थिता।
    लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी, तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
    वामपादोल्लसल्लोह, लताकंटकभूषणा।
    वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा, कालरात्रिभयंकरी।।

    24 अक्टूबर- मां महागौरी दुर्गा पूजा
    मां दुर्गा का आठवां रूप ‘मां महागौरी’
    नवरात्र के आठवें दिन दुर्गाजी के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा और अर्चना का विधान है। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट है कि इनका वर्ण पूर्ण रूप से गौर अर्थात् सफेद है। इनके वस्त्र भी सफेद रंग के हैं और सभी आभूषण भी श्वेत हैं। इनका वाहन वृषभ अर्थात् बैल है और इनके चार हाथ हैं। इनका ऊपर वाला दाहिना हाथ अभयमुद्रा में है और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में डमरू है और नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है। ऐसा वर्णन मिलता है कि भगवान् शिव को पतिरूप में पाने के लिये इन्होंने हजारों सालों तक कठिन तपस्या की थी जिस कारण इनका रंग काला पड़ गया था लेकिन बाद में भगवान् महादेव ने गंगा के जल से इनका वर्ण फिर से गौर कर दिया मां गौरी की अर्चना, पूजा और स्तवन निम्न मंत्र से किया जाता है।
    श्वेते वृषे समारूढा, श्वेताम्बरधरा शुचि:।
    महागौरी शुभं दद्यात्, महादेवप्रमोददाद।।

    *25 अक्टूबर- मां सिद्धिदात्री पूजारी मां दुर्गा का नौवां रूप ‘मां सिद्धिदात्री’ नवरात्र के नौवें दिन दुर्गाजी के नौवें स्वरूप मां सिद्धदात्री की पूजा और अर्चना का विधान है। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली देवी हैं मां सिद्धिदात्री। इनके चार हाथ हैं और ये कमल पुष्प पर विराजमान हैं। वैसे इनका वाहन भी सिंह ही है। इनके दाहिनी ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र है और ऊपर वाले हाथ में गदा है। बाईं ओर के नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है और ऊपर वाले हाथ में शंख है। प्राचीन शास्त्रों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, और वशित्व नामक आठ सिद्धियां बताई गई हैं। ये आठों सिद्धियां मां सिद्धिदात्री की पूजा और कृपा से प्राप्त की जा सकती हैं। हनुमान चालीसा में भी ‘अष्टसिद्धि नव निधि के दाता’ कहा गया है। मां सिद्धिदात्री की पूजा, अर्चना और स्तवन निम्न मंत्र से किया जाता है। सिद्धगंधर्वयक्षाद्यै:, असुरैरमरैरपि सेव्यमाना सदा भूयात्, सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।*

    ????आपका दिन मंगलमय हो ????
    ???????? धन्यवाद ????????
    ????????देवानंद सिंह ????????
    ????संपादक ????
    ???? अजय शास्त्री ????
    उप प्रभारी बिहार
    ???? राष्ट्र संवाद????

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