लुपुंगडीह गांव में पारंपरिक रीति से गिरिगोवर्धन पूजा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल चांडिल अनुमंडल के लुपुंगडीह गांव में हर साल की तरह इस बार भी गिरिगोवर्धन पूजा बड़े उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पूरे गांव में भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला।
गांव की महिलाओं ने परंपरागत तरीके से लकड़ी की ढेकी में चावल पीसकर गुड़ी तैयार की, जिसे देशी घी से बनाकर भगवान को अर्पित किया गया। पूजा के दौरान ग्रामीणों ने ओहिर के पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस दिन गौ माता की विशेष पूजा की जाती है। ग्रामीणों ने गायों और बछड़ों को रंगों और धान की मड़ से सजाया। महिलाएं अपने घरों के आंगन को रंगोली से सजाकर उसमें गौ बछड़े को चलाती हैं — यह दृश्य अत्यंत आकर्षक प्रतीत होता है।
ग्वालिन महिलाओं ने व्रत रखकर गुड़ी सहित पारंपरिक मिष्ठान तैयार किए, जिन्हें शाम को पूजा-अर्चना के बाद भोग के रूप में चढ़ाया गया।
गिरिगोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ी है और दीपावली के अगले दिन पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
लुपुंगडीह गांव में अगले दिन सोहराय पर्व के रूप में भी उत्सव जारी रहा, जिसमें ग्रामीणों ने आपसी सौहार्द और परंपरा का उत्सवपूर्वक निर्वाह किया।

