

जमशेदपुर: शहर में साइबर अपराध की रीढ़ तोड़ते हुए पूर्वी सिंहभूम पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। फर्जी सिम कार्ड के जरिए देशभर में वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को धर दबोचा है, जिनमें दो POS एजेंट और Jio कंपनी का एक कर्मचारी शामिल हैं। सिटी एसपी ललित मीणा ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर इस पूरे नेटवर्क के तौर-तरीकों का पर्दाफाश किया।
खुफिया इनपुट पर हुई कार्रवाई, ऐसे खुला राज
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दूरसंचार विभाग से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर साइबर थाना की टीम ने जाल बिछाया। पता चला कि कुछ एजेंट सरकारी नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से सिम जारी कर रहे हैं। छापेमारी के दौरान रौनक कुमार (19) निवासी बर्मामाइंस, सन्नी कुमार साव (19) निवासी गोलमुरी और प्रकाश कुमार (33) निवासी टेल्को को गिरफ्तार किया गया। प्रकाश कुमार Jio कंपनी का कर्मचारी बताया जा रहा है, जिसकी मिलीभगत से यह गोरखधंधा महीनों से चल रहा था।
कैसे चलता था फर्जी सिम कार्ड का यह काला खेल
पूछताछ में जो खुलासा हुआ, वह चौंकाने वाला है। आरोपी KYC प्रक्रिया का दुरुपयोग करते थे। निशाने पर होते थे सीधे-सादे, कम पढ़े-लिखे या बुजुर्ग ग्राहक। एक ही ग्राहक के पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) पर दो या दो से अधिक सिम कार्ड एक्टिवेट कर दिए जाते थे।
- पहला सिम: ग्राहक को सौंप दिया जाता था ताकि उसे शक न हो।
- दूसरा सिम: चुपके से एक्टिवेट कर साइबर अपराधियों को मोटी रकम लेकर बेच दिया जाता था।
सिटी एसपी ललित मीणा ने बताया, “ये लोग निर्धारित दिशा-निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे थे। Jio कर्मचारी प्रकाश कुमार की भूमिका सिस्टम में गड़बड़ी कर सिम एक्टिवेशन में मदद करने की थी।”
देशभर में फैला था अपराध का जाल
बरामद 5 मोबाइल फोन और 9 सिम कार्ड तो बस एक झलक हैं। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क ने अब तक सैकड़ों की संख्या में फर्जी सिम कार्ड साइबर ठगों तक पहुंचाए हैं। इन सिमों का इस्तेमाल बैंक फ्रॉड, OTP स्कैम, लोन ऐप फ्रॉड और अन्य वित्तीय अपराधों में किया जाता रहा है। पीड़ित देश के कोने-कोने में बैठे हैं, लेकिन तार जमशेदपुर से जुड़े मिल रहे हैं।
इस संबंध में जमशेदपुर साइबर अपराध थाना में कांड संख्या 109/2026 दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई है। पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और बरामद मोबाइल के डेटा को खंगाल रही है ताकि पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क के तार कहां-कहां तक फैले हैं और अब तक कितने लोगों को चूना लगाया गया है।
आम जनता के लिए सबक और सावधानी
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही साइबर अपराधियों का हथियार बन सकती है। पुलिस ने अपील की है कि KYC दस्तावेज देते समय सतर्क रहें। किसी भी एजेंट को आधार या पैन कार्ड की फोटोकॉपी देते समय उस पर उद्देश्य लिखना न भूलें (जैसे: “Only for new SIM purchase at Jio store – Date”)। साथ ही, सिम लेने के बाद तुरंत चेक करें कि आपके नाम पर कितने नंबर एक्टिव हैं। इसके लिए आप संचार साथी पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पुलिस का दावा है कि यह गिरफ्तारी साइबर अपराधियों की कमर तोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े बड़े सरगनाओं तक भी पुलिस के पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

