

जमशेदपुर: शहर के सामाजिक एवं आध्यात्मिक संगठन आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में मानवता की अनूठी मिसाल देखने को मिली। मात्र 2 घंटे के भीतर संगठन के कार्यकर्ताओं ने 10 यूनिट रक्तदान कर अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे मरीजों के लिए नई आशा का संचार किया। इस पुनीत कार्य के पीछे की भावना को स्पष्ट करते हुए संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सुनील आनंद ने कहा कि यह रक्तदान मात्र एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि परमात्मा की सच्ची पूजा है।
रक्तदान शिविर में उमड़ा सेवा का जज्बा
रविवार को जमशेदपुर केंद्र पर लगे इस रक्तदान शिविर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय और सेवा-भाव से ओतप्रोत था। सुबह से ही युवा कार्यकर्ताओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। आनंद मार्ग के स्वयंसेवकों ने बिना किसी हिचक के अपनी बाजुएं आगे बढ़ाईं। ब्लड बैंक की टीम ने भी तत्परता दिखाते हुए मात्र दो घंटे की अवधि में दस यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य पूरा कर लिया। मौके पर मौजूद एक दाता राहुल कुमार ने बताया, “पहली बार रक्तदान कर रहा हूं, डर लग रहा था लेकिन सुनील भैया ने समझाया कि यह भगवान के बच्चों की जान बचाने जैसा है, तो सारा डर निकल गया।”
सुनील आनंद का संदेश: रक्तदान है परमात्मा की पूजा
शिविर का उद्घाटन करते हुए सुनील आनंद ने उपस्थित जनों को संबोधित किया। उनके शब्दों में गहरा दार्शनिक भाव था। उन्होंने कहा, “रक्तदान एक पूजा है। जिस तरह भगवान को खुश करने के लिए मनुष्य विभिन्न तरह के फल, फूल, पुष्प चढ़ाता है, ताकि भगवान खुश हो जाएं और उनसे वह कुछ मांगता भी है। परंतु यहां भगवान को खुश करने के लिए रक्तदान किया जाता है और वह भी किसके लिए? उन्हीं के बच्चे जो अस्पताल में कष्ट में हैं, उनके कष्ट दूर करने के लिए।”
उन्होंने आगे कहा, “भगवान के अस्वस्थ बच्चों को स्वस्थ करने के लिए हम रक्तदान करते हैं ताकि वे स्वस्थ हो जाएं तो स्वस्थ होने से क्या होगा? परमात्मा खुश होंगे। इसीलिए कहा जाता है मानव सेवा माधव सेवा। मानव की सेवा करने से ही माधव खुश हो जाते हैं।”
भाव के अभाव में सेवा बन जाती है जड़ क्रिया
सुनील आनंद ने सेवा के पीछे के मनोविज्ञान पर प्रकाश डालते हुए एक गंभीर चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, “जीवन में बड़ा से बड़ा काम भी, खासकर सेवा का काम भी भाव के अभाव में किया जाता है तो उसमें क्रूड भाव (जड़ भाव) जन्म लेता है। तमोगुण का प्रभाव ज्यादा हो जाता है जो कि कल्याणकारी नहीं होता। इसलिए मनुष्य को परमात्मीय भाव में कार्य करना चाहिए।” इस वक्तव्य ने वहां मौजूद हर कार्यकर्ता के मन को गहराई तक छू लिया। वरिष्ठ कार्यकर्ता अमित सरकार ने कहा, “आज पहली बार समझ आया कि रक्तदान केवल खून देना नहीं, आत्मा का एक अंश देना है।”
स्थानीय प्रशासन और ब्लड बैंक ने सराहा प्रयास
जमशेदपुर ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. एसके झा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल द्वारा कम समय में अधिक यूनिट रक्त संग्रह करना सराहनीय है। थैलेसीमिया और एनीमिया के मरीजों के लिए यह रक्त संजीवनी का काम करेगा।” उन्होंने शहर के अन्य सामाजिक संगठनों से भी ऐसी पहल करने की अपील की। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सुरक्षित रक्त की उपलब्धता किसी भी स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ होती है। अधिक जानकारी के लिए आप WHO की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
सेवा का सिलसिला रहेगा जारी
शिविर के समापन पर संगठन के क्षेत्रीय सचिव अवधेशानंद अवधूत ने घोषणा की कि यह रक्तदान शिविर एक बारगी आयोजन नहीं है। हर तिमाही में ऐसे शिविर लगाए जाएंगे ताकि जमशेदपुर के ब्लड बैंकों में रक्त की कमी न हो। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे और व्यसन से दूर रहकर नियमित रक्तदान करें। कार्यक्रम के अंत में सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र और पौधा देकर सम्मानित किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
- आयोजक: आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल
- स्थान: जमशेदपुर केंद्र
- संग्रह: 10 यूनिट रक्त (2 घंटे में)
- मुख्य वक्ता: सुनील आनंद
इस अवसर पर संगठन की महिला विंग की बहनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और रक्तदान के प्रति व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने का संकल्प लिया। स्थानीय निवासी श्रीमती मीना देवी ने कहा, “बेटियों को रक्तदान करते देख मन गदगद हो गया। यही असली महिला सशक्तिकरण है।” जमशेदपुर की धरती पर मानव सेवा के इस महायज्ञ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्ची भक्ति मंदिरों की चौखट तक सीमित नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता की सेवा में निहित है।

