राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखने लगा है। जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में गैस सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने होटल संचालकों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
जानकारी के अनुसार, होटल संचालकों को गैस सिलेंडर ब्लैक में खरीदना पड़ रहा है, जिसके लिए उन्हें एक सिलेंडर पर लगभग 2000 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। इसका सीधा असर खाने-पीने की वस्तुओं के दाम पर पड़ा है। जहां पहले इडली 5 रुपये में मिलती थी, अब उसकी कीमत बढ़कर 10 रुपये हो गई है। वहीं आलू चॉप और सिंघाड़ा भी 7 रुपये से बढ़कर 10 रुपये तक पहुंच गए हैं। अन्य खाद्य पदार्थों में भी 3 से 5 रुपये तक की वृद्धि देखी जा रही है।
बड़े होटल संचालकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की उपलब्धता नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करना पड़ रहा है, जिसे वे ऊंचे दाम पर खरीद रहे हैं। इससे आम लोगों में नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि होटल संचालक ही गैस की कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं।
वहीं छोटे सिलेंडर भरने वाले दुकानदार भी ऊंचे दाम पर गैस लेकर छोटे सिलेंडरों में भरकर बेच रहे हैं, जिससे अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।
जादूगोड़ा में मुख्य रूप से यूसील कॉलोनी स्थित कोऑपरेटिव स्टोर (भारत गैस) और मुर्मू कॉम्प्लेक्स स्थित आराध्या गैस एजेंसी (इंडियन गैस) के माध्यम से गैस की आपूर्ति होती है। इसके अलावा सुंदरनगर से भी भारत गैस की सप्लाई की जाती है। कुछ उपभोक्ताओं द्वारा भी गैस लेकर होटल संचालकों को दिए जाने की बात सामने आई है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस के नाम पर होटल संचालकों ने जरूरत से ज्यादा कीमत बढ़ा दी है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जांच की जाए कि होटल संचालकों को गैस कहां से मिल रही है।
गैस की किल्लत का असर यूसील कैंटीन पर भी पड़ा है, जहां इडली बनाना बंद कर दिया गया है और इसका नोटिस भी जारी किया गया है।
इस मामले में आराध्या गैस के संचालक दिनेश सिंह ने कहा कि यदि किसी होटल में घरेलू गैस सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग किया जाता है, तो उस पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी एजेंसी में गैस की कोई कमी नहीं है और न ही किसी प्रकार की कालाबाजारी हो रही है। सभी उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
ऐसे में प्रशासन के सामने गैस की कालाबाजारी रोकने और कीमतों पर नियंत्रण रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

