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    Home » कोर्ट आदेश के बावजूद निजी भूमि पर सरहुल आयोजन, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    कोर्ट आदेश के बावजूद निजी भूमि पर सरहुल आयोजन, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

    Aman OjhaBy Aman OjhaMarch 22, 2026No Comments3 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता 

    चांडिल: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के शहरबेड़ा गांव (पोस्ट–चैनपुर, थाना–चांडिल) में निजी भूमि पर सरहुल पर्व के आयोजन को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले में झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद कथित रूप से आयोजन किए जाने पर अनुमंडल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

    रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में वादी पक्ष के खतियानधारियों ने आरोप लगाया कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उनकी निजी भूमि पर जबरन सरहुल पर्व का आयोजन किया गया। इसे न्यायालय की अवमानना बताते हुए उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही और लीपापोती का आरोप लगाया।

    वादी पक्ष के सूर्य पद महतो, जय महतो, मैदानव महतो, विजय महतो, अशोक कुमार महतो, शिबराम महतो, खगेन्द्र नाथ महतो, जगदीश चंद्र महतो, झंगरू महतो, पवन कुमार महतो और प्रवीर कुमार महतो ने बताया कि उन्होंने अपनी भूमि की सुरक्षा को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय, रांची में रिट याचिका (सिविल) संख्या 1868/2026 दायर की थी।

    उन्होंने बताया कि विवादित भूमि खाता संख्या–52 के खेसरा संख्या 395, 397 और 403 तथा खाता संख्या–13 के खेसरा संख्या 404 से संबंधित है, जिसे वे अपनी खतियानी निजी जमीन बताते हैं।

    उच्च न्यायालय ने 20 मार्च 2026 को पारित आदेश में निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता अपने भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज अनुमंडल पदाधिकारी, चांडिल के समक्ष प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि प्रथम दृष्टया दस्तावेजों से उनका अधिकार सिद्ध होता है, तो प्रशासन भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

    इसके बावजूद आरोप है कि झारखंड दिशोम बाहा (सरहुल) कमिटी द्वारा उक्त भूमि पर 2024 से लगातार सरहुल पर्व का आयोजन किया जा रहा है, जबकि पूर्व में यह आयोजन ओवरब्रिज के पास अन्य स्थल पर होता था।

    वादी पक्ष का कहना है कि पूर्व में दिए गए आवेदनों और न्यायालय के आदेश के बावजूद उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने 21 मार्च 2026 को थाना चांडिल को आवेदन देकर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

    सूर्य पद महतो ने आरोप लगाया कि अनुमंडल पदाधिकारी विकास राय ने सत्ता पक्ष के दबाव में न्यायालय के आदेश की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 से वे अपने दस्तावेजों के साथ अनुमंडल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरहुल झारखंड की आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है और इसके आयोजन से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना अनुमति निजी भूमि पर आयोजन किया जाना उचित नहीं है।

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