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    Home » दोहरी व्यवस्था टाटा लीज़ समझौता की भावना के अनुरूप नहीं:सरयू राय
    Breaking News Headlines झारखंड

    दोहरी व्यवस्था टाटा लीज़ समझौता की भावना के अनुरूप नहीं:सरयू राय

    Devanand SinghBy Devanand SinghApril 28, 2022No Comments3 Mins Read
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    दोहरी व्यवस्था टाटा लीज़ समझौता की भावना के अनुरूप नहीं:सरयू राय

    जमशेदपुर पूर्वी के विधायक पूर्व मंत्री सरयू राय ने प्रधान सचिव ऊर्जा विभाग को पत्र लिखकर कहा कि टाटा कंपनी टाटा लीज समझौता कर कर रही है उल्लंघन विधायक सरयू राय द्वारा लिखित पत्र को राष्ट्र संवाद हूं बहू दे रहा है जमशेदपुर पूर्वी की जनता ही नहीं बल्कि आसपास की जनता भी बिजली की आंख मिचौली से परेशान है

    प्रधान सचिव,
    ऊर्जा विभाग,
    झारखण्ड सरकार, राँची।

    विषय: टाटा लीज़ समझौता के प्रावधान के अनुरूप जमशेदपुर की सभी बस्तियों में
    टाटा स्टील लि॰ (कंपनी) की समरूप बिजली आपूर्ति के संबंध में।

    महाशय,
    बिजली संकट के वर्तमान दौर में, मैं आपका ध्यान जमशेदपुर में बिजली आपूर्ति के बारे में टाटा लीज़ समझौता के प्रासंगिक प्रावधान की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ, जिसके बारे में मैंने विधानसभा के अष्टम (बजट) सत्र में सवाल भी किया था। अपने सवाल और सरकार द्वारा दिये गये इसके उत्तर की प्रति संलग्न कर रहा हूँ। सरकार द्वारा सदन में मेरे प्रश्न का उत्तर तो आया, परंतु उस दिन सदन में इसपर वाद-विवाद नहीं हो पाया। फलतः मेरे संभावित पूरक प्रश्नों का समाधान नहीं हो पाया।

    आप अवगत होंगे कि टाटा लीज़ समझौता के अनुसार जमशेदपुर के सभी घरों में बिजली का कनेक्शन कंपनी को देना है। परंतु अन्य बस्तियों की कौन कहे, कंपनी ने टाटा लीज़ के अंतर्गत आनेवाली बस्तियों और टाटा लीज़ से 2005 में बाहर की गई बस्तियों में अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं दिया है। उल्लेखनीय है कि टाटा लीज समझौता 1985 में हुआ था और इसका नवीकरण 2005 में हुआ। इसी का नतीजा है कि टाटा लीज़ के अंतर्गत की अधिकांश बस्तियों, जमशेदपुर की अन्य बस्तियों तथा कंपनी क्वार्टर एवं सबलीज इलाक़ों में विद्युत आपूर्ति की दो तरह की व्यवस्था लंबे समय से क़ायम है। कुछ क्षेत्र कंपनी की बिजली से आच्छादित हैं तो एक बड़ा इलाक़ा सरकार की बिजली से। यह दोहरी व्यवस्था टाटा लीज़ समझौता की भावना के अनुरूप नहीं है। यह जमशेदपुर के नागरिकों के हित में भी नहीं है। इसमें बदलाव होना आवश्यक है।

    सरकार ने मेरे सवाल का विधानसभा में जैसा उत्तर दिया है वह निराश करने वाला है। लगता है यह उत्तर देते समय सरकार ने विषयवस्तु की वैधानिकता एवं गम्भीरता का ध्यान नहीं रखा है। विदित हो कि सरकार ने कंपनी को सरायकेला-खरसांवा ज़िला के आदित्यपुर सहित अन्य इलाक़ों में बिजली आपूर्ति हेतु लाईसेंस दिया है। कंपनी वहाँ बिजली की आपूर्ति कर भी रही है। परंतु जमशेदपुर के सभी इलाक़ों में बिजली आपूर्ति का लाईसेंस पूर्व में ही दिये जाने के बावजूद कंपनी
    द्वारा अधिकांश बस्तियों में बिजली की आपूर्ति नहीं की जा रही है। विडंबना है कि सरकार भी इस बारे में सचेष्ट नहीं है। ऐसा लगता है कि इस मामले में सरकार भी कंपनी की ही भाषा बोल रही है।

    मुझे स्मरण है कि क़रीब एक महीना पहले मैंने इस विषय की चर्चा आपसे किया था और बताया था कि विधान सभा में अपने प्रश्न के सरकारी उत्तर से मैं संतुष्ट नहीं हूँ। बिजली के वर्तमान संकट के दौर में मुझे लगता है कि लीज़ समझौता से आच्छादित क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति कंपनी से होने लगेगी तो यहाँ खर्च होने वाली बिजली सरकार अन्य जगहों पर दे सकती है।

    मैं टाटा लीज़ समझौता की पृष्ठभूमि के बारे में विस्तृत उल्लेख करने की बजाय मात्र यही निवेदन करना चाहता हूँ कि कंपनी की बिजली पर जमशेदपुर के नागरिकों का वैधानिक अधिकार है जो टाटा लीज़ समझौता से निःसृत है। यह अधिकार उन्हें जितना जल्द मिल सके, मिलना चाहिये। सरकार को इस बारे में गंभीर पहल करनी होगी। मुझे उम्मीद है कि आप इस दिशा में शीघ्र आवश्यक कारवाई करेंगे।

    सरयू राय

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