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    Home » जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल ऐक्ट लागू, राजनीतिक दलों ने जताई आपत्ति, पाकिस्तान ने जताया विरोध
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    जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल ऐक्ट लागू, राजनीतिक दलों ने जताई आपत्ति, पाकिस्तान ने जताया विरोध

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 20, 2020No Comments3 Mins Read
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    श्रीनगर. केन्द्र सरकार ने कोरोना संकट के बीच मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नया डोमिसाइल ऐक्ट लागू कर दिया है. सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन आदेश 2020 में सेक्शन 3ए जोड़ा गया है. इसके तहत राज्य/यूटी के निवासी होने की परिभाषा तय की गई है. नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसी राज्य की विपक्षी पार्टियां तो इस एक्ट का विरोध कर ही रही हैं, अब पाकिस्तान से भी इस एक्ट के खिलाफ विरोध के सुर उभरने लगे हैं.

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जारी एक बयान में कहा, भारत ने कश्मीर में जो नया डोमिसाइल ऐक्ट लागू किया है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है और यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के दोनों देशों के बीच हुए ऐग्रीमेंट का खुला उल्लंघन है. बता दें कि नए डोमिसाइल नियमों के मुताबिक, कोई व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर में कम से कम 15 साल रहा है और 10वीं या 12वीं का एग्जाम यहां के किसी संस्थान से पास कर चुका है, तो वह जम्मू-कश्मीर का निवासी कहलाने का हकदार होगा.

    भारत के इस आंतरिक फैसले से पाकिस्तान क्यों बुरी तरह बौखलाया हुआ है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का यह नया डोमिसाइल ऐक्ट जम्मू-कश्मीर की आबादी को बदलने के लिए है. बता दें कि पिछले साल अगस्त महीने में जब से भारत ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया है, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की नाकाम कोशिश करता आ रहा है.

    हालांकि उसे अभी तक निराशा ही हाथ लगी है. गिने-चुने देशों को छोड़कर किसी भी बड़े देश ने पाकिस्तान का इस मुद्दे पर साथ नहीं दिया. जिस भी शख्स ने जम्मू-कश्मीर में 15 साल बिताए हैं या जिसने यहां सात साल पढ़ाई की और 10वीं-12वीं की परीक्षा यहीं के किसी स्थानीय संस्थान से दी है, वह यहां का निवासी होगा.

    उमर अब्दुल्ला की पार्टी ने भी किया विरोध

    नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने कहा कि नए डोमिसाइल नियमों को जिस जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन ऐक्ट 2019 के तहत लागू किया गया है, उसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं में चुनौती दी गई है. पार्टी ने कहा कि इस विभाजनकारी नियम को स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसका मकसद ही घाटी में आबादी के संतुलन को बिगाडऩा है.

    बीजेपी ने कहा, कश्मीरी पंडितों को मिलेगा फायदा

    उधर बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल के नए नियमों को अधिसूचित किए जाने का स्वागत किया. बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा कि ये नए नियम सभी शरणार्थियों के साथ राज्य से बाहर रह रहे कश्मीरी पंडितों को भी उनके अधिकार दिलाएगा. जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से सोमवार को जारी नए नियमों के तहत पश्चिम पाकिस्तान के लोगों, बाल्मीकियों, समुदाय के बाहर शादी करने वाली महिलाओं, गैर-पंजीकृत कश्मीरी प्रवासियों और विस्थापित लोगों को जल्द ही आवास अधिकार मिल जाएंगे.

    क्या है नया डोमिसाइल ऐक्ट?

    जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नए डोमिसाइल सर्टिफिकेट (प्रोसीजर) रूल्स 2020 को लागू कर दिया है. इसी के साथ प्रदेश में स्थानीय नागरिक प्रमाण पत्र (पीआरसी) की जगह डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है. पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी, सफाई कर्मचारी और दूसरे राज्यों में शादी करने वाली महिलाओं के बच्चे भी अब डोमिसाइल के हकदार होंगे. इन सभी के लिए 15 वर्ष तक प्रदेश में रहने समेत अन्य श्रेणी की अनिवार्यता के नियम लागू होंगे.

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