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    Home » दिनकर जयंती समारोह: स्वामी चिदात्मन ने की अमृत सरोवर में दिनकर की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग
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    दिनकर जयंती समारोह: स्वामी चिदात्मन ने की अमृत सरोवर में दिनकर की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 14, 2026No Comments3 Mins Read
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    दिनकर जयंती समारोह
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    दिनकर जयंती समारोह के अवसर पर सिमरिया में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की आदमकद प्रतिमा को अमृत सरोवर के बीच स्थापित करने की पुरजोर मांग उठी।

    सिमरिया की पावन भूमि पर आयोजित दिनकर जयंती समारोह ने एक बार फिर राष्ट्रकवि की कालजयी रचनाओं और उनके व्यक्तित्व को स्मरण करने का अवसर प्रदान किया। इस दो दिवसीय समारोह के पहले दिन साहित्य, अध्यात्म और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों ने दिनकर के कृतित्व पर गहन विमर्श किया।

    दिनकर जयंती समारोह के प्रमुख वक्तव्य

    जयंती समारोह का प्रथम दिवस सिमरिया में मनाई गई।

    बीहट। राष्ट्रकवि दिनकर की आदमकद प्रतिमा अमृत सरोवर के बीच सिमरिया में स्थापित होनी चाहिए। इस स्वरूप के लिए उचित स्थान सिमरिया का गोलंबर है। मिथिला की सीमा पर बसा सिमरिया धर्म, अध्यात्म और साहित्य की भूमि है।

    ये बातें रविवार को सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ सिमरिया धाम में दिनकर जयंती समारोह के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए स्वामी चिदात्मन महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि दिनकर विश्वकवि हैं। उनके ज्ञान से सिमरिया आने वाले देशभर के संत श्रद्धालू ज्ञान के प्रकाश से आलोकित होंगे।

    दिनकर स्मृति विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित 118वीं दिनकर जयंती के पहले दिन बीएचयू के प्रो रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि दिनकर मूर्ति नहीं विचार हैं। मूर्ति वही जिंदा रहती है जिसमें विचार व स्वप्न जिंदा रहता है। सिमरिया घाट बाया व गंगा का संगम है। यहां साहित्यिक नवजागरण का एक केंद्र बनता जा रहा है। दक्षिण भारत में महान कवि तिरूवल्लुवर का जो सम्मान है वही सम्मान दिनकर का सिमरिया में है।

    साहित्यकार उमेश कुंवर कवि ने कहा कि अगर श्रीकृष्ण सिंह और रामचरित्र सिंह होते तो वे दोनों एक सुर में दिनकर की मूर्ति लगाने की वकालत करते। मूर्ति को लेकर उठे विवाद को खत्म करना ही बेगूसराय के सेहत के लिए अच्छा है। दिनकर सर्वोपरि हैं और उनकी मूर्ति ही सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर पर लगनी चाहिए।

    शिक्षाविद् संतोष ईश्वर ने कहा कि दिनकर ने संघर्ष करते हुए जीवन में नई उंचाईयों को प्राप्त किया। साहित्यकार आनंद शंकर ने कहा कि दिनकर साहित्य साधना से किसानों व मजदूरों को जगाने का काम किया।

    दिनकर पुस्तकालय के सचिव संजीव फिरोज ने कहा कि कुछ लोग सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर को मल्हीपुर गोलंबर कह कर दिगभ्रमित करने का काम कर रहे हैं। दिनकर की प्रतिमा ही सिमरिया गोलंबर पर लगेगी।

    कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी, स्वागत भाषण रामनाथ सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्वंभर सिंह ने किया।

    कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वरिष्ठ कवि प्रफुल्ल मिश्र, रमा मौसम, विद्यासागर ब्रह्मचारी, राजीव रंजन, विनोद बिहारी, एके मनीष आदि ने कविता पाठ किया।

    वहीं मौके पर कृष्ण कुमार शर्मा, प्रदीप कुमार, अमरदीप सुमन, जितेन्द्र झा, राजेन्द्र राय, दीनबंधु कुमार, कृष्ण मुरारी, रोचकानंद वत्स, गुलशन कुमार, संजीव कुमार राय, अमन गौतम, सूरज कुमार, अजीत कुमार, अमित कुमार समेत सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

    समारोह के सफल आयोजन ने सिमरिया को साहित्यिक नवजागरण के केंद्र के रूप में पहचान दिलाई है। आयोजकों ने घोषणा की कि आने वाले वर्षों में दिनकर जयंती को और अधिक भव्यता के साथ मनाया जाएगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों को आमंत्रित किया जाएगा। दिनकर की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए अमृत सरोवर में प्रतिमा स्थापना के अलावा एक भव्य स्मारक संग्रहालय की स्थापना की भी योजना है। इस प्रकार दिनकर जयंती समारोह ने सिमरिया को साहित्यिक तीर्थ के रूप में पुनर्स्थापित करने का संकल्प दोहराया। दिनकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिमा स्थापना के साथ-साथ शोध केंद्र विकसित करने की योजना भी प्रस्तावित की गई।

    अमृत सरोवर दिनकर जयंती बेगूसराय सिमरिया स्वामी चिदात्मन
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