साइकिल पे संडे अभियान ने एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है। यह पहल न केवल हरित आवरण बढ़ाने बल्कि समुदाय को साइकिलिंग के माध्यम से फिटनेस के लिए प्रेरित करने का दोहरा कार्य कर रही है।
साइकिल पे संडे का 622वां आयोजन और पौधारोपण
पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे साइकिल पे संडे अभियान के तहत पिपरादेवस क्षेत्र में 100 से अधिक पौधों का वितरण किया गया। अभियान के सदस्य फोटोग्राफर अमित कुमार लवली के पिता स्व उमेश ठाकुर की स्मृति में पौधों का वितरण किया गया। अभियान के 622 वें रविवार को एक विशेष साइकिल यात्रा और पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
साइकिल यात्रा का ऐतिहासिक मार्ग
सिद्धपीठ बड़की दुर्गा मंदिर प्रांगण से साइकिल यात्रा की शुरुआत की गई जो बीहट मसनदपुर, हाजीपुर पोखर ठुकरीचक, हाजीपुर होते हुए पिपरा स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा परिसर में सम्पन्न हुआ। इस यात्रा में दर्जनों साइकिल सवारों ने भाग लेकर पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।

कार्यक्रम के प्रमुख सहयोगी और अतिथि
पिपरा निवासी सोनू कुमार की अगुवाई में अभियान के विनोद भारती, डॉ कुन्दन कुमार, रामगोविन्द कुमार, सुजीत कुमार, अंशु कुमार, कुणाल कुमार, शुभम कुमार, राजकुमार, सोनू झा, अजीत, नीतीश, सौरभ, अंकित, लक्ष्य, केशव के विशेष सहयोग से कार्यक्रम किया गया। इस मौके पर पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने और लोगों को शुद्ध हवा के प्रति जागरूक करने के लिए पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ का संकल्प लिया गया।
मौके पर आदित्य कुमार उर्फ बाबू साहब, वार्ड सदस्य प्रवीण कमार, पूर्व उपमुखिया प्रवीण कुमार, राजद नेता हरिनंदन कुमार, शिक्षक नेता रवि कुमार उर्फ गुम बम, शिक्षक विजय कुमार, मुकेश कुमार, राहुल कुमार, शिवजी पंडित, विजय कुमार, शिक्षक सोनू कुमार, राहुल कुमार एवं मुन्ना कुमार सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
समुदाय पर प्रभाव और भविष्य की दिशा
इस प्रकार के जमीनी स्तर के अभियान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, शहरी हरित आवरण बढ़ाना कार्बन पृथक्करण के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। यूएनईपी भी सामुदायिक नेतृत्व वाली पहल को प्रोत्साहित करता है। साइकिल पे संडे की निरंतरता यह साबित करती है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। भविष्य में इस अभियान के और विस्तार की उम्मीद है।

