आदिवासी-मूलवासी को लूट रहा यूसिल प्रबंधन: प्रदीप भगत
भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई और सीएमडी को हटाने की उठी मांग
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। सिंहभूम यूरेनियम मजदूर संघ के पूर्व महासचिव प्रदीप भगत ने यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन आदिवासी और मूलवासी समुदायों का शोषण कर रहा है। उन्होंने सीएमडी के पीए पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उन्हें हटाने की मांग भी की।

1974 से 2015 तक यूसीआईएल में सेवा दे चुके प्रदीप भगत, मजदूर हितों के लिए हमेशा मुखर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूरेनियम जैसे कीमती धातु का दोहन तो हो रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों को न तो मेडिकल सुविधा, न शुद्ध पानी, न शिक्षा, और न ही विकास योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि पहले लाभांश का 2% स्थानीय विकास कार्यों पर खर्च होता था, जो अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मजदूरों को जूते, यूनिफॉर्म, कैंटीन, दवाइयां तक नहीं मिल रही हैं, जबकि अधिकारी इन सभी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। पूर्व कर्मचारियों की उपेक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद मजदूर गंभीर बीमारियों से जूझते हैं और अपनी पूरी जमा पूंजी इलाज में गंवा बैठते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की गई थी और कुछ अधिकारियों को जेल तक भेजा गया था। आज भी लेखा, संपदा, क्रय और स्टोर विभागों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन प्रबंधन उन्हें प्रमोशन दे रहा है, कार्रवाई नहीं कर रहा।

ठेका मजदूरों की स्थिति पर भी उन्होंने चिंता जताई — “उनसे समय से अधिक काम लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलतीं।” सीएमडी के रवैये को भी उन्होंने कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वे मजदूर नेताओं से संवाद नहीं करते, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। गौरतलब है कि प्रदीप भगत, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के करीबी माने जाते हैं। जब चंपई सोरेन सुमू यूनियन के अध्यक्ष थे, तब प्रदीप भगत महासचिव थे।

