रिपोर्ट – अमन ओझा (ब्यूरो चीफ, कोल्हान)
आदित्यपुर : नगर निगम के वार्ड 17 की पार्षद नीतू शर्मा ने हाल के दिनों में अपने वार्ड से जुड़ी खबरों को लेकर मीडिया के समक्ष खुलकर अपना पक्ष रखा और निष्पक्ष, संतुलित एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की जोरदार अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी समस्या को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत करना न केवल पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि इससे आम जनता के बीच भ्रम और गलत धारणा भी बनती है। पार्षद ने कहा कि वार्ड में गंदगी या अन्य बुनियादी समस्याओं के लिए केवल जनप्रतिनिधि को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है, बल्कि इसके लिए नगर निगम के संबंधित पदाधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सफाई कर्मियों की पर्याप्त तैनाती और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही है, जबकि यह नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नीतू शर्मा ने यह भी कहा कि वार्ड में वर्षों से चली आ रही समस्याओं को नजरअंदाज कर केवल वर्तमान स्थिति को मुद्दा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण और भ्रामक है। प्रभात पार्क से जुड़ी खबरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बिना ठोस तथ्यों और प्रमाणों के उनकी भूमिका पर सवाल उठाने को सिरे से खारिज किया और इसे गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग बताया। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले उनका पक्ष अवश्य लिया जाए, क्योंकि वे 24 घंटे जनता और मीडिया के लिए उपलब्ध रहती हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि उनकी कोई कमी या गलती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाए, लेकिन तथ्यों की पुष्टि के बाद ही खबर बनाई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि निजी दुर्भावना या पूर्वाग्रह के तहत खबरें बनाना पत्रकारिता की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाता है। अपने कार्यशैली का जिक्र करते हुए पार्षद ने बताया कि वे जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर पैदल वार्ड का भ्रमण करती हैं और लोगों की समस्याओं को सीधे सुनकर उनका समाधान कराने का प्रयास करती हैं। वहीं, वार्डवासियों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों द्वारा शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता था, यहां तक कि फोन तक नहीं उठाया जाता था और काम को केवल औपचारिकता निभाकर निपटा दिया जाता था। इसके अलावा कचरा उठाने की व्यवस्था को लेकर भी लोगों में असंतोष है। वार्डवासियों का कहना है कि कचरा गाड़ी आने पर हर घर से प्रति माह ₹80 की वसूली की जाती है, जो उन्हें अनुचित लगती है। उनका तर्क है कि जब वे नियमित रूप से होल्डिंग टैक्स का भुगतान करते हैं, तो फिर अलग से कचरा शुल्क लेना किस आधार पर उचित है। स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की कि नगर निगम अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से करे और वार्ड के नागरिकों को साफ-सफाई सहित सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए। उन्होंने साफ-सुथरे और व्यवस्थित वातावरण की अपेक्षा जताते हुए कहा कि नगर निगम को जनता के हित में पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। पूरे मामले में पार्षद और वार्डवासियों के सवालों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

