लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा स्थित कांस्टेबल ट्रेनिंग सेंटर में नशे की कथित घुसपैठ का मामला सामने आया है। बुधवार को मुख्य गेट पर जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने सांसपुर निवासी एवं ठेका मजदूर नगेन भकत को कथित रूप से गांजा के साथ पकड़कर जादूगोड़ा थाना पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कांस्टेबल ट्रेनिंग सेंटर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, दो दिन पूर्व भी एक अन्य मजदूर के पास से गांजा मिलने की चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच, कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ट्रेनिंग सेंटर के भीतर शराब और गांजा की सप्लाई हो रही है तथा इसमें कुछ लोगों की मिलीभगत हो सकती है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अनुशासन और भविष्य के पुलिसकर्मियों की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जादूगोड़ा थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि बरामद मादक पदार्थ कहां से आया तथा इसमें अन्य किसी की संलिप्तता है या नहीं। वहीं, ट्रेनिंग सेंटर के अधिकारियों की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, ट्रेनिंग सेंटर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत होगी सख्त कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी नगेन भकत के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इस एक्ट के तहत मादक पदार्थों की तस्करी और सेवन दोनों ही गंभीर अपराध माने जाते हैं। एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के अनुसार दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि बरामद गांजा कहां से लाया गया था और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं।
प्रशिक्षण केंद्रों में नशे की घुसपैठ गंभीर चिंता का विषय
कांस्टेबल ट्रेनिंग सेंटर जैसे संवेदनशील संस्थानों में मादक पदार्थों की बरामदगी सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। भविष्य के पुलिसकर्मियों को अनुशासन और कानून का पालन सिखाने वाली संस्था में ही यदि नशे का कारोबार फल-फूल रहा हो, तो यह पूरे पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे केंद्रों में प्रवेश द्वार पर सघन जांच, सीसीटीवी निगरानी और नियमित औचक निरीक्षण अनिवार्य होने चाहिए। साथ ही ठेका मजदूरों और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर सख्त प्रोटोकॉल लागू करना आवश्यक है।
ग्रामीणों की मांग और आगे की राह
स्थानीय ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। यदि सप्लाई नेटवर्क में कोई अधिकारी या ठेकेदार शामिल है, तो उसका पर्दाफाश होना जरूरी है। जिला प्रशासन और पुलिस मुख्यालय से अपेक्षा है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस घटना ने झारखंड पुलिस के प्रशिक्षण तंत्र की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

