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    कैलेंडर को प्रतीक मानना पंथिक मर्यादा नहीं : कुलबिंदर

    Sumi BangabashBy Sumi BangabashJune 19, 2026No Comments1 Min Read
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    कैलेंडर को प्रतीक मानना पंथिक मर्यादा नहीं : कुलबिंदर

     राष्ट्र संवाद संवादाता 

    जमशेदपुर। कौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने कहा है कि कैलेंडर को निराकार ईश्वर का प्रतीक मानना पंथिक मर्यादा नहीं है।
    गुरु नानक देव जी ने निराकार, निर्गुण, सर्वशक्तिमान एक ईश्वर “एक ओंकार” का संदेश दिया.

    परमपिता ईश्वर अजन्मा है और सर्वव्यापक है। उसे किसी पत्थर, मूर्ति या कैलेंडर जैसे प्रतीक तक सीमित नहीं किया जा सकता है।
    वही अधिवक्ता ने तख्त श्री हजूर साहब नांदेड़ में सन 1708 में अबचल नगर गमन से पहले दशम पिता गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिखों को आदेश दिया था, पूजा अकाल की, दर्शन शब्द गुरु का।

    ऐसे में जब सिखों को देहधारी गुरु को नहीं मानना है। केवल और केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के आदेश और सिद्धांत का पालन करना है। ऐसे में भगवान का प्रतीक कैलेंडर या मूर्ति सिख सिद्धांत के अनुसार कैसे सही और मान्य हो सकता है?

    कुलविंदर सिंह के अनुसार पंथ के महान और जिम्मेदार लोगों को सिख जीवन मूल्य और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सिद्धांत के आलोक में ही कोई फैसला लेना चाहिए।

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    10 साल बाद भी नहीं मिला पानी, रामनगर लकड़िया बागानबस्ती के लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी जमशेदपुर के बागबेड़ा से सटे रामनगर बस्ती के सैकड़ों परिवारों ने बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत अब तक शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2016 में पंचायत के तत्कालीन मुखिया द्वारा प्रत्येक घर से 450 रुपये लेकर पानी कनेक्शन के लिए रसीद दी गई थी, लेकिन 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो इलाके में पाइपलाइन बिछाई गई और न ही किसी घर तक जलापूर्ति की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी और निजी बोरिंग से पानी निकलना बंद हो गया है, जिसके कारण लोगों को 30 से 40 रुपये प्रति बोतल पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। इससे क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रामनगर बस्ती के निचले हिस्से में जल्द पाइपलाइन बिछाकर घर-घर पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो क्षेत्र के लोग उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और सरकार की होगी।

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