Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » दुमका को सिल्क सिटी के रूप में पहचान देना सरकार का लक्ष्य
    Breaking News झारखंड

    दुमका को सिल्क सिटी के रूप में पहचान देना सरकार का लक्ष्य

    Nizam KhanBy Nizam KhanFebruary 4, 2021No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    *★सरकार के प्रयास से राज्य को रेशम के क्षेत्र में मिल रही खोई पहचान*

    *★हुनर को मिला अवसर, रेशम के धागों को पिरो कर संताल की महिलाएं बन रहीं हैं आत्मनिर्भर*

    *★दुमका को सिल्क सिटी के रूप में पहचान देना सरकार का लक्ष्य*

    =======================
    *रांची*
    दुमका की रूबी कुमारी। रेशम के धागों को आकार देने में माहिर और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत। रूबी दिव्यांग होने के बावजूद कभी निराश नहीं हुई, बल्कि अपने आत्मबल को और सशक्त किया। हर दिन जीवन की जद्दोजहद से पंजा लड़ा खुद को एक अलग पहचान दी। राज्य सरकार ने भी 27 वर्षीय रूबी के हौसले को सराहते हुए उसका चयन मयूराक्षी सिल्क उत्पादन सह प्रशिक्षण केंद्र, दुमका में धागाकरण और बुनाई के लिए किया। देखते ही देखते रूबी ने सोहराय, कोहबर, जादुपटिया जैसी हस्तकला को रेशम के वस्त्रों में सधे हाथों से उकेरना शुरू कर दिया। ठीक ऐसे ही दुमका की अनुसूचित जनजाति की अधिकतर महिलाएं इस कला को अब रेशम के घागों में उकेर कर अपने हुनर को पहचान दे रहीं हैं। देश भर का 80 प्रतिशत रेशम उत्पादक झारखण्ड और 50 प्रतिशत रेशम उत्पादन करने वाले संताल परगना की महिलाओं के दिन बहुर रहे हैं। उनकी आत्मनिर्भरता परिलक्षित हो रही है। संताल परगना के दुमका ने सिल्क सिटी के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। ऐसा हो रहा है मयूराक्षी सिल्क के जरिये। वह दिन दूर नहीं जब दुमका को सिल्क सिटी के रूप में पहचान देने में यहां की बुनकर महिलाएं सिरमौर/वाहक बनेंगी।

    *सरकार की दूरगामी सोच का प्रतिफल*

    संताल परगना में तसर कोकुन का उत्पादन ज्यादा होने के बावजूद बिहार के भागलपुर जिला को सिल्क सिटी के नाम से जाना जाता है, जबकि दुमका से ही कच्चा माल लेकर यह ख्याति भागलपुर को मिली है। इसका मुख्य कारण यह रहा कि यहां के लोग केवल तसर कोकुन उत्पादन से जुड़े थे। जबकि, कोकुन उत्पादन के अलावा भी इस क्षेत्र में धागाकरण, वस्त्र बुनाई और डाईंग प्रिंटिंग कर और अधिक रोजगार एवं आय की प्राप्ति की जा सकती थी। इसको देखते हुए राज्य सरकार ने रणनीति तैयार की, ताकि रेशम के क्षेत्र में दुमका को अलग पहचान मिले तथा यहां की गरीब महिलाओं को नियमित आय से जोड़कर स्वावलंबी बनाया जा सके। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण के लिए चुना गया। शुरू में लगभग 400 महिलाओं को मयूराक्षी सिल्क उत्पादन के विभिन्न कार्यों का अलग-अलग प्रशिक्षण दिया गया। आज लगभग 500 महिलाओं को विभिन्न माध्यमों से धागाकरण, बुनाई, हस्तकला इत्यादि का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है,जबकि पूरे झारखण्ड में एक लाख 65 हजार परिवार रेशम उत्पादन से जुड़े हैं।

    *युवाओं को मिल रहा है प्रशिक्षण*

    वितीय वर्ष 2019-20 से राज्य से 60 युवाओं का चयन कर रेशम पालन, रेशम बुनाई एवं रेशम-छपाई में एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में 60 युवाओं का चयन कर प्रशिक्षित किया जा रहा है।
    *हर संभव सहायता करेगी सरकार*
    दुमका प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मयूराक्षी सिल्क उत्पाद का अवलोकन किया था। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि सिल्क के उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए हर संभव संसाधन सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाए, जिससे यहां के लोगों को अधिक रोजगार मिले।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleराज्य सरकार ने पहली सीएसआर नीति को मंजूरी दी
    Next Article कार्य में लापरवाही व अनुशासनहीनता बरतने वाले शिक्षकों व कर्मियों पर करें विभागीय कार्रवाईःउपायुक्त

    Related Posts

    नवी मुंबई में रिश्ता तोड़ा तो पिस्टल निकाली…

    November 7, 2026

    त्योहारों की रौनक के साथ सुरक्षा, स्वच्छता और सद्भाव की भी हो गारंटी

    November 7, 2026

    दीपावली बने विकसित एवं समृद्ध भारत की नई ज्योति

    November 7, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    McLuck Casino Review: Features, Games, and the Player Experience

    नवी मुंबई में रिश्ता तोड़ा तो पिस्टल निकाली…

    त्योहारों की रौनक के साथ सुरक्षा, स्वच्छता और सद्भाव की भी हो गारंटी

    चेहरे पर आग के निशान, लेकिन हौसला फौलादी! दीपिका के स्टंट करने वाली इस लड़की को पहचानना हुआ मुश्किल

    दीपावली बने विकसित एवं समृद्ध भारत की नई ज्योति

    बाइक चोरी के शक में विक्षिप्त की पिटाई, पुलिस ने ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया

    धनतेरस पर बहरागोड़ा के बाजारों में उमड़ी भीड़, वाहनों की खरीदारी में भी उत्साह

    विजय-2 लौह अयस्क खदान फिर खोलने की मांग, ग्रामीणों को रोजगार देने पर जोर

    पांच दिन से अंधेरे में डूबे धानघोरी गांव में 24 घंटे में लगा नया ट्रांसफॉर्मर

    महिला सुरक्षाकर्मी से सहकर्मी गार्ड ने किया दुर्व्यवहार, थाने में प्राथमिकी दर्ज

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.