टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन की दस्तक
*चंद्रशेखरन ने तीसरे कार्यकाल से खुद को किया अलग, फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी; टाटा ट्रस्ट्स के साथ महीनों से चल रहे नेतृत्व-संबंधी मतभेदों के बीच बड़ा फैसला*
मृत्युंजय बर्मन
टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव तय हो गया है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फैसला किया है कि वे अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद चेयरमैन पद पर पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। हालांकि इसे तत्काल पद छोड़ना नहीं कहा जा सकता। वे अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा करेंगे, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। यह जानकारी सबसे पहले रॉयटर्स ने आज प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से दी। बाद में चंद्रशेखरन के बयान में भी उनके निर्णय की पुष्टि हुई।
चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को बताया है कि उन्होंने कार्यकाल समाप्त होने पर पुनर्नियुक्ति के लिए स्वयं को प्रस्तुत नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने बोर्ड से उत्तराधिकारी की प्रक्रिया जल्द तय करने को कहा है, ताकि नेतृत्व परिवर्तन सुचारु ढंग से हो सके।
*फरवरी से ही अटकी थी तीसरे कार्यकाल की राह*
चंद्रशेखरन का तीसरा कार्यकाल लंबे समय से चर्चा में था, लेकिन इस साल फरवरी में उनकी पुनर्नियुक्ति को लेकर स्थिति अचानक अनिश्चित हो गई। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार टाटा संस बोर्ड ने फरवरी में उनके तीसरे कार्यकाल पर तत्काल फैसला नहीं किया था। इसके बाद समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई। ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ ने भी अगस्त में रिपोर्ट किया था कि 18 अगस्त को प्रस्तावित टाटा संस, एजीएम से पहले चंद्रशेखरन के पद छोड़ने को लेकर विचार-विमर्श चल रहा था।
रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा घटनाक्रम ने टाटा समूह में आने वाले नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सामने ला दिया है। हालांकि रायटर्स ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में इस्तीफे का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया।
*कहानी में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका क्यों अहम?*
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए टाटा ट्रस्ट्स की स्थिति महत्वपूर्ण है। ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति टाटा ट्रस्ट्स ने स्वयं आधिकारिक रूप से घोषित की थी।
इसलिए टाटा संस के चेयरमैन का उत्तराधिकार केवल सामान्य कॉरपोरेट नियुक्ति का मामला नहीं है। यह उस संस्था के भविष्य की दिशा से भी जुड़ा है, जिसकी सबसे बड़ी शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स है।
*मतभेदों की खबरों के बीच आया फैसला*
मीडिया रिपोर्टों में पिछले कई महीनों से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल, समूह के कुछ कारोबारों के प्रदर्शन, नए उपक्रमों में निवेश और टाटा संस की भविष्य की संरचना को लेकर अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ ने मई में रिपोर्ट किया था कि चंद्रशेखरन को टाटा संस बोर्ड के समक्ष एयर इंडिया और नए कारोबारों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण देना था।
हालांकि इन रिपोर्टों को सीधे तौर पर व्यक्तिगत टकराव या किसी एक व्यक्ति की असहमति के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं से इतना जरूर स्पष्ट है कि चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर महीनों से अनिश्चितता बनी हुई थी और अब उन्होंने स्वयं पुनर्नियुक्ति की दौड़ से हटने का फैसला किया है।
*चंद्रशेखरन का दौर और आगे की चुनौती*
2017 में टाटा संस की कमान संभालने वाले चंद्रशेखरन के कार्यकाल में समूह ने तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एयरलाइन और अन्य नए क्षेत्रों में विस्तार की महत्वाकांक्षी रणनीति अपनाई। फरवरी 2026 में खुद चंद्रशेखरन ने एआई को भविष्य का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बताते हुए टाटा समूह की तकनीकी रणनीति पर विस्तार से बात की थी।
अब सवाल यह है कि उनके बाद समूह की यही विस्तारवादी रणनीति जारी रहेगी या पूंजी आवंटन और कारोबारों की प्राथमिकताओं में बदलाव होगा।
टाटा ट्रस्ट्स ने हाल ही में टाटा संस की संभावित लिस्टिंग पर प्रकाशित एक लेख में दीर्घकालिक निवेश, एयर इंडिया और नए कारोबारों में वित्तीय प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए टाटा संस के मौजूदा स्वरूप को बनाए रखने के पक्ष में तर्क दिया था।
*फरवरी 2027 तक चलेगा संक्रमण*
चंद्रशेखरन के निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि टाटा समूह में तत्काल नेतृत्व रिक्तता नहीं होगी। वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे। इस अवधि में टाटा संस बोर्ड को नया चेयरमैन चुनना होगा और समूह के भीतर सत्ता एवं जिम्मेदारियों का नया संतुलन तैयार करना होगा। रायटर्स के अनुसार फिलहाल उनके उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा नहीं हुई है।
इस लिहाज से चंद्रशेखरन का फैसला केवल एक चेयरमैन के पद छोड़ने की खबर नहीं है। यह रतन टाटा के बाद टाटा समूह के नेतृत्व के अगले चरण की शुरुआत है।

