सूखा खेतों में है, सवाल व्यवस्था की जड़ों में [जब धरती प्यासी हो, तब फाइलें नहीं — पानी चाहिए] [1972…
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अंत्योदय : विकसित भारत की मानवीय आधारशिला -ः ललित गर्ग:- भारत की विकास यात्रा आज ऐसे दौर में है, जब…
दिल्ली : दिलवालों की नगरी से फरेब के शहर तक आनंद सिंह 16 अगस्त को मैं सपरिवार दिल्ली पहुँचा। यात्रा…
प्रेम, विश्वास और संघर्ष का संकट: दोषी कौन? ———————————————- आज के समय में युवा पीढ़ी के बीच प्रेम, स्नेह, विश्वास…
दिनकर को याद करना आसान, दिनकर को आत्मसात करना कठिन देवानंद सिंह रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का नाम लेते ही हिंदी…
*आज का भारत और कविवर दिनकर जी की कमी* ——————————— आज का भारत बहुत तेज दौड़ रहा है – हमारे…
आईआईटी बॉम्बे के छात्र आत्महत्या से जुड़े सवाल -ः ललित गर्ग:- आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के बीटेक छात्र साहिल…
हाथों की भाषा: भारतीय सांकेतिक भाषा के माध्यम से एक अधिक समावेशी दुनिया का निर्माण राष्ट्र संवाद डेस्क भाषा केवल…
सिर्फ बड़ा कारोबार नहीं, मजबूत संस्थान और मजबूत समाज भी जरूरी देवानंद सिंह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय उद्योग…
पिघलते ग्लेशियर और खोखले होते पहाड़ः चेतावनी सुने -ः ललित गर्ग:- हिमालय केवल बर्फ से ढकी पर्वत-शृंखला नहीं, बल्कि…
