Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » प्रशांत किशोर की ‘रणनीति राजनीति’ पर बड़ा सवाल: क्या सदमे में हैं PK या नई पारी की तैयारी?
    Breaking News Headlines खबरें राज्य से पटना बिहार बेगूसराय मुंगेर मुजफ्फरपुर राजनीति समस्तीपुर

    प्रशांत किशोर की ‘रणनीति राजनीति’ पर बड़ा सवाल: क्या सदमे में हैं PK या नई पारी की तैयारी?

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarNovember 15, 2025No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    प्रशांत किशोर की ‘रणनीति राजनीति’ पर बड़ा सवाल: क्या सदमे में हैं PK या नई पारी की तैयारी?

    राष्ट्र संवाद संवाददाता।

    हालिया चुनाव परिणामों ने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) की भूमिका और प्रभाव पर नए सिरे से चर्चा छेड़ दी है। कभी खुद को ‘चुनाव जिताने वाली मशीन’ कहलवाने वाले PK के सामने अब बड़ा सवाल यह है कि वे सदमे में हैं या फिर नई रणनीति के साथ वापसी की तैयारी कर रहे हैं।

     

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि PK के दावे और हकीकत के बीच की दूरी अब पहले से कहीं ज्यादा उजागर हो गई है। बेहद आक्रामक बयानबाज़ी के साथ अपनी ‘बड़ी भूमिका’ का ढोल पीटने वाले PK के लिए आज का माहौल असहज है। विश्लेषकों के अनुसार, “2014 की जीत का पूरा श्रेय अपने सिर पर टांगकर चलने वाले अब समझ गए हैं कि जनता वोट रणनीति देखकर नहीं, नेतृत्व देखकर देती है।”

     

    जनता के मूड, मेहनत और माहौल का चुनावी नतीजों पर असर तो होता है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ राजनीति में ऐसे घूमते दिखाई देते थे जैसे पूरा देश उनके इशारे पर चलता हो। मगर चुनावी नतीजों ने फिर साबित कर दिया कि किरदार बदल सकते हैं, कहानी नहीं—और कहानी हमेशा जनता की इच्छा और नेतृत्व के भरोसे से लिखी जाती है।

     

    आज स्थिति यह है कि जो खुद को चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा ‘गेमचेंजर’ बताते थे, वही अब अपने दावों के बोझ तले दबे दिखाई दे रहे हैं। जनता ने साफ संदेश दिया है कि चमक चाहे जितनी हो, वास्तविक शक्ति नेतृत्व की होती है—पोस्टरबाज़ों, ब्रांड विशेषज्ञों और रणनीति बेचने वालों की नहीं।

     

    अब नजरें इस बात पर हैं कि प्रशांत किशोर इस चुनौती को एक झटका मानकर शांत हो जाएंगे या इसे नए उभार की शुरुआत में बदल देंगे।

    प्रशांत किशोर की ‘रणनीति राजनीति’ पर बड़ा सवाल: क्या सदमे में हैं PK या नई पारी की तैयारी?
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleबिहार के चुनावी इतिहास में इस बार का असाधारण जनादेश कई मायनों में महत्वपूर्ण – देवानंद सिंह 
    Next Article आयुष्मान में गड़बड़ी: जांच के दायरे में 20 से ज्यादा निजी अस्पताल

    Related Posts

    मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन

    June 19, 2026

    कैलेंडर को प्रतीक मानना पंथिक मर्यादा नहीं : कुलबिंदर

    June 19, 2026

    मानगो जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु विभिन्न योजनाओं को मिली स्वीकृति : मेयर सुधा गुप्ता

    June 19, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन

    कैलेंडर को प्रतीक मानना पंथिक मर्यादा नहीं : कुलबिंदर

    मानगो जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु विभिन्न योजनाओं को मिली स्वीकृति : मेयर सुधा गुप्ता

    10 साल बाद भी नहीं मिला पानी, रामनगर लकड़िया बागानबस्ती के लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी

    10 साल बाद भी नहीं मिला पानी, रामनगर लकड़िया बागानबस्ती के लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी जमशेदपुर के बागबेड़ा से सटे रामनगर बस्ती के सैकड़ों परिवारों ने बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत अब तक शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2016 में पंचायत के तत्कालीन मुखिया द्वारा प्रत्येक घर से 450 रुपये लेकर पानी कनेक्शन के लिए रसीद दी गई थी, लेकिन 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो इलाके में पाइपलाइन बिछाई गई और न ही किसी घर तक जलापूर्ति की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी और निजी बोरिंग से पानी निकलना बंद हो गया है, जिसके कारण लोगों को 30 से 40 रुपये प्रति बोतल पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। इससे क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रामनगर बस्ती के निचले हिस्से में जल्द पाइपलाइन बिछाकर घर-घर पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो क्षेत्र के लोग उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और सरकार की होगी।

    गंडा समाज ने अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन

    राजनीति में दल-बदल: आंतरिक असंतोष से चुनौती

    भाटीन माइंस में ठेका कंपनी पर मजदूरों का आक्रोश 72 घंटे का अल्टीमेटम मांग पूरी नहीं हुई तो होगी हड़ताल

    महुलिया तक एनएच-33 सुदृढ़ीकरण कार्य का भूमि पूजन, संजय सेठ ने राज्य सरकार पर साधा निशाना- कांग्रेस की वैशाखी पर सरकार खड़ी है

    सरायकेला में बालू लदे ट्रैक्टर ने महिला को कुचला, मौत

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.