झारखंड स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा सवाल कुंभकर्णी नींद में सिविल सर्जन कार्यालय पूर्वी सिंहभूम
राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री पत्रकारों को सत्ता की धमक दिखाने में व्यस्त हैं, लेकिन विभाग में चल रहे गंभीर भ्रष्टाचार पर उनका मौन कई सवाल खड़े कर रहा है।
*जमशेदपुर से चौंकाने वाला मामला*
पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर स्थित बिरसानगर थाना क्षेत्र में एक महिला डॉक्टर द्वारा वर्ष 2022 से बिना वैध दस्तावेजों के क्लीनिक संचालन और मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है।

*मुख्य आरोप*
👉 वर्ष 2022 से अब तक हजारों मरीजों का इलाज किया गया।
👉 क्लीनिक के पास Clinical Establishment Registration Certificate नहीं है।
👉 Biomedical Waste Pollution Certificate (बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण प्रमाणपत्र) भी नहीं है।
👉 बिना आवश्यक लाइसेंस और प्रमाणपत्र के स्वास्थ्य सेवा संचालन।
⚠️ पति की भूमिका भी सवालों के घेरे में
👉 डॉक्टर के पति एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।
👉 कंपनी में ऑन-ड्यूटी रहते हुए उन्होंने एक निजी अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के लिए सहमति एवं घोषणा पत्र (Declaration) दिया।
👉 इससे हितों के टकराव और नियमों के उल्लंघन की आशंका गहरा गई है।
*विभाग की चुप्पी*
👉 सिविल सर्जन कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम अब तक मौन है।
👉 जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
👉 सवाल यह है कि क्या नियम केवल छोटे क्लीनिकों के लिए हैं?
*बड़े सवाल*

क्या बिना रजिस्ट्रेशन के क्लीनिक चलाना वैध है?
क्या हजारों मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया?
क्या प्रभावशाली लोगों के कारण कार्रवाई नहीं हो रही?
क्या स्वास्थ्य मंत्री इस मामले पर जवाब देंगे?
*जनता जानना चाहती है*
जब बिना कागजात के वर्षों तक क्लीनिक चलता रहे, हजारों मरीजों का इलाज हो, आयुष्मान योजना से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठें और विभाग चुप रहे, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।*
*आखिर वह कौन सा क्लीनिक है, जो सिविल सर्जन, उपायुक्त और स्वास्थ्य मंत्री से भी ऊपर है?*

