लेखक: मनीषा शर्मा
असम की सांस्कृतिक राजधानी गुवाहाटी में बहुप्रतीक्षित भुल्लुंग-बुथुर अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का भव्य शुभारंभ हो चुका है। श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र के श्री श्री माधवदेव अंतरराष्ट्रीय सभागार में 25 से 29 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस पांच दिवसीय सांस्कृतिक कुंभ में भारत, पोलैंड, श्रीलंका और अमेरिका के नाट्य दल अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों ने नाट्य प्रेमियों, कलाकारों और आम जनता से बड़ी संख्या में भाग लेकर इस वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान का गवाह बनने की अपील की है।
भुल्लुंग-बुथुर अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव की प्रमुख विशेषताएं
‘आंक-ए क्रिएटिव लाइन’ की पहल और ‘बडोचा फाउंडेशन’ के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव का निर्देशन डॉ. मृणाल ज्योति गोस्वामी के मुख्य पर्यवेक्षण में किया जा रहा है। यह महोत्सव केवल नाट्य मंचन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें थिएटर कार्यशालाएं, सत्रीया नृत्य-संगीत, पुस्तक विमोचन और थिएटर फोरम सहित विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समावेश है। उद्घाटन समारोह में असमिया नाट्य परंपरा से संबंधित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिससे क्षेत्रीय रंगमंच की धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और वैश्विक रंगमंच का संगम
इस वर्ष के महोत्सव की शोभा बढ़ाने के लिए पोलैंड के प्रसिद्ध कलाकार क्रिस्तोफ़ रोगासेविच मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हैं। उनके अलावा श्रीलंका और अमेरिका के नाट्य दल भी सात नाटकों का मंचन करेंगे। महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय भागीदार के रूप में कोलंबो अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव जुड़ा हुआ है, जो दक्षिण एशिया में रंगमंच के वैश्विक नेटवर्क को मजबूत करता है। यह आयोजन असम के कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय तकनीकों, शैलियों और कथानकों से रूबरू होने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है।
रंगमंच में तकनीकी क्रांति: आठ मुफ्त डिजिटल टूल्स का लोकार्पण
महोत्सव का सबसे प्रमुख और नवाचारी आकर्षण नाटक निर्माण और मंच प्रबंधन से जुड़े आठ मुफ्त डिजिटल टूल्स का लोकार्पण है। ये टूल्स विशेष रूप से असमिया और अंग्रेजी भाषाओं में विकसित किए गए हैं और इन्हें डाउनलोड करने के बाद बिना इंटरनेट के भी संचालित किया जा सकता है। यह सुविधा दूरदराज के ग्रामीण कलाकारों और सीमित संसाधनों वाले नाट्य समूहों के लिए वरदान साबित होगी। इन सॉफ्टवेयर में मंच की लाइटिंग डिजाइन, वेशभूषा प्रबंधन, मुखौटे निर्माण, निर्देशक के नोट्स, ध्वनि-चित्र नियंत्रण, पटकथा लेखन और नाट्य अभिलेखागार प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण विधाएं शामिल हैं। रंगमंच में तकनीक के इस लोकतांत्रिकरण के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप यूनेस्को विश्व रंगमंच दिवस के संसाधनों का अवलोकन कर सकते हैं।
कार्यशालाएं और पर्यावरण संवेदनशीलता
कलात्मक प्रस्तुतियों के समानांतर फिजिकल थिएटर और पर्यावरण संवेदनशीलता पर केंद्रित कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं। ये सत्र युवा रंगकर्मियों को शारीरिक अभिव्यक्ति की बारीकियां सिखाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन जैसे ज्वलंत मुद्दों को रंगमंच के माध्यम से उठाने के लिए प्रेरित करेंगे। सत्रीया नृत्य-संगीत की प्रस्तुतियां असम की शास्त्रीय कला परंपरा की झलक प्रस्तुत कर रही हैं, जो महोत्सव को स्थानीय सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती हैं।
विस्तार: तिनसुकिया में ‘बो-चांग अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव’
गुवाहाटी के बाद इस सांस्कृतिक यात्रा का अगला पड़ाव तिनसुकिया जिले का माकुम क्षेत्र होगा। 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक ‘बो-चांग अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव‘ का आयोजन किया जाएगा। यह पहल असम के सुदूर इलाकों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर के रंगमंच को ले जाने की प्रतिबद्धता दर्शाती है, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक मंच मिल सके।
असम के रंगमंच के लिए मील का पत्थर
भुल्लुंग-बुथुर अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव महज एक आयोजन नहीं, बल्कि असम की समृद्ध नाट्य परंपरा—जिसकी नींव महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव ने अनकीय नाट्य शैली के रूप में रखी थी—को आधुनिक तकनीक और वैश्विक दृष्टि से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। डिजिटल टूल्स का मुफ्त वितरण और ऑफलाइन उपलब्धता यह सुनिश्चित करती है कि तकनीक का लाभ केवल शहरी अभिजात्य वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-देहात के उन कलाकारों तक पहुंचे जो वास्तव में लोककला को जीवित रखे हुए हैं। यह महोत्सव पूर्वोत्तर भारत को विश्व रंगमंच के नक्शे पर एक मजबूत हस्ताक्षर के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

