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    Home » भारतेंदु साहित्य उत्सव में गूंजा हिंदी, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का स्वर
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    भारतेंदु साहित्य उत्सव में गूंजा हिंदी, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का स्वर

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 18, 2026No Comments3 Mins Read
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    भारतेंदु साहित्य उत्सव
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    भारतेंदु साहित्य उत्सव
    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    भारतेंदु साहित्य उत्सव

    भारतेंदु साहित्य उत्सव का आयोजन जमशेदपुर के एलबीएसएम कॉलेज में हिंदी साहित्य के युगपुरुष भारतेंदु हरिश्चंद्र की साहित्यिक चेतना, भाषा-दृष्टि, सांस्कृतिक सरोकार और राष्ट्रीय भावना को केंद्र में रखकर किया गया। यह उत्सव अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झारखंड एवं साहित्य कला परिषद, एलबीएसएम कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

    हिंदी साहित्य के युगपुरुष भारतेंदु हरिश्चंद्र की साहित्यिक चेतना, भाषा-दृष्टि, सांस्कृतिक सरोकार और राष्ट्रीय भावना को केंद्र में रखते हुए शुक्रवार को एलबीएसएम कॉलेज के सभागार में ‘भारतेंदु साहित्य उत्सव’ का भव्य आयोजन हुआ। आयोजन अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झारखंड एवं साहित्य कला परिषद, एलबीएसएम कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झारखंड के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार सिंह ने की। संयोजक एवं संचालन की जिम्मेदारी परिषद के जमशेदपुर महानगर महामंत्री सूरज सिंह राजपूत ने निभाई, जबकि स्वागताध्यक्ष कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’ रहे।

    दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में साहित्यिक विमर्श के साथ कई पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर ‘भारतेंदु साहित्य रत्न सम्मान’ से डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’, डॉ. राजश्री जयंती और डॉ. विजय शंकर को सम्मानित किया गया।

    अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने साहित्य को सामाजिक सरोकार, भाषा के विकास और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा। उनकी पत्रकारिता और साहित्यिक गतिविधियों ने जनजागरण को गति दी। उन्होंने युवा पीढ़ी को भारतेंदु के साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    तकनीकी सत्र में ‘भारतेंदु साहित्य विमर्श’ विषय पर विद्वानों ने भाषा, संस्कृति, राष्ट्रीय भावना और भारतेंदु कालीन भारत के विभिन्न पक्षों पर विचार रखे। डॉ. लक्ष्मण प्रसाद चन्द, डॉ. संजय मिश्रा, जय प्रकाश राय और क्षमा त्रिपाठी ने अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. प्रसेनजीत तिवारी ने ‘भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर आनंदमठ का प्रभाव’ विषय पर व्याख्यान दिया।

    कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण अपराह्न आयोजित भव्य कवि सम्मेलन रहा। डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’ की अध्यक्षता और सूरज सिंह राजपूत के संचालन में बिहार, झारखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवि सम्मेलन में हिंदी एवं क्षेत्रीय साहित्य की विविध विधाओं और संवेदनाओं का सुंदर समागम देखने को मिला।

    आयोजन में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, कवियों एवं साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। कार्यक्रम ने हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के विभिन्न आयामों पर संवाद का साझा मंच प्रदान किया। भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान पर विस्तृत चर्चा हुई।

    इस प्रकार भारतेंदु साहित्य उत्सव ने साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया। भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की अपेक्षा है।

    कवि सम्मेलन भारतेंदु साहित्य उत्सव राष्ट्रीय चेतना हिंदी साहित्य
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