राष्ट्र संवाद संवाददाता
घाटशिला और मुसाबनी की फिजाओं में इन दिनों एक ही नाम गूंज रहा है — सम्राट अशोक अग्रवाल। खेल और शिक्षा के मैदान में समाज सेवा की मिसाल बन चुके सम्राट अग्रवाल अब इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
खेल को दी नई उड़ान
सम्राट अग्रवाल ने हाल ही में घुटुलाडीह में भव्य फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन कर क्षेत्र में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा दी। विजेता और उपविजेता टीमों को टीवी व मिक्सर जैसे आकर्षक पुरस्कार देकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। इतना ही नहीं, 40 युवा खिलाड़ियों के लिए नॉकआउट क्रिकेट टूर्नामेंट कराकर उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा को मंच मिले तो सितारे जमीन पर भी चमकते हैं।
शिक्षा में डिजिटल क्रांति
27 साल की पत्रकारिता के बाद सम्राट अग्रवाल ने शिक्षा की राह चुनी। कभी जमशेदपुर के अशोक अग्रवाल, आज ‘सर अशोक’ के नाम से मशहूर हैं। ज्वेलरी कारोबार छोड़कर उन्होंने अपने पुराने स्कूल सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल मुसाबनी और शिवलोक पब्लिक स्कूल घाटशिला में प्री-नर्सरी से प्ले स्कूल तक की मान्यता दिलाई। IT युग को समझते हुए स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू करवाई, ताकि गांव के बच्चे भी डिजिटल दुनिया से कदम मिला सकें।
सम्मान और समर्पण
जनसेवा के लिए समर्पित सम्राट अग्रवाल ने स्कूलों में टॉपर सम्मान समारोह और झूलन महोत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुसाबनी के पत्रकारों को सम्मानित करने से लेकर देवी विश्वकर्मा मंदिर घाटशिला के कार्यक्रमों तक, हर जगह उनकी सक्रिय मौजूदगी दिखती है। ब्लड बैंक में सहयोग देकर उन्होंने मानव सेवा का संदेश भी दिया।
इलाके के लोग कहते हैं, “सम्राट अशोक अग्रवाल का नाम अब सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, समाज सेवा का ब्रांड बन चुका है।” खेल हो या शिक्षा, जहां भी बदलाव की जरूरत होती है, सम्राट अग्रवाल सबसे आगे खड़े मिलते हैं।

