लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
बरौनी रेलवे कोर्ट में निरीक्षण के लिए शुक्रवार को निरीक्षण न्यायाधीश अजीत कुमार पहुंचे, जहां उन्होंने न्यायिक व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की।
बरौनी रेलवे कोर्ट में शुक्रवार को निरीक्षण न्यायाधीश अजीत कुमार का आगमन हुआ। इस दौरान रेलवे अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्रीमती लीला की गरिमामयी उपस्थिति रही।
निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश ने न्यायालय की कार्यप्रणाली, न्यायिक व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्थाओं एवं न्यायालय से जुड़े विभिन्न पहलुओं का जायजा लिया। साथ ही न्यायिक कार्यों के सुचारु संचालन और न्यायालय परिसर में अनुशासन एवं व्यवस्था से संबंधित विषयों पर भी निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण न्यायाधीश के आगमन को लेकर न्यायालय परिसर में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालय कर्मियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों ने उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ता अभिजीत कुमार, उमाशंकर यादव, अतुल कुमार, साधना सिन्हा एवं वरुण कुमार मिश्रा सहित कोर्ट पेशकार सोहन झा, जौहर अली, सौरव कुमार, सागर, मिंटू उर्फ मिथुन एवं फखरुद्दीन समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।
बरौनी रेलवे कोर्ट में निरीक्षण के प्रमुख निष्कर्ष
भारतीय रेलवे की न्यायिक प्रणाली में बरौनी रेलवे कोर्ट एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जो पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले रेलवे अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है। शुक्रवार को हुए इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य लंबित मामलों की स्थिति, बुनियादी ढांचे की पर्याप्तता और कर्मचारियों की कार्यकुशलता का आकलन करना था। न्यायाधीश अजीत कुमार ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि न्याय वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और गति लाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रेलवे मजिस्ट्रेट श्रीमती लीला की उपस्थिति में हुई इस बैठक में अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर में बैठने की व्यवस्था, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया। निरीक्षण न्यायाधीश ने इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था का सुचारु संचालन केवल न्यायाधीशों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और वादकारियों की सहभागिता भी आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियमित निरीक्षण से निचली अदालतों में कार्य संस्कृति में सुधार आता है। भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, रेलवे न्यायालयों में डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है ताकि मामलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से हो सके। बरौनी कोर्ट में भी जल्द ही ई-फाइलिंग और वर्चुअल हियरिंग की सुविधा शुरू होने की उम्मीद है।
अधिवक्ता अभिजीत कुमार ने बताया कि निरीक्षण न्यायाधीश का रुख काफी सकारात्मक रहा और उन्होंने लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण पर बल दिया। उमाशंकर यादव और अतुल कुमार जैसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने का सुझाव दिया। कोर्ट पेशकार सोहन झा और जौहर अली ने प्रशासनिक स्तर पर आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों से न्यायाधीश को अवगत कराया।
इस निरीक्षण के बाद यह अपेक्षा की जा रही है कि आने वाले दिनों में बरौनी रेलवे कोर्ट के कामकाज में गुणात्मक सुधार देखने को मिलेगा। न्यायिक अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधीश अजीत कुमार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन कराना अब स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता होगी।

