लेखक: यदुनंदन
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती समारोह के छठे दिन बेगूसराय जिले के बीहट स्थित राजकीय कृत मध्य विद्यालय, बारो में एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में साहित्य प्रेमियों, शिक्षाविदों एवं समाजसेवियों का जमावड़ा लगा रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ आगत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं दिनकर जी के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
समाजसेवी मुक्तेश्वर प्रसाद वर्मा ने उठाए अहम सवाल
समारोह की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी मुक्तेश्वर प्रसाद वर्मा ने अपने संबोधन में दिनकर जी की भूमि बेगूसराय के प्रति उदासीनता पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “जो कोई भी बेगूसराय आते हैं, वह कहते हैं कि दिनकर की भूमि को नमन करता हूं। फिर दिनकर की मूर्ति लगाने में दिक्कत क्यों। इस ऐतिहासिक मध्य विद्यालय, बारो को अभी तक अपग्रेड क्यों नहीं किया गया।” उनकी इस बात ने उपस्थित जनसमूह को झकझोर कर रख दिया।
मुख्य वक्ता मुक्तक सम्राट अशांत भोला ने बताई दिनकर की प्रासंगिकता
आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता मुक्तक सम्राट अशांत भोला ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर विश्वकवि के रूप में प्रख्यात हो चुके हैं। उन्होंने हर जटिल समस्या पर कलम चलाई। राजधानी में रहते हुए भी दिनकर का गांव से लगाव हमेशा बना रहा। उन्होंने दिनकर की रचनाओं में निहित राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सरोकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रत्यक्ष गवाह पत्रिका के संपादक ने कहा: दिनकर भारत केसरी हैं
प्रत्यक्ष गवाह पत्रिका के संपादक पुष्कर प्रसाद सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि “राष्ट्रकवि दिनकर की कविता भारत के कोने-कोने में गूंजती है, इसीलिए वे भारत केसरी हैं। वे अतुलनीय हैं। दिनकर अपने समय के सूर्य थे। उनकी कविता सिंह गर्जन के समान है।” उनके इन शब्दों ने दिनकर की कालजयी रचनाधर्मिता को रेखांकित किया।
अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी रखे विचार
सभा को दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वम्भर सिंह, दिनकर स्मृति विकास समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष रामनाथ सिंह, समाजसेवी प्रमोद कुमार राय, शिक्षक रवींद्रनाथ ठाकुर, शिवम दुबे, प्रियव्रत कुमार, विनोद बिहारी, यशस्वी आनंद ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन युवा कवि ए के मनीष ने किया। आगत अतिथियों का स्वागत विद्यालय प्रधान विजय कुमार सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संजीव फिरोज ने प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक सत्र में छात्रों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। इसमें दिनकर की कविता का पाठ, दिनकर पर भाषण एवं उनकी रचनाओं पर नाट्य मंचन शामिल थे। इसमें निहारिका, नीतू, पिंकी, शिवम आदि छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। अंत में अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
दिनकर की विरासत को संजोने की आवश्यकता
इस आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रेरणा आज भी जनमानस में जीवंत है। आवश्यकता इस बात की है कि उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि से जुड़े स्थलों को समुचित सम्मान और संरक्षण मिले। बारो मध्य विद्यालय का उन्नयन और दिनकर की मूर्ति स्थापना जैसी मांगें केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ी हैं। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया पर दिनकर जी का जीवन परिचय पढ़ सकते हैं।

