बखरी (बेगूसराय)। नगर परिषद बखरी के वार्ड 26 में काली स्थान के पास सात वर्षों से जर्जर सड़क और नाले की समस्या को लेकर युवा जदयू के प्रखंड अध्यक्ष नीरज कुमार राय ने एसडीओ को ज्ञापन सौंपा।
बखरी में जर्जर सड़क-नाले से हजारों लोग परेशान
ज्ञापन में कहा गया है कि यह मार्ग बखरी मुख्य बाजार को सुग्गा-निसहरा सहित 10 से 15 गांवों से जोड़ता है। आसपास विद्यालय, मंदिर और धार्मिक स्थल होने से प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। जर्जर सड़क और नाले से लोगों को परेशानी हो रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह मार्ग पूरी तरह से तालाब में तब्दील हो जाता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सर्वाधिक कठिनाई होती है। कई बार शिकायत के बावजूद नगर परिषद की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। युवा जदयू नेता नीरज कुमार राय ने बताया कि यह समस्या पिछले सात वर्षों से विकराल बनी हुई है। जनप्रतिनिधि चुनाव के समय वादा करते हैं, लेकिन जीतने के बाद इस ओर ध्यान नहीं देते। इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
वार्ड 21 में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
वहीं वार्ड 21 में 27.65 लाख की लागत से बने आरसीसी नाला और पीसीसी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की। प्राक्कलन, मापी पुस्तिका, निर्माण सामग्री और भुगतान की जांच कर अनियमितता पर कार्रवाई की मांग की गई।
निर्माण कार्य में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए नीरज राय ने कहा कि नाला निर्माण के कुछ महीनों बाद ही जगह-जगह से टूटने लगा है। सड़क की पीसीसी उखड़ने लगी है। इससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने मांग की कि तकनीकी टीम गठित कर प्राक्कलन के अनुसार मापी पुस्तिका की जांच की जाए। साथ ही निर्माण सामग्री के सैंपल की लैब टेस्टिंग कराई जाए। भुगतान की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए ताकि सरकारी राशि के बंदरबांट का पर्दाफाश हो सके।
प्रशासनिक आश्वासन और आगे की रणनीति
एसडीओ ने दोनों मामलों में सात दिन में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। नीरज राय ने कहा कि समय पर कार्रवाई नहीं होने पर वे फिर अधिकारियों से मिलकर मामला उठाएंगे।
एसडीओ के आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों में एक उम्मीद जगी है, लेकिन पूर्व के अनुभवों को देखते हुए वे पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रामबली सिंह ने कहा कि प्रशासनिक आश्वासन पहले भी मिलते रहे हैं, लेकिन धरातल पर काम नहीं हुआ। इस बार अगर सात दिनों में जांच शुरू नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से भी इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
बखरी नगर परिषद क्षेत्र में विकास योजनाओं में लूट-खसोट का आरोप लगातार लगता रहा है। वार्ड पार्षदों की मिलीभगत से संवेदक मनमाने ढंग से काम करते हैं। गुणवत्ता की अनदेखी कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जाता है। जिला प्रशासन अगर सख्ती से जांच कराए तो कई बड़े घोटाले सामने आ सकते हैं। युवा जदयू के इस पहल को शहर के बुद्धिजीवियों और व्यापारियों का भी समर्थन मिल रहा है।
देखना यह होगा कि एसडीओ के सात दिन के अल्टीमेटम का क्या नतीजा निकलता है। क्या वाकई में दोषी संवेदक और अभियंताओं पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। जनता की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। बेगूसराय जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
