राष्ट्र संवाद संवाददाता संजय सिन्हा
बड़बिल- बड़बिल थाना क्षेत्र स्थित जज (जूनियर डिवीज़न)-कम-ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय के ठीक पीछे के जंगल में खुलेआम बैखोफ रूप से हो रहे शराब सेवन एवं अन्य नशा का सेवन जो ओडिशा मे सार्वजनिक स्थलो पर नशा पाबंदी का धज्जियां उड़ा रहा है।
इन दिनो उक्त जंगल का नज़ारा चौंकाने वाला है, पूरे जंगलो में विभिन्न ब्रांड के शराब बोतलों के टूटे हुए टुकड़े, टिन की बियर कैन, पेपर प्लेट, प्लास्टिक के गिलास, पानी की खाली बोतलें, सिगरेट के पैकेट और गांजा रोल करने वाले रोलिंग पेपर के खाली पैकेट चारों तरफ बिखरे पड़े थे। यह कोई आकस्मिक गंदगी नहीं थी — यह एक संगठित और नियमित नशे के अड्डे की साफ तस्वीर पेश कर रही थी।
गौर करने वाली बात यह है कि बड़बिल में हाल ही में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने के मामले में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके बावजूद, न्यायालय की चहारदीवारी से बमुश्किल दो सौ कदम की दूरी पर यहाँ नशे का यह अड्डा बेखौफ जारी है। यहाँ आने वाले नशेड़ियों में न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन की कोई चिंता।
और यह सिर्फ नशे की कहानी नहीं है। यह जंगल, जो जैव विविधता और पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, इस अवैध गतिविधि से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जंगल का फर्श शीशे के टुकड़ों, प्लास्टिक कचरे और जले हुए निशानों से पटा हुआ है। यह अवैध अतिक्रमण, वन कानूनों का उल्लंघन और पर्यावरण विनाश — तीनों एक साथ हो रहे हैं।
आखिर सवाल यह उठता है कि जिस जगह कानून की सबसे बड़ी धाक होनी चाहिए, ठीक उसी की आड़ में यह सब कैसे चल रहा है? क्या सार्वजनिक स्थलो पर नशा पाबंदी अभियान’ सिर्फ कागज़ों पर है? अब देखना यह है,कि इस सुंदर जंगल को स्थानीय पुलिस प्रशासन नशेड़ियों से मुक्त करा पाती है,या नही.ये आनेवाला समय बताऐगा।

