Author: Devanand Singh

जमशेदपुर में छेड़खानी के विरोध पर बवाल, जुगसलाई के नया बाजार में दो पक्षों में तनाव राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर: जमशेदपुर के जुगसलाई थाना अंतर्गत नया बाजार मुहल्ला में मंगलवार को छेड़खानी की घटना के बाद दो पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मौके पर अतिरिक्त बल की तैनाती कर दी है और जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नया बाजार क्षेत्र में एक युवक द्वारा युवती के साथ कथित छेड़छाड़ की गई। यह पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे…

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सारंडा वन्यप्राणी क्षेत्र पर सरकार का रुख क्या? क्षेत्र को वन्यप्राणी क्षेत्र घोषित करना चाहती है अथवा नहीं:सरयू राय राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर पश्चिम के विधायक श्री सरयू राय ने प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा है कि झारखंड सरकार सारंडा वन प्रमंडल के 314.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को वन्यप्राणी आश्रयणी (सेंक्चुअरी) घोषित करने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के 13 नवम्बर 2025 के आदेश को हू-ब-हू लागू नहीं करेगी। इस बाबत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। विधानसभा में सरयू राय द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन…

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एक दिन, तीन हादसे सुरक्षा, संवेदनशीलता और सिस्टम की कसौटी पर देश देवानंद सिंह देश ने एक ही दिन तीन अलग-अलग राज्यों से आई भयावह खबरों के बीच गहरी पीड़ा, सवाल और राहत तीनों का अनुभव किया। झारखंड के चतरा में एयर एंबुलेंस क्रैश ने सात जिंदगियां छीन लीं। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक घर में लगी भीषण आग ने पांच मासूम बच्चों समेत छह लोगों को जिंदा जला दिया। वहीं अंडमान में समुद्र में गिरे हेलिकॉप्टर से सभी सात यात्रियों का सुरक्षित बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था। ये तीनों घटनाएं अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में हुईं,…

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मुफ्त रेवड़ी संस्कृति: क्या लोकतंत्र के लिए खतरा? – ललित गर्ग- भारतीय लोकतंत्र की विडंबना यह है कि चुनाव आते ही जनसेवा का स्वरूप बदलकर जनलुभावन राजनीति में परिवर्तित हो जाता है। राजनीतिक दलों ने मुफ्त की योजनाओं को चुनावी सफलता का शॉर्टकट बना लिया है। मतदाताओं को तात्कालिक आर्थिक लाभ देकर वोट हासिल करने की प्रवृत्ति लगातार मजबूत हो रही है। आगामी तीन-चार माह में विधानसभा चुनाव होने है, इसी संदर्भ में जब असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हुईं, तब इस संस्कृति का प्रभाव और स्पष्ट दिखाई देने लगा। इसी पृष्ठभूमि में…

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सड़क दुर्घटनाएं: तेज रफ्तार बन रही युवाओं की दुश्मन वर्तमान समय में हमारे समाज के लिए सड़क दुर्घटनाएं एक अभिशाप बन गई हैं। आए दिन समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों में हम देखते हैं कि कई उभरते हुए युवक-युवतियों का जीवन सड़क पर असमय ही समाप्त हो जाता है। परिवहन विभाग द्वारा बार-बार दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद, चालकों का एक वर्ग अपने साथ-साथ दूसरों के जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। अत्यधिक गति केवल नियम का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह एक आत्मघाती कदम है। तेज़ रफ़्तार वाहन चलाते समय चालक का नियंत्रण खोने की संभावना…

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उपायुक्त को अंधेरे में रखकर भूमि माफियाओं के आगे सिक्कों की खनक पर नाच रहे अधिकारी और सीओ? नगर निगम चुनाव और राष्ट्रपति के कार्यक्रम की व्यस्तता के बीच बंदरबांट! बिरसानगर से गोविंदपुर तक दिनदहाड़े हुआ खेल? देवानंद सिंह जमशेदपुर:नगर निगम चुनाव और राष्ट्रपति के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों के बीच शहर में जमीन की बंदरबांट का बड़ा खेल चलने का आरोप सामने आया है! चर्चा है कि उपायुक्त को अंधेरे में रखकर कुछ अधिकारी और अंचलाधिकारी मनोज कुमार (सीओ) भूमि माफियाओं के इशारों पर काम कर रहे हैं? सिक्कों की खनक के आगे नियम-कानून ताक पर रख दिए गए…

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षड़यंत्र का शिकार होती शिक्षा! क्या जानबूझकर ज्ञान से दूर रखा जा रहा है हमारा समाज ! राष्ट्र संवाद मुंबई (इंद्र यादव) उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाओं से 3,40,760 परीक्षार्थियों का किनारा कर लेना एक ऐसी गूँज है, जिसे सुनकर हर जागरूक नागरिक का दिल बैठ जाना चाहिए। जब एक छात्र अपनी कलम छोड़कर परीक्षा केंद्र से बाहर निकलता है, तो वह केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं छोड़ता, बल्कि वह अपने आने वाले कल की उम्मीदों को भी पीछे छोड़ देता है। क्या यह महज डर है या कोई गहरा षड़यंत्र! अक्सर कहा जाता है कि सख्ती और नकल…

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अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026: डिजिटल युग की चुनौती -ललित गर्ग- 21 फरवरी को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस केवल मातृभाषा संस्कृति को बचाने का अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि मानवता की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। वर्ष 2026 में इसकी मुख्य थीम “बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज़” है, जो यह संकेत देती है कि भविष्य की भाषाई दिशा युवा पीढ़ी तय करेगी। यह वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस दिवस की 25वीं वर्षगांठ-रजत जयंती का प्रतीक है। वर्ष 1999 में यूनेस्को द्वारा इसकी घोषणा की गई और 2000 से इसे वैश्विक स्तर पर मनाया जा रहा…

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अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: जीवन में मिठास घोलती मातृभाषाएं • प्रमोद दीक्षित मलय- मातृभाषाएं मानव जीवन में आनन्द का उत्स हैं, लोक का अप्रतिम प्रसाद हैं और अवसाद से मुक्ति का द्वार भी। मातृभाषाएं ही नया रचने-गुनने और चिंतन-मनन करने की आधारभूमि हैं। मातृभाषा हैं तो जीवन में उमंग, उत्साह की उत्ताल तरंगें हैं। वास्तव में मातृभाषाएं जन-मन की सहज अभिव्यक्ति और कल्पना के इंद्रधनुषी रंगों को साकार करने का एक फलक हैं। मातृभाषा में कड़ाही में गुड़ बनाने के लिए पक रहे गन्ने के रस की सोंधी सुगंध और मिठास होती है। मातृभाषाओं में किसी पहाड़ी झरने की मोहक ध्वनि…

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शंकराचार्य पर आरोप: राजनीति, कानून और सनातन की कसौटी | संपादकीय विश्लेषण देवानंद सिंह- देश की धार्मिक और सामाजिक चेतना में शंकराचार्य का पद अत्यंत प्रतिष्ठित और पूजनीय माना जाता है। ऐसे में जब किसी शंकराचार्य या बड़े धार्मिक पद पर आसीन संत पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो स्वाभाविक रूप से समाज में हलचल मचती है। आस्था और आरोप आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं। इन दिनों मुक्तेश्वरानंद जी को लेकर उठ रहे सवालों ने भी इसी प्रकार की बहस को जन्म दिया है—क्या उन पर शिकंजा कसा जा रहा है? क्या उन्हें फंसाया जा रहा है? या फिर यह…

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