Author: Devanand Singh

सावधान! अगर आप भी बीवी को पढ़ा रहे हैं, तो गोंडा के ‘राजेश’ की कहानी जरूर सुन लें! राष्ट्र संवाद संवाददाता गोंडा (इंद्र यादव) कहते हैं कि प्यार अंधा होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के गोंडा में प्यार अब ‘कानूनी’ और ‘हिसाबी’ हो गया है। एक तरफ राजेश हैं, जिनका दावा है कि उन्होंने गन्ना बेचकर और पंजाब में पल्लेदारी करके पत्नी को नर्स बनाया। दूसरी तरफ रेनू हैं, जिनका कहना है कि उन्होंने अपनी पायल बेचकर खुद को काबिल बनाया। अब आलम यह है कि नर्स साहिबा को पति का साथ ‘कड़वी दवा’ जैसा लग रहा है। राजेश का…

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छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार, अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई, बोली लगे बाज़ार, ख़बरों के भी दाम हैं, बिकता हर विचार। इश्तहारों के तले, दबे जन सरोकार— छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥ मालिक की मर्ज़ी चले, लिखे वह समाचार, जो दिखना है वह दिखे, बाकी सब बेकार। शीर्षक में तूफ़ान है, भीतर खोखला सार— छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥ चंद दलालों के हुए, अब सारे अख़बार, सच की कश्ती डूबती, बीच भँवर मझधार॥ झूठों के उत्सव में, सच होता लाचार— छपकर बिकते थे…

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महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों का दोहरा चरित्र -ः ललित गर्ग:- भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि जिस देश में महिलाओं को “शक्ति”, “मातृशक्ति” और “आधी दुनिया” कहकर सम्मानित किया जाता है, वहीं राजनीति में उन्हें समान भागीदारी देने के प्रश्न पर लगभग सभी राजनीतिक दलों की नीयत संदिग्ध दिखाई देती है। संसद से लेकर चुनावी मंचों तक महिला आरक्षण के समर्थन में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब उम्मीदवारों को टिकट देने का समय आता है, तब अधिकांश दल महिलाओं को हाशिये पर धकेल देते हैं। हालिया विधानसभा चुनावों ने इस विरोधाभास…

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प्रतिनिधित्व, संतुलन और संदेश: शुभेंदु मंत्रिमंडल में नए बंगाल की झलक देवानंद सिंह पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने शुरुआती मंत्रिमंडल के माध्यम से एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुए शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री सहित कुल छह सदस्यों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह छोटा लेकिन प्रतीकात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रिमंडल राज्य के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, सामाजिक समूहों और राजनीतिक धाराओं का प्रतिनिधित्व करता है। शुभेंदु अधिकारी ने अपने पहले मंत्रिमंडल के गठन में यह संकेत…

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शुभेंदु मंत्रिमंडल में बंगाल के हर इलाके और समुदाय की झलक कोलकाता, नौ मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पांच मंत्रियों ने शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ली जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनी है। राज्य के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, लेकिन कोलकाता से किसी को भी शामिल नहीं किया गया है। पश्चिम बंगाल की विविधतापूर्ण जातीय संरचना को दर्शाते हुए, मंत्रिमंडल में मतुआ और संथाल सहित विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व है। अधिकारी की मंत्रिपरिषद के जिन पांच सदस्यों ने शपथ ली,…

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साहब! मेहनत हम बेच रहे हैं, आप बस ‘गुलामी’ खरीद रहे हैं। राष्ट्र संवाद संवाददाता मुंबई (इंद्र यादव) आज के दौर में अगर आप किसी दफ्तर, फैक्ट्री या निर्माण स्थल पर जाकर देखें, तो आपको लोग पसीने में तर-बतर जी-तोड़ मेहनत करते दिखेंगे। अक्सर बड़े-बड़े मंचों से भाषण दिया जाता है कि “मेहनत ही सफलता की कुंजी है।” लेकिन हकीकत के धरातल पर खड़े होकर एक कड़वा सवाल पूछना जरूरी हो गया है: क्या वाकई लोगों को उनकी मेहनत के बदले वाजिब हक मिल रहा है! सवाल यह नहीं है कि लोग आलसी हैं; सवाल यह है कि क्या उनकी…

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पढ़ाई बढ़ी… लेकिन स्किल क्यों नहीं बढ़ी? – डॉ. सत्यवान सौरभ आज का समाज एक अजीब विरोधाभास के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ शिक्षा का स्तर पहले से कहीं अधिक ऊँचा दिखाई देता है—हर घर में बच्चे पढ़ रहे हैं, कोचिंग, ऑनलाइन क्लासेस और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं, और परिणामस्वरूप अंक भी लगातार बेहतर हो रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ एक सवाल लगातार सिर उठाता है—क्या सच में हम सीख रहे हैं, या सिर्फ अंकों का संग्रह कर रहे हैं? यह विडंबना केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की दिशा…

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बंगाल की हिंसा है लोकतंत्र पर धब्बा और बड़ी चुनौती -ः ललित गर्ग:- पश्चिम बंगाल में हाल ही में सम्पन्न विधानसभा चुनावों के बाद जिस प्रकार हिंसा, हत्याओं, आगजनी और राजनीतिक प्रतिशोध की घटनाएं सामने आई हैं, उन्होंने केवल राज्य की शांति को ही नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को भी आहत किया है। चुनाव लोकतंत्र का उत्सव माना जाता है, किंतु जब यह उत्सव हिंसा, भय और प्रतिशोध में बदल जाए तो यह केवल राजनीतिक असफलता नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक पतन का संकेत बन जाता है। बंगाल की ताजा हिंसक घटनाएं इसी चिंता को सामने लाती हैं।…

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न्याय की कुर्सी पर बैठा इंसान भी टूट सकता है देवानंद सिंह दिल्ली के युवा न्यायिक अधिकारी अमन कुमार शर्मा की कथित आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है। अदालत में न्याय देने वाला एक जज जब स्वयं मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद और भावनात्मक दबाव के बीच जिंदगी हार जाए, तो यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं रह जाती, बल्कि समाज और व्यवस्था दोनों के सामने गंभीर सवाल खड़े करती है। 30 वर्षीय अमन कुमार शर्मा का अपने सरकारी आवास में मृत पाया जाना और उसके बाद उनके पिता द्वारा पत्नी, आईएएस साली तथा ससुराल पक्ष के अन्य…

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🕉️🌺 दैनिक पंचांग एवं राशिफल 🙏०९::०५::२०२६ शनिवार 🕉️ *ॐ नमः शिवाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे* 🚩 🌺 *((डा सुधा नन्द झा ज्यौतिषी मिथिला मनोकामना ज्यौतिष केन्द्र जमशेदपुर झारखंड मूल गांव राढ़ी दरभंगा मिथिला मो एवं वाट्सअप नंबर ९४३०३३६५०३(9430336503) दिन में एग्यारह बजे से रात्रि नौ बजे तक सम्पर्क कर सकते हैं परामर्श शुल्क अनिवार्य))* 🙏🙏 🙏 *जिनके विषय में कुछ पूछना चाहते हैं तो उनका नाम उनके पिताजी का नाम जन्म तारीख महीना इसवी जन्म समय और जन्म स्थान लिखकर दीजिए कृपया* 🙏🙏🌺🌺🙏🙏मेरा स्थायी और वर्तमान पता – (*डा सुधा नन्द झा ज्योतिषी…

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