लेखक: ललित गर्गभारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक दर्शन से नहीं है, बल्कि उन मंदिरों से भी है जो करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और जीवन का आधार हैं। अयोध्या का श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ धाम, माता वैष्णोदेवी, तिरुपति, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, सालासर बालाजी, खाटू श्यामजी जैसे मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा के जीवंत प्रतीक हैं। इन मंदिरों में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु इस विश्वास के साथ पहुंचते हैं कि यहां उन्हें केवल भगवान के दर्शन ही नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और नैतिक ऊर्जा भी प्राप्त होगी। लेकिन जब इन्हीं मंदिरों से चढ़ावे की…
Author: Devanand Singh
लेखक: ललित गर्गमंदिरों में भ्रष्टाचार एक गंभीर चुनौती है जो करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाती है।मंदिरों में भ्रष्टाचार: आस्था पर चोटभारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक दर्शन से नहीं है, बल्कि उन मंदिरों से भी है जो करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और जीवन का आधार हैं। अयोध्या का श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ धाम, माता वैष्णोदेवी, तिरुपति, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, सालासर बालाजी, खाटू श्यामजी जैसे मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा के जीवंत प्रतीक हैं। इन मंदिरों में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु इस विश्वास के साथ पहुंचते हैं कि यहां उन्हें केवल भगवान…
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददातापूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने खरसावां गढ़ स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर में रथ द्वितीया के पावन अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना की और महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्होंने समस्त जनमानस के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का खरसावां दौरा और रथयात्रा में सहभागितारथ द्वितीया के पावन अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने खरसावां गढ़ स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर महाप्रभु की विधिवत पूजा-अर्चना की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने भगवान जगन्नाथ से सभी के जीवन में…
लेखक: इंद्र यादवइंद्र यादव/मुंबई/आजकल के दौर में रीढ़ की हड्डी का इस्तेमाल सिर्फ शरीर को सीधा रखने के लिए हो रहा है, बाकी काम तो ‘चाटुकारिता’ की जीभ कर रही है। कहावत है कि नमक चाटने से हड्डियाँ गल जाती हैं, लेकिन मौजूदा समाज को देखें तो हड्डियाँ गलने की चिंता किसे है! यहाँ तो लोगों ने अपनी ज़मीर को ही ‘अचार’ बना कर रख दिया है।नमक की कड़वाहट और चाटुकारिता का स्वादसवाल हड्डियाँ गलने का नहीं, सवाल उस लत का है जो सत्ता, कुर्सी और पद के गलियारों से आती है। नमक चाटने का मतलब सिर्फ नमक का स्वाद…
लेखक: देवानन्द सिंहदेश की संसद का आगामी मानसून सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन संसद में ला सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की प्रतिनिधित्व व्यवस्था, चुनावी राजनीति और सत्ता के समीकरणों को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम होगा। स्वाभाविक है कि इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलेगी।मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमनमहिला आरक्षण का मुद्दा…
लेखक: देवानन्द सिंहदेश की संसद का आगामी मानसून सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन संसद में ला सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की प्रतिनिधित्व व्यवस्था, चुनावी राजनीति और सत्ता के समीकरणों को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम होगा। स्वाभाविक है कि इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलेगी।मानसून सत्र में महिला आरक्षण का मुद्दामहिला आरक्षण का मुद्दा…
लेखक: ललित गर्गआषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारम्भ होकर दस दिनों तक चलने वाली भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, लोकआस्था, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक दर्शन का विराट उत्सव है। पुरी की यह महायात्रा हजारों वर्षों की परम्परा का जीवंत प्रतीक है, जिसमें भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। इसी कारण इसे ‘महायात्रा’ कहा जाता है। भारत के चार धामों में प्रतिष्ठित श्री जगन्नाथ धाम की यह यात्रा देश ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व के करोड़ों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र बनती है। वर्ष 2026 की रथयात्रा भी अपार श्रद्धा एवं…
लेखक: आनंद सिंहलोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यहाँ असहमति का सम्मान किया जाता है। विरोध करना नागरिक का अधिकार है, किंतु विरोध की भी एक मर्यादा और संस्कृति होती है। हमारे संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी और शालीनता का भी आग्रह किया है। जब विरोध अपनी सीमाएँ लांघकर व्यक्तिगत अपमान, अभद्रता और सामाजिक संस्कारों के प्रदर्शन का माध्यम बन जाए, तब वह लोकतांत्रिक प्रतिरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का अवमूल्यन बन जाता है।लोकतांत्रिक मूल्यों पर संकटताजा प्रकरण जमशेदपुर पश्चिम के विधायक श्री सरयू राय की तस्वीर पर गुटखा थूकने और उनके…
लेखक: ललित गर्गआषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारम्भ होकर दस दिनों तक चलने वाली भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, लोकआस्था, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक दर्शन का विराट उत्सव है। पुरी की यह महायात्रा हजारों वर्षों की परम्परा का जीवंत प्रतीक है, जिसमें भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। इसी कारण इसे ‘महायात्रा’ कहा जाता है। भारत के चार धामों में प्रतिष्ठित श्री जगन्नाथ धाम की यह यात्रा देश ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व के करोड़ों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र बनती है। वर्ष 2026 की रथयात्रा भी अपार श्रद्धा एवं…
लेखक: आनंद सिंहलोकतंत्र में विरोध की मर्यादा एक ऐसा विषय है जो हाल की घटनाओं के आलोक में बेहद प्रासंगिक हो गया है।लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यहाँ असहमति का सम्मान किया जाता है। विरोध करना नागरिक का अधिकार है, किंतु विरोध की भी एक मर्यादा और संस्कृति होती है। हमारे संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी और शालीनता का भी आग्रह किया है। जब विरोध अपनी सीमाएँ लांघकर व्यक्तिगत अपमान, अभद्रता और सामाजिक संस्कारों के प्रदर्शन का माध्यम बन जाए, तब वह लोकतांत्रिक प्रतिरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का अवमूल्यन बन…
