लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने खरसावां गढ़ स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर में रथ द्वितीया के पावन अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना की और महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्होंने समस्त जनमानस के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का खरसावां दौरा और रथयात्रा में सहभागिता
रथ द्वितीया के पावन अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने खरसावां गढ़ स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर महाप्रभु की विधिवत पूजा-अर्चना की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने भगवान जगन्नाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
पूजा-अर्चना के बाद अर्जुन मुंडा रथयात्रा में शामिल हुए और श्रद्धालुओं के साथ मिलकर भगवान जगन्नाथ के रथ की डोर खींची। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ रथयात्रा में शामिल हुए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की असीम कृपा सभी पर बनी रहे और समाज में सुख, शांति, समृद्धि तथा आपसी सद्भाव का वातावरण कायम रहे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को रथयात्रा की शुभकामनाएं देते हुए महाप्रभु से जनकल्याण की प्रार्थना की।
रथ द्वितीया का धार्मिक महत्व और परंपरा
रथ द्वितीया, जिसे आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार एक अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर मौसी बाड़ी (गुंडिचा मंदिर) की यात्रा पर निकलते हैं। यह यात्रा जगन्नाथ पुरी विश्वप्रसिद्ध है, किंतु इसकी अनुकृति देशभर के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। खरसावां गढ़ स्थित जगन्नाथ मंदिर भी इस परंपरा का सैकड़ों वर्षों से निर्वहन कर रहा है। मान्यता है कि रथ की डोर खींचने मात्र से भक्तों के समस्त पाप कट जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। रथयात्रा का वैश्विक महत्व भी जगजाहिर है, जिसे यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया है।
खरसावां गढ़ जगन्नाथ मंदिर का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
खरसावां गढ़ स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर का निर्माण तत्कालीन खरसावां रियासत के शासकों द्वारा कराया गया था। यह मंदिर उड़िया स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना प्रस्तुत करता है। यहां प्रतिवर्ष आषाढ़ मास में भव्य रथयात्रा का आयोजन होता है, जिसमें सरायकेला-खरसावां जिले के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। मंदिर प्रांगण में प्राचीन मूर्तियां और शिलालेख इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साक्षी हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा की उपस्थिति इस ऐतिहासिक मंदिर की प्रतिष्ठा और जनमानस में इसकी आस्था को और बल प्रदान करती है।
अर्जुन मुंडा का जनजातीय कल्याण और राजनीतिक सफर
अर्जुन मुंडा झारखंड राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री के रूप में भी देश की सेवा की है। खरसावां उनकी पारंपरिक कर्मभूमि रही है और यहां के जनजातीय समाज में उनकी गहरी पैठ है। उनके द्वारा मंदिर में पूजा-अर्चना और रथ खींचना न केवल उनकी निजी आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ाव को भी दर्शाता है। वे अक्सर स्थानीय त्योहारों और मेलों में भाग लेकर जनता से सीधा संवाद स्थापित करते रहे हैं।
श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्तिमय माहौल
रथयात्रा के दौरान जय जगन्नाथ के जयघोष से पूरा खरसावां गूंज उठा। हजारों की संख्या में श्रद्धालु, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे, रथ की रस्सी को स्पर्श करने के लिए लालायित दिखे। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के लिए शरबत, पानी और भोजन की व्यवस्था की थी। शाम को महाप्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस आयोजन ने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता की मिसाल पेश की।

