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    Home » अर्जुन मुंडा ने कृष्णा मुंडा के परिजनों से मुलाकात की, पार्थिव शरीर लाने के लिए मुख्य सचिव से बात
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    अर्जुन मुंडा ने कृष्णा मुंडा के परिजनों से मुलाकात की, पार्थिव शरीर लाने के लिए मुख्य सचिव से बात

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 23, 2026Updated:August 23, 2026No Comments3 Mins Read
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    अर्जुन मुंडा
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    झारखंड के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए बुंडू प्रखंड के बेसराडीह गांव पहुंचकर दिवंगत प्रवासी श्रमिक कृष्णा मुंडा के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की। यह घटना झारखंड के उन हजारों परिवारों की पीड़ा को उजागर करती है जिनके अपने रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं और विपत्ति का शिकार हो जाते हैं। अर्जुन मुंडा ने न केवल परिवार को ढांढस बंधाया बल्कि प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय कर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द पैतृक गांव लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

    अर्जुन मुंडा ने परिजनों को दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा

    पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बेसराडीह पहुंचकर चेन्नई जाते समय रेल हादसे में मृत कृष्णा मुंडा के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

    उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण तीन दिनों से चेन्नई में पड़े पार्थिव शरीर को जल्द पैतृक गांव लाने के लिए राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और रांची उपायुक्त से बात कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।

    अर्जुन मुंडा ने कहा कि परिजनों को इस कठिन समय में परेशानी नहीं होनी चाहिए और पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक जल्द गांव पहुंचना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    प्रवासी श्रमिकों के लिए प्रभावी सहायता तंत्र की मांग

    उन्होंने राज्य के माइग्रेंट सेल की कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए कहा कि रोजगार के लिए बाहर जाने वाले झारखंड के श्रमिकों का अद्यतन डेटा और संकट के समय त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि विपत्ति के समय प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों को तत्काल सरकारी सहयोग मिलना सरकार की जिम्मेदारी है।

    किसी परिवार को अपने परिजन का पार्थिव शरीर वापस लाने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

    मुंडा ने दिवंगत कृष्णा मुंडा को श्रद्धांजलि देते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    इस घटना ने एक बार फिर झारखंड के प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और कल्याण के लिए बने तंत्र की कमियों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराज्यीय समन्वय और रियल-टाइम डेटा बेस के अभाव में संकट के समय सहायता पहुंचाने में देरी होती है। अर्जुन मुंडा द्वारा मुख्य सचिव और उपायुक्त से सीधे वार्ता करना दर्शाता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से प्रशासनिक गतिरोध को तोड़ा जा सकता है। झारखंड सरकार को चाहिए कि वह प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण, उनकी सुरक्षा और आपातकालीन निकासी के लिए एक मजबूत प्रोटोकॉल विकसित करे। अधिक जानकारी के लिए आप झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

    अर्जुन मुंडा कृष्णा मुंडा प्रवासी श्रमिक रेल हादसा
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