अखिल भारतीय साहित्य परिषद की प्रांतीय ईकाई की घोषणा ,प्रथम प्रांतीय अधिवेशन राजधानी बनवासी कल्याण केन्द्र में संपन्न
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की प्रांतीय ईकाई की घोषणा और प्रथम प्रांतीय अधिवेशन कल यानी 27 दिसंबर 2022को प्रदेश की राजधानी रांची स्थित बनवासी कल्याण केन्द्र के विशाल सभागार में संपन्न हुआ।इस अधिवेशन में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सुशील चन्द्र त्रिवेदी,राष्ट्रीय महामंत्री ऋषि कुमार मिश्र ,राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डा पवन पुत्र बादल की गरिमामय उपस्थिति
और इनके द्वारा परिषद की प्रांतीय टीम की घोषणा नई गठित प्रांतीय टीम और जिला इकाई के लिए सम्मान की बात रही पांच सत्रों में आयोजित इस एक दिवसीय आयोजन का शुभारंभ प्रांतीय इकाई की वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा रागिनी भूषण की मोहक मंगलाचरण प्रस्तुति से हुई जो मंच पर विराजमान अतिथियों के स्वागत ,
उनके आशीर्वचन और उदबोधन से होती हुई आगे बढ़ती रही।परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष,और राष्ट्रीय महामंत्री की उपस्थिति में माननीय संयुक्त महामंत्री डा पवनपुत्र बादल ने प्रांतीय टीम के नामों की घोषणा की जिसमें डा अशोक कुमार सिंह को प्रांतीय अध्यक्ष, डा विजय प्रकाश को प्रांतीय महामंत्री तथा डा रागिनी भूषण को वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया ।इसके साथ ही कमिटी के अन्य नामों की भी घोषणा हुई
जिसमें जमशेदपुर से जयंत श्रीवास्तव को प्रांतीय मंत्री , भोगेंद नाथ झा ,निवेदिता श्रीवास्तव,उपासना सिन्हा को कार्यकारिणी सदस्य , शैलेन्द्र पाण्डेय शैल को मुख्य सलाहकार एवं श्रीमती मंजू ठाकुर ,एवं डा सोनी सुगंधा को सक्रिय सलाहकार के रूप में शामिल किया गया।अधिवेशन के दौरान सांगठनिक विषयों पर चर्चा के साथ साथ एक संगोष्ठी का भी आयोजन हुआ
जिसमें डा रागिनी भूषण की अध्यक्षता में राष्ट्रीय विकास में साहित्य का योगदान विषय पर वक्ताओं ने अपने अपने विचार रखे।इस विषय पर प्रथम सत्र में डा कामिनी कुमार ,प्रतिकुलपति ,झारखंड का वक्तव्य बेहद प्रभावी रहा जिसका सबूत सभागार में उपस्थित साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों की अनवरत बजती तालियां स्वयं थीं।शुरुवाती सत्रों में अखिल भारतीय साहित्य परिषद ,रांची की जिला इकाई की अध्यक्ष मनीषा सहाय सुमन का संचालन बेहद प्रभावी रहा। अधिवेशन के अंत में कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता परिषद की जमशेदपुर इकाई के अध्यक्ष शैलेन्द्र पाण्डेय शैल एवं संचालन सह सचिव डा सोनी सुगंधा ने किया ।
सोनी सुगंधा ने कवियों की इतनी बड़ी संख्या को जिस कुशलता के साथ निभाया ,सबों ने एक स्वर में उसकी भूरी भूरी प्रशंसा की।कवि गोष्ठी के अंत में डा रागिनी भूषण जी की प्रस्तुति ..जब से सीता को विदा किया ..में राम के माध्यम से पुरुष मन की पीड़ा का अवगाहन कर श्रोता भावविह्वल हो उठे ,गीत की समाप्ति पर पूरे सभागार की आंखें प्रवाहित होती दिखीं।
इस आयोजन में अध्यक्ष डा अशोक सिंह ने जिस समर्पण और निष्ठा से कार्य किया केंद्रीय टीम के पदाधिकारियों ने उसकी प्रशंसा की तथा भविष्य में इससे भी बढ़िया आयोजन करने का आह्वान करते हुए अपने सहयोग का भी वचन दिया।इस आयोजन में जमशेदपुर से डा रागिनी भूषण ,जयंत श्रीवास्तव,शैलेन्द्र पाण्डेय शैल, राजेन्द्र सिंह , सोनी सुगंधा , डा सुनीता बेदी ,उपासना सिन्हा ,निवेदिता श्रीवास्तव ,संजय कुमार सिंह समेत कई अन्य साहित्यकार भी शामिल हुए।

