अमिताभ ठाकुर की ‘जब्ती’ और कोतवाल की ‘भक्ति’,देवरिया पुलिस का नया गुल्लक मॉडल!
राष्ट्र संवाद संवाददाता
देवरिया,उत्तर प्रदेश (इंद्र यादव) अब “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” वाले सिस्टम में एक नया ट्विस्ट आ गया है। पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने देवरिया पुलिस की ‘वर्किंग स्टाइल’ पर ऐसा सवाल उठा दिया है कि खाकी की सिलवटें अब चर्चा का विषय बन गई हैं।
मामला बड़ा दिलचस्प है! ठाकुर साहब का कहना है कि जब पुलिस ने उन्हें ‘अतिथि’ बनाया, तो उनके पास जो भी साजो-सामान और रोकड़ा था, पुलिस ने उसमें से ‘कुछ’ अपने पास ही यादगार के तौर पर रख लिया। शायद पुलिस को लगा होगा कि साहब अब जेल जा रहे हैं, वहां इन सांसारिक मोह-माया (पैसों और सामान) की क्या ज़रूरत!
सोचने वाली बात है: क्या यह पुलिस का “सर्विस चार्ज” था!
या फिर सामान की ‘सुरक्षा’ के नाम पर की गई स्वैच्छिक कटौती!
हो सकता है कि पुलिस विभाग अब “गुल्लक स्कीम” पर काम कर रहा हो, जहाँ अपराधी का सामान जमा तो होता है, पर वापसी की गारंटी ‘नेटवर्क क्षेत्र’ से बाहर रहती है!
अब कोर्ट ने कोतवाल साहब से ‘आख्या’ (जवाब) मांगी है। देखना ये है कि जवाब में “ईमानदारी का पंचनामा” पेश होता है या फिर “भूल-चूक लेनी-देनी” वाला पुराना फॉर्मूला।
जब खुद सिस्टम के अंदर रहे लोग ही सिस्टम की ‘जब्ती कला’ पर उंगली उठाएं, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी कड़ाही ही ‘रंग’ चुकी है।

