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    Home » भाजपा जमशेदपुर के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात, पूर्व मंत्री सरयू राय के कार्यकाल के वित्तीय अनियमितता की जांच स्वतंत्र जाँच एजेंसी सीबीआई या निगरानी से कराने की मांग की
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    भाजपा जमशेदपुर के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात, पूर्व मंत्री सरयू राय के कार्यकाल के वित्तीय अनियमितता की जांच स्वतंत्र जाँच एजेंसी सीबीआई या निगरानी से कराने की मांग की

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 2, 2021No Comments7 Mins Read
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    भाजपा जमशेदपुर के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात, पूर्व मंत्री सरयू राय के कार्यकाल के वित्तीय अनियमितता की जांच स्वतंत्र जाँच एजेंसी सीबीआई या निगरानी से कराने की मांग की

    जमशेदपुर। खाद्य आपूर्ति मंत्री रहते श्री सरयू राय और उनके कुछ निकटस्थ लोगों ने आहार पत्रिका के प्रकाशन तथा आउट बाउंड डायलिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की है, जिसकी उच्चरतीय जांच के लिए झारखंड की राज्यपाल महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से अनुरोध किया गया है। राज्यपाल से यह भी अनुरोध किया गया है कि किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी सीबीआई या निगरानी से मामले की जांच करायी जायें ताकि इस वित्तीय अनियमितता में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके। इतना ही नहीं श्री सरयू राय ने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए कई अन्य वित्तीय गड़बड़ियां भी की है जो अब सामने आ रही है। भाजपा आनेवाले समय में सबूत के साथ मामले को राज्य की जनता के सामने लायेगी राज्य की पुलिस या विभाग की जांच को आरोपी प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए राज्यपाल महोदया से किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की गयी है।

    पूर्व मंत्री श्री सरयू राय के कारनामें :
    मंत्री पद पर रहते श्री सरयू राय ने अपने विभागीय पत्रिका आहार के प्रकाशन के लिए। मनोनयन के आधार पर झारखंड प्रिंटर्स का चयन करवाया। झारखंड सरकार की वित्तीय एवं कार्यपालिका नियमावली कहती हैं कि 15 लाख से अधिक की राशि से होनेवाले कार्य के लिए निविदा जरूरी है। इसके बाजवूद पूर्व मंत्री श्री सरयू राय ने मंत्री रहते मनोनयन पर झारखंड प्रिंटर्स को काम दिलवाया।

    मनोनयन पर काम देने के लिए वित्तीय नियमावली के नियम 235 को शिथिल करने के लिए नियम 245 का सहारा लेना पड़ता है। साथ ही वित्त विभाग और कैबिनेट की सहमति जरुरी होती है। श्री सरयू राय ने न तो वित्त विभाग से सहमति ली न कैबिनेट से अपने स्तर से ही झारखंड प्रिंटर्स को काम देने का निर्णय ले लिया।

    जनसंपर्क विभाग राज्य सरकार के हर विभाग के प्रचार प्रसार का काम करता है लेकिन श्री सरयू राय ने मंत्री रहते अपने विभाग के लिए अलग से पत्रिका का प्रकाशन कराया। इसके पीछे एकमात्र उद्देश्य सरकारी राशि का गबन करना था।

    -झारखंड प्रिंटर्स के चयन का आधार सिर्फ वार्तालाप था। यह बात फाइल में भी दर्ज है। मजेदार बात है कि पत्रिका में विभाग की योजनाओं के प्रचार से अधिक ज्यादतर पूर्व मंत्री का गुणगान होता था। इस पत्रिका के प्रकाशन से न तो सरकार को लाभ हुआ न जनता

    कैसे हुआ घोटाला:
    बिना टैंडर के आहार पत्रिका का प्रकाशन कराया गया। वित्तीय अनियमितता के उद्देश्य से तत्कालीन विभागीय मंत्री श्री सरयू राय ने अपने ही पीए श्री आनंद कुमार को विशेषज्ञ कार्यकारी संपादक नियुक्त कर दिया। श्री आनंद कुमार से टेलीफोनिक बातचीत के आधार पर झारखंड प्रिंटर्स को हर माह 261,793 कॉपी आहार पत्रिका छापने का ऑर्डर दे दिया गया।

    – जब इस गड़बड़ी की सूचना बाहर आने लगी तो पत्रिका के प्रकाशन के लिए अप्रैल 2018 में टेंडर किया गया और काम पुनः उसी झारखंड प्रिंटर्स को दे दिया गया जो टेंडर होने के पहले से आहार पत्रिका का प्रकाशन कर रहा था।

    टेंडर में भाग लेनेवाली दूसरी कंपनियों के पास झारखंड में और राज्य के लिए काम करने का काफी ज्यादा अनुभव था, जबकि झारखंड प्रिंटर्स को सिर्फ तीन साल के काम का अनुभव था।

    मजेदार बात कि झारखंड प्रिंटर्स ने अपने काम के अनुभव के बारे में बताया कि उसने युगांतर प्रकृति नामक पत्रिका का प्रकाशन किया है। मालूम हो कि युगांतर प्रकृति के मुख्य संरक्षक श्री सरयू राय और संपादक उनके ही पीए श्री आनंद कुमार हैं। ऐसे में इस गड़बड़ी के बारे में समझना कोई मुश्किल भरा काम नहीं है।

    – झारखंड प्रिंटर्स युगांतर प्रकृति का केवल 5000 कॉपी छापता था। वितरण के नाम पर उसका अनुभव सिर्फ युगांतर प्रकृति पत्रिका को संस्था के कार्यालय तक पहुंचाना था। राज्य में पत्रिका के वितरण का उसका कोई अनुभव नहीं था। उसके बावजूद 5000 कॉपी छापने का अनुभव रखनेवाले झारखंड प्रिंटर्स को 2,61,793 कॉपी हर माह छापने का काम दे दिया गया। इतना ही नहीं वितरण के नाम पर शून्य अनुभव रखनेवाले को पूरे झारखंड में पत्रिका वितरण का काम दिया गया।

    – 10 अगस्त 2019 को प्रभात खबर में समाचार प्रकाशित हुआ कि आहार पत्रिका राशन डीलरों तक नहीं पहुंच रही है। इस खबर के आधार पर विभाग ने सभी जिला आपूर्ति पदाधिकारियों व बाबा कंप्यूटर से सात दिनों के अंदर रिपोर्ट मंगवायी।

    – 15 सितंबर 2019 को बाबा कंप्यूटर ने दूरभाष पर विभाग को जानकारी दी कि उसकी 298 डीलरों से बातचीत हुई है, जिसमें 115 ने स्वीकार किया कि उसे पत्रिका मिल रही।

    जबकि 183 ने कहा कि उसे नियमित रूप से पत्रिका नहीं मिल रही है। कुछ का कहना था कि फरवरी से ही उन्हें पत्रिका नहीं मिल रही है। एक तरफ डीलर कह रहे थे कि उन्हें पत्रिका नहीं मिल रही है दूसरी तरफ प्रिंटर्स को नियमित भुगतान किया जा रहा था। – अनियमितता और शिकायत की सूचना मिलने के बावजूद झारखंड प्रिंटर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी बल्कि उसे अवधि विस्तार दे दिया गया।

    दूसरा मामला

    मंत्री रहते सरयू राय ने 2016 में बाबा कंप्यूटर्स, रांची को काम दिया था। कंपनी का काम था खाद्य आपूर्ति विभाग की उपलब्धियों को टेलीफोन संदेश के माध्यम से लाभूकों तक पहुंचाना। प्रति कॉल कंपनी 81 पैसे चार्ज करती थी, जबकि यही काम सूचना एवं जनसंपर्क विभाग मात्र 10 पैसे में करवाता था ।

    – सरकार के प्रचार-प्रसार का काम सूचना एवं जनसंपर्क विभाग करता है, लेकिन एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए यह काम खाद्य आपूर्ति विभाग खुद से करता था। जिसके मंत्री सरयू राय खुद थे। यह एक तरह से सरकारी राशि के दूरुपयोग व गबन का मामला है।

    – बाबा कंप्यूटर्स को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर निकाला गया था। चार कंपनियों ने इसमें हिस्सा लिया था। चार में से दो कंपनी बाबा कंप्यूटर्स और जनसेवा डॉट ऑनलाइन का मालिक एक ही आदमी था, जिसका नाम रितेश गुप्ता था।

    – इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि इस बड़े घोटाले पर से पर्दा उठ सके।

    क्या है मामला

    1. खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा वर्ष 2016 में टेंडर के माध्यम से बाबा कंप्यूटर्स, रांची को Out Bound dialing solution का कार्य दिया गया। इसके लिए 0.81 रुपये में प्रति कॉल की दर निर्धारित की गयी। जबकि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा काफी कम दर 0.108 रुपये में प्रति कॉल की दर कार्य दिया गया।

    विधायक सरयू राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों का दिया जवाब निशाने पर लिया पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ-साथ राज्यपाल से मिले भाजपा नेताओं को भी कहा किसी भी एजेंसी से कराएं जांच

    2. टेंडर में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया। इसमें से दो कंपनी (बाबा कंप्यूटर्स व जनसेवा डॉट ऑनलाइन प्रा. लि.) के मालिक रितेश गुप्ता ही थे। एक अन्य विडर दुर्गा इंटरप्राइजेज, हरमू रोड का कोई भी प्रमाणिक पता नहीं है। पटना की कंपनी ने जो दर कोट की थी, वह जरूरत से ज्यादा थी। प्रथम दृष्टया यह मिली भगत का मामला दिखता है, जिसमे विभागीय मंत्री की संलिप्तता थी।

    3. वॉयस कॉल की दरें लगातार कम होती जा रही थी, लेकिन विभाग ने जानबुझ कर सेवा प्रदाता कंपनी से दरों को कम नहीं करायी बल्कि उसी दर पर वर्ष 2018-219 तक अवधि विस्तार दिया जाता रहा।

    4. माननीय महालेखाकार ने भी इसमें गड़बड़ी मानते हुए आपत्ति दर्ज की थी ।

     

    सीबीआई या निगरानी जांच हो:
    जमशेदपुर महानगर भाजपा की राज्यपाल महोदया से मांग है कि इन वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच करायी जाये। साथ ही तत्कालीन खाद्य आपूर्ति मंत्री श्री सरयू राय, उनके पीए रहे श्री आनंद कुमार और झारखंड प्रिंटस सहित कई अन्य जो इस वित्तीय अनियमितता में शामिल हैं के खिलाफ किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी सीबीआई या निगरानी से जांच करायी जाये ताकि जनता की गाढ़ी कमाई लूटनेवालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो सके।

    प्रतिनिधिमंडल में भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष गूँजन यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, रामबाबू तिवारी, जिला महामंत्री राकेश सिंह एवं कार्यालय मंत्री बोलटू सरकार उपस्थित थे।

     

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