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    Home » माना युद्ध विनाशक हैं
    साहित्य

    माना युद्ध विनाशक हैं

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 1, 2019No Comments2 Mins Read
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    अर्पणा संत सिंह

    माना युद्ध विनाशक हैं
    विध्वंसक हैं
    विभीषिका से पूर्ण हैं
    यह किसी समस्या का समाधान नहीं
    किंतु हर वक्त सहिष्णुता भी निदान नहीं
    अब बस करों
    अपनी कायरता को सहनशीलता का नाम न दों
    अब शांति का आह्वान करों
    आतंक का सर्वनाश करों
    रण करों, अब रण करों

    दुश्मनों के बहकाने पर
    इस कदर आतंक के जूनून में है
    लहू बहाना ही बना लिया है
    मकसद भी
    महजब भी
    अपने लहू को भी लहू मानता नहीं
    उस लहू को कैसे दिखलाएं
    मां भारती के जख्मों को
    सुबह का भूला है
    तो
    शाम तक इंतजार करों
    यदि नहीं
    तो अब बस करों
    देशद्रोही का काम तमाम करो
    अपनी कायरता को सहनशीलता का नाम न दों
    अब शांति का आह्वान करों
    आतंक का सर्वनाश करों
    रण करों, अब रण करों

    सत्य, अहिंसा दया क्षमा धैर्य
    उत्कृष्ट गुण हैं मनुष्य का
    किंतु इसे समझ सकता भी है
    केवल मनुष्य ही
    दुष्टों के समक्ष
    सत्य वचनों का ना उपहास करों
    हमारे धैर्य को वह अपना शौर्य समझ बैठे
    आतंक का दंभ कब तक झेलोगें
    मासूमों का कब तक निर्ममता से रक्त बहने देगें
    अब तो बस करों
    निंदा की निद्रा से जागों
    संघर्ष करों संहार करों
    अपनी कायरता को सहनशीलता का नाम न दों
    अब शांति का आह्वान करों
    आतंक का सर्वनाश करों
    रण करों, अब रण करों

     

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