कृषि बिल के खिलाफ राजनीतिक दल के साथ साथ व्यापारी वर्ग भी उतरे सड़क पर
कृषि बिल के खिलाफ और देशभर के किसानों के समर्थन में जमशेदपुर के व्यापारियों के साथ राजनीतिक दल के कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतरे और कृषि बिल का विरोध किया कृषि बिल को वापस लेने के नारे लगाए . बंदी को विभिन्न राजनीतिक दलों का भी समर्थन प्राप्त था. जुलूस की शक्ल में सड़कों पर निकले लोग पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जगह जगह सड़कों पर बैठ गए और मार्ग अवरुद्ध किया वहीं कांग्रेसी नेता आनंद बिहारी दुबे के नेतृत्व में 12 दिन में भी जुलूस निकाला गया . बंद समर्थकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ नारेबाजी की. कृषि बिल को किसानों के लिए काला कानून बताते हुए उसे वापस लेने की मांग की गई. बंद समर्थक अपने साथ तख्ती और बैनर भी लिए हुए थे .

कई जगहों पर लोगों ने बातचीत में बताया कि वे लोग किसी संगठन से ताल्लुक नहीं रखते हैं . उनका मकसद किसानों के समर्थन में आगे आना और कृषि बिल को वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बनाना है . साकची गोल चक्कर पर बड़ी संख्या में व्यापारी वर्ग ने कृषि कानून के विरोध में नारेबाजी की और प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया. इसी तरह मानगो डिमना रोड में भी लोग सड़कों पर उतरे और मार्ग को अवरुद्ध किया . लोगों के साथ कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में थे. हालांकि सीपीआई एम एल और सीपीएम के लोग भी जगह-जगह बैनर और तख्तियां लिए नारेबाजी करते हुए दिखे. आम आदमी पार्टी ने भी बंद का समर्थन किया है. वहीं पुलिस भी पूरे शहर में तत्पर थी. बंद समर्थकों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस को विधि व्यवस्था पर नजर रखने के लिए लगाया गया था. मानगो में जहां इंस्पेक्टर विनय कुमार डिमना चौक पर पुलिस बल के साथ तैनात थे. वही साकची में थाना प्रभारी कुणाल कुमार साकची गोल चक्कर पर मौजूद थे. कदमा और सोनारी में भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और जुलूस की शक्ल में चौराहों तक पहुंचे. जुगसलाई और स्टेशन चौक पर भी लोगों का हुजूम दिखा, जिसमें अधिकांशत विपक्षी राजनीतिक दलों के लोग थे. लोगों ने साकची और गोलमुरी गोल चक्कर के पास सड़कों पर टायर जलाकर मार्ग को अवरुद्ध किया और विरोध जताया. आज की बंदी में सरकारी वित्तीय प्रतिष्ठान और अन्य कार्यालय भी प्रभावित दिखे. सड़कों पर वाहन कम चले . आम दिनों की तरह सड़कों पर लोग कम निकले. कोरोना काल से ही बसों का आवागमन बंद है. लेकिन तीन पहिया वाहन और निजी चार पहिया वाहनों का आवागमन होता रहा. हालांकि उसकी संख्या कम थी. उल्लेखनीय है कि तीन स्तरीय कृषि बिल को पास कराने के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं . किसानों का कहना है कि कृषि बिल से उनकी स्वतंत्रता पर प्रहार किया गया है . निकट भविष्य में उनकी जमीन पूंजी पतियों के हाथ में होगी और वे एक ठेका मजदूर के रूप में काम करने वाले बनकर रह जाएंगे. इसके अलावा उनके उपज को सस्ते दामों में खरीदकर बड़े बड़े पूंजीपति खाद्यान्न का संग्रह करेंगे और समय आने पर उसे मुंह मांगी कीमत पर बेचा जाएगा.
पूरे बंदी के दौरान जमशेदपुर के कांग्रेसी एक सूत्र में बंधे दिख रहे हैं जो कांग्रेसियों के लिए संजीवनी का काम करेगा

